राजस्थान डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने अपराध समीक्षा बैठक में अधिकारियों को पुलिस की फील्ड विजिबिलिटी बढ़ाने और लंबित मामलों के जल्द निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने साइबर अपराध, संगठित अपराध, महिला सुरक्षा और सड़क सुरक्षा पर विशेष फोकस करने को कहा।
जयपुर: राजस्थान पुलिस मुख्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय अपराध समीक्षा बैठक में राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार शर्मा ने कानून-व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। जयपुर में मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में प्रदेशभर के रेंज आईजी, पुलिस कमिश्नर, जिला पुलिस अधीक्षक (SP) और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में संगठित अपराध, साइबर अपराध, महिला सुरक्षा, सड़क सुरक्षा, भ्रष्टाचार, अवैध खनन और पुलिस प्रशासनिक सुधार जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। डीजीपी शर्मा ने स्पष्ट कहा कि अगले तीन महीनों में एक वर्ष से अधिक समय से लंबित कोई भी मामला नहीं रहना चाहिए।
अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था पर विशेष फोकस
बैठक के दौरान डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए फील्ड स्तर पर पुलिस की सक्रियता और उपस्थिति बढ़ाई जाए।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अवैध खनन, बजरी परिवहन और भ्रष्टाचार के मामलों में “जीरो टॉलरेंस” नीति पर काम कर रही है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डीजीपी ने सभी जिला पुलिस प्रमुखों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में संगठित अपराध और गैंगस्टर गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखें तथा प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
तीन महीने में खत्म हों पुराने लंबित मामले
अपराध समीक्षा बैठक में लंबित मामलों को लेकर डीजीपी ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अगले तीन महीनों में एक साल से अधिक पुराने सभी मामलों का निस्तारण किया जाए।
उन्होंने जांच अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके अलावा झूठे मुकदमों के खिलाफ भी प्रभावी कार्रवाई करने को कहा गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय से लंबित मामलों का निपटारा होने से न्याय प्रक्रिया में तेजी आएगी और पुलिस व्यवस्था पर जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।
गैंगस्टर और संगठित अपराध पर कार्रवाई तेज करने के निर्देश
बैठक में राजस्थान में सक्रिय गैंगस्टर नेटवर्क और संगठित अपराध की गतिविधियों की समीक्षा की गई। डीजीपी ने प्रभावित जिलों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने और फोकस्ड ऑपरेशन चलाने के निर्देश दिए।
उन्होंने आपराधिक गतिविधियों से अर्जित संपत्तियों की कुर्की और जब्ती की प्रक्रिया को तेज करने पर भी जोर दिया।
राजस्थान पुलिस पिछले कुछ समय से संगठित अपराध और गैंगवार की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए विशेष अभियान चला रही है। बैठक में इसी दिशा में आगे की रणनीति पर भी चर्चा हुई।

नए आपराधिक कानूनों और तकनीक के इस्तेमाल पर जोर
बैठक में नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई। डीजीपी शर्मा ने सूचना और संचार तकनीक (ICT) के अधिकतम उपयोग पर जोर देते हुए ई-सम्मन, डिजिटल वारंट और ऑनलाइन एफआईआर व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि डिजिटल पुलिसिंग के जरिए जांच प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकता है।
इसके अलावा पुलिस थानों में आने वाले लोगों को ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित करने की बात भी कही गई, ताकि शिकायतकर्ता अपने केस की प्रगति की जानकारी नियमित रूप से प्राप्त कर सकें।
सड़क सुरक्षा पर विशेष अभियान चलाने के निर्देश
बैठक में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की गई। विशेष रूप से भीलवाड़ा और उदयपुर क्षेत्रों में सड़क हादसों में अधिक मृत्यु दर को गंभीर विषय माना गया।
डीजीपी ने संबंधित जिला पुलिस अधिकारियों को दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए।
उन्होंने हाईवे और ग्रामीण क्षेत्रों में हेलमेट के अनिवार्य उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए हर सप्ताह दो दिन विशेष चेकिंग अभियान चलाने को कहा।
इसके अलावा इंटरसेप्टर वाहन और ब्रेथ एनलाइजर मशीनों के अधिक उपयोग के जरिए शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए।
पुलिसकर्मियों के लिए भी हेलमेट अनिवार्य
डीजीपी राजीव शर्मा ने पुलिसकर्मियों के लिए भी सख्त निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि कोई भी पुलिसकर्मी बिना हेलमेट दोपहिया वाहन का उपयोग न करे।
इसके लिए पुलिस लाइन और कार्यालय परिसरों में विशेष निगरानी व्यवस्था करने को कहा गया है। अधिकारियों का मानना है कि यदि पुलिस स्वयं यातायात नियमों का पालन करेगी तो आम जनता में भी सकारात्मक संदेश जाएगा।
साइबर अपराध नियंत्रण पर बढ़ा फोकस
बैठक में साइबर अपराधों को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। डीजीपी ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर प्राप्त शिकायतों की समीक्षा करते हुए सभी एसपी को नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि साइबर धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित कार्रवाई और बेहतर जांच प्रणाली विकसित करना समय की बड़ी आवश्यकता है।
साथ ही साइबर अपराधों के प्रति जनता में जागरूकता फैलाने और डिजिटल सुरक्षा उपायों को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
महिला सुरक्षा और पुलिस सुविधाओं की समीक्षा
अपराध समीक्षा बैठक में महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। डीजीपी ने महिला सुरक्षा अभियानों के प्रभावी संचालन और संवेदनशील मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इसके अलावा पुलिस थानों में महिला कर्मियों के लिए सुविधाओं में सुधार, पुलिस लाइन में सामुदायिक सुविधाओं के उन्नयन और कार्यस्थल पर बेहतर माहौल बनाने पर चर्चा की गई।
बैठक में अभय कमांड सेंटर से जुड़े सीसीटीवी कैमरों की स्थिति और निजी कैमरों के एकीकरण की भी समीक्षा की गई, ताकि निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।
केस ऑफिसर स्कीम के तहत होंगे महत्वपूर्ण मामले
डीजीपी ने जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि गंभीर और महत्वपूर्ण मामलों को “केस ऑफिसर स्कीम” में शामिल किया जाए।
इस योजना के तहत वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में मामलों की जांच तेज और गुणवत्तापूर्ण तरीके से की जाएगी, जिससे जल्द न्याय सुनिश्चित हो सके।
वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
इस उच्चस्तरीय बैठक में डीजीपी राजीव कुमार शर्मा के साथ कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इनमें अनिल पालीवाल, आनंद श्रीवास्तव, वी.के. सिंह, बिपीन कुमार पांडे, प्रशाखा माथुर, बीजू जॉर्ज जोसफ और लता मनोज कुमार सहित पुलिस मुख्यालय के अन्य अधिकारी शामिल थे।
राजस्थान पुलिस की यह समीक्षा बैठक राज्य में कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।










