लाडनूं कस्बे के एक कबाड़ गोदाम में भीषण आग लगने से लाखों रुपए का स्क्रैप जलकर राख हो गया। दमकल और पानी के टैंकरों की मदद से करीब एक घंटे बाद आग पर काबू पाया गया। हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई।
नागौर: राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के लाडनूं कस्बे में गुरुवार रात एक कबाड़ गोदाम में लगी भीषण आग ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। रिहायशी क्षेत्र के बीच स्थित इस गोदाम में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक और स्क्रैप सामग्री रखी हुई थी, जिसके कारण आग तेजी से फैल गई और कुछ ही समय में विकराल रूप धारण कर लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग की लपटें करीब 20 फीट तक ऊपर उठ रही थीं और दूर-दूर तक धुएं का घना गुबार दिखाई दे रहा था। घटना के बाद आसपास के इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए।
सिनेमा हॉल के पीछे स्थित था गोदाम
जानकारी के अनुसार, यह हादसा लाडनूं कस्बे में सिनेमा हॉल के पीछे गली नंबर 6 में स्थित जाकिर दईया के कबाड़ गोदाम में हुआ। आग रात करीब 8 बजे लगी, जब गोदाम बंद था।
गोदाम में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, पुराने सामान और अन्य ज्वलनशील स्क्रैप रखा हुआ था, जिसकी वजह से आग तेजी से भड़कती चली गई। स्थानीय लोगों ने आग की सूचना तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को दी।
शॉर्ट सर्किट या कचरे की चिंगारी बनी वजह
आग लगने का सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन शुरुआती जांच में बिजली के शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है।

कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि पास में जलाए जा रहे कचरे से निकली चिंगारी गोदाम तक पहुंची, जिससे प्लास्टिक और कबाड़ में आग लग गई। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
दमकल और टैंकरों की मदद से बुझाई गई आग
घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। आग की गंभीरता को देखते हुए दमकल के साथ निजी पानी के टैंकरों की भी मदद ली गई।
करीब एक घंटे तक लगातार प्रयासों के बाद आग पर काबू पाया जा सका। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन आर्थिक नुकसान काफी बड़ा बताया जा रहा है।
गोदाम मालिक जाकिर दईया के अनुसार, आग में लगभग 8 लाख रुपये मूल्य का स्क्रैप और अन्य सामान पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया।
फायर स्टेशन पास होने से टला बड़ा हादसा
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, आगजनी की यह घटना फायर स्टेशन के अपेक्षाकृत नजदीक होने के कारण जल्दी नियंत्रित की जा सकी। यदि दमकल समय पर नहीं पहुंचती, तो आग आसपास के घरों और दुकानों तक फैल सकती थी।
घनी आबादी वाले इलाके में मौजूद इस कबाड़ गोदाम के कारण बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी हुई थी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि आग कुछ देर और फैलती, तो कई मकान इसकी चपेट में आ सकते थे।
रिहायशी इलाकों में कबाड़ गोदामों को लेकर बढ़ी चिंता
इस घटना के बाद लाडनूं में रिहायशी क्षेत्रों में संचालित हो रहे कबाड़ गोदामों को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसे गोदामों में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं होते और न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्लास्टिक और ज्वलनशील स्क्रैप वाले गोदाम घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बड़े खतरे का कारण बन सकते हैं। आग लगने की स्थिति में जहरीला धुआं भी लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।
प्रशासन पर उठे सवाल
घटना के बाद प्रशासन की निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई कबाड़ गोदाम बिना उचित अनुमति और सुरक्षा प्रबंधों के रिहायशी क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं।
नगरपालिका और स्थानीय प्रशासन पर आरोप लग रहे हैं कि समय रहते कार्रवाई नहीं होने के कारण ऐसे हादसों की संभावना लगातार बनी रहती है।
नगरपालिका ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत
लाडनूं नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी हरेंद्र चौधरी ने कहा कि पहले भी कई अवैध कबाड़ गोदामों को रिहायशी इलाकों से हटाया गया था। हालांकि, डंपिंग यार्ड पास होने के कारण धीरे-धीरे इन गतिविधियों ने फिर से जगह बना ली।
उन्होंने कहा कि अब प्रशासन इन गोदामों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा और उन्हें रिहायशी क्षेत्रों से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
नगरपालिका अधिकारियों के अनुसार, भविष्य में ऐसे गोदामों की नियमित जांच और सुरक्षा ऑडिट भी किया जा सकता है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य पर भी खतरा
कबाड़ और प्लास्टिक में लगी आग केवल संपत्ति का नुकसान नहीं करती, बल्कि पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, प्लास्टिक जलने से निकलने वाला धुआं जहरीला होता है, जो सांस संबंधी बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर अधिक पड़ता है।










