बाड़मेर के शिव क्षेत्र में विधायक रविंद्र सिंह भाटी का RSMML के खिलाफ चल रहा धरना आठवें दिन भी जारी रहा। भीषण गर्मी में उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद डॉक्टर ने ड्रिप लगाई। वे मांगें पूरी होने तक आंदोलन पर अड़े हैं।
बाड़मेर: Ravindra Singh Bhati बाड़मेर जिले के शिव क्षेत्र के गिरल गांव में चल रहे लंबे धरने के दौरान बुधवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। तेज गर्मी और हीटवेव के बीच पिछले 8 दिनों से लगातार धरना स्थल पर मौजूद विधायक की हालत खराब होने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) से डॉक्टरों को बुलाया गया और उन्हें ड्रिप चढ़ाई गई।
इलाज के बाद उनकी स्थिति स्थिर बताई गई और वे फिर से धरना स्थल पर ही मौजूद रहे। यह आंदोलन Rajasthan State Mines and Minerals Limited के खिलाफ ग्रामीणों की मांगों को लेकर पिछले लगभग एक महीने से जारी है।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण और समर्थक भी लगातार मौजूद हैं, जो कठिन मौसम परिस्थितियों के बावजूद आंदोलन को जारी रखे हुए हैं।
ग्रामीणों की मांगों को लेकर एक महीने से आंदोलन
गिरल गांव में चल रहे इस आंदोलन की शुरुआत स्थानीय मजदूरों और ड्राइवरों की मांगों को लेकर हुई थी। ग्रामीणों की मुख्य मांगों में शामिल हैं:
- 100 से अधिक ड्राइवरों की पुनर्बहाली
- श्रमिकों के लिए 8 घंटे की ड्यूटी व्यवस्था
- स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता
- नियमानुसार सुविधाओं और अधिकारों की गारंटी
ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जबकि कई बार RSMML अधिकारियों के साथ वार्ता भी हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया।

“जेल छोटी पड़ जाएगी”: भाटी का सरकार को सख्त संदेश
धरना स्थल पर लगातार आक्रामक रुख अपनाते हुए रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ रोजगार की नहीं, बल्कि क्षेत्र के सम्मान और अधिकारों की है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे आंदोलन को और बड़ा कर सकते हैं। उन्होंने कहा:
- वे अकेले बैठे हैं, लेकिन हालात बदल सकते हैं
- अगर लोगों को बुलाया गया तो स्थिति संभालना मुश्किल होगा
- जेल उनके लिए कोई नई बात नहीं है
भाटी ने यह भी कहा कि उन्होंने पहले भी जेल देखी है और वे किसी दबाव से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
12 घंटे काम बनाम 8 घंटे वेतन का मुद्दा
धरना स्थल पर एक दिन पहले दिए गए बयान में विधायक ने श्रमिकों की कार्य परिस्थितियों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि कई जगह कर्मचारियों से 12 घंटे तक काम लिया जा रहा है, जबकि वेतन केवल 8 घंटे का दिया जाता है।
उनके अनुसार यह न केवल श्रमिकों के अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि क्षेत्र में असमानता और असंतोष को भी बढ़ा रहा है। उन्होंने प्रशासन से इस व्यवस्था को तुरंत सुधारने की मांग की।
भीषण गर्मी के बावजूद जारी समर्थन
राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में तेज हीटवेव और लू के बावजूद धरना स्थल पर लगातार लोगों की मौजूदगी बनी हुई है। ग्रामीण खुले आसमान के नीचे आंदोलन कर रहे हैं और कई लोग रात में भी वहीं रुक रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। धरना स्थल पर माहौल शांत लेकिन दृढ़ बना हुआ है, और लोगों का समर्थन लगातार बढ़ता जा रहा है।
प्रशासन और सरकार पर बढ़ता दबाव
यह आंदोलन अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों और विधायक की मौजूदगी ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन पर समाधान निकालने का दबाव बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक चल रहे ऐसे आंदोलनों में यदि संवाद और समाधान नहीं निकलता, तो यह क्षेत्रीय असंतोष को और गहरा कर सकता है।











