राज्यसभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मिडिल ईस्ट संकट पर बयान देते हुए कहा कि भारत सरकार हालात पर नजर रखे हुए है। सरकार की प्राथमिकता क्षेत्र में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना है।
New Delhi: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को लेकर भारत सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति गंभीर बनी हुई है। इसी मुद्दे को लेकर संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन राज्यसभा में चर्चा हुई। इस दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सरकार की ओर से विस्तृत जानकारी दी और बताया कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है।
राज्यसभा में उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता मिडिल ईस्ट में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं और जरूरत पड़ने पर भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था भी की जा रही है।
राज्यसभा में उठा पश्चिम एशिया का मुद्दा
राज्यसभा में यह मुद्दा तब उठा जब कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में सदन के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने पश्चिम एशिया के बदलते हालात पर चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा कि मौजूदा जियोपॉलिटिकल परिस्थितियों को देखते हुए भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।
उन्होंने नियम 176 के तहत इस विषय पर चर्चा की अनुमति मांगी। इसके बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर सरकार की ओर से जवाब देने के लिए खड़े हुए और उन्होंने मिडिल ईस्ट की स्थिति पर विस्तृत जानकारी दी।
मिडिल ईस्ट में हालात अभी भी तनावपूर्ण
विदेश मंत्री ने बताया कि मिडिल ईस्ट में फिलहाल हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। कई क्षेत्रों में संघर्ष जारी है और सुरक्षा स्थिति पहले के मुकाबले कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार लगातार इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र में भारतीय दूतावास सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं और वहां रह रहे भारतीय नागरिकों को हर संभव मदद पहुंचाई जा रही है। जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की जा रही है।
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना है।
अर्मेनिया के रास्ते भारतीयों को निकाला जा रहा
राज्यसभा में विदेश मंत्री ने बताया कि मिडिल ईस्ट के कुछ क्षेत्रों से भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए अर्मेनिया के रास्ते का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह रास्ता फिलहाल सबसे सुरक्षित विकल्पों में से एक माना जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारतीय दूतावास और संबंधित एजेंसियां लगातार लोगों से संपर्क में हैं। जो लोग वापस भारत लौटना चाहते हैं उन्हें सुरक्षित तरीके से निकालने की प्रक्रिया जारी है। सरकार का कहना है कि यह काम बेहद सावधानी और समन्वय के साथ किया जा रहा है ताकि किसी भी भारतीय नागरिक की सुरक्षा से समझौता न हो।
राज्यसभा में हंगामे के बीच दिया बयान
जब विदेश मंत्री मिडिल ईस्ट की स्थिति पर बयान देने के लिए खड़े हुए तो उस दौरान राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने आपत्ति जताई। इस वजह से सदन में कुछ देर के लिए हंगामा और नारेबाजी भी हुई।

इसके बावजूद विदेश मंत्री जयशंकर ने अपनी बात जारी रखी और सरकार की ओर से आधिकारिक जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर चर्चा होनी चाहिए क्योंकि यह देश के नागरिकों और राष्ट्रीय हित से जुड़ा मामला है।
भारत ने पहले ही जताई थी चिंता
जयशंकर ने अपने बयान में यह भी बताया कि भारत सरकार ने 20 फरवरी को ही मिडिल ईस्ट की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया था। उस बयान में सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की गई थी।
उन्होंने कहा कि भारत का हमेशा से यह मानना रहा है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए। युद्ध या हिंसा से केवल नुकसान बढ़ता है।
उन्होंने यह भी बताया कि मौजूदा हालात में ईरान के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क करना आसान नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री से बातचीत की है और स्थिति पर चर्चा की है।
प्रधानमंत्री मोदी लगातार हालात पर नजर रख रहे
राज्यसभा में विदेश मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिडिल ईस्ट के पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नियमित रूप से स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं।
इसके साथ ही विदेश मंत्रालय सहित कई अन्य मंत्रालय भी एक दूसरे के साथ समन्वय कर रहे हैं ताकि किसी भी स्थिति में तुरंत और प्रभावी प्रतिक्रिया दी जा सके। जयशंकर ने कहा कि मिडिल ईस्ट भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है और यहां की स्थिरता भारत के हितों से सीधे जुड़ी हुई है।
खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में रहते हैं भारतीय
विदेश मंत्री ने बताया कि खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। यह भारतीय समुदाय वहां की अर्थव्यवस्था का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इसके अलावा ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और कामकाजी लोग मौजूद हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का संघर्ष भारत के लिए चिंता का विषय बन जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार इन सभी भारतीयों के संपर्क में है और जरूरत पड़ने पर उनकी मदद के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
एनर्जी सिक्योरिटी पर भी असर की आशंका
जयशंकर ने यह भी कहा कि मिडिल ईस्ट भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद अहम क्षेत्र है। भारत अपनी तेल और गैस की बड़ी मात्रा इसी क्षेत्र से आयात करता है।
ऐसे में अगर इस क्षेत्र में लंबे समय तक अस्थिरता बनी रहती है तो इसका असर वैश्विक सप्लाई चेन और एनर्जी मार्केट पर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि फिलहाल सप्लाई चेन प्रभावित जरूर हुई है लेकिन सरकार स्थिति को नियंत्रण में रखने की पूरी कोशिश कर रही है।
दो भारतीय व्यापारिक जहाजों को नुकसान
विदेश मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि इस संघर्ष के दौरान दो भारतीय व्यापारिक जहाजों को नुकसान हुआ है। इसके अलावा एक जहाज अभी भी लापता बताया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस मामले में संबंधित एजेंसियां जांच और खोजबीन कर रही हैं। सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि जहाज और उनके क्रू मेंबर्स के बारे में जल्द से जल्द जानकारी मिल सके।
हजारों भारतीयों की सुरक्षित वापसी
जयशंकर ने बताया कि अब तक बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से क्षेत्र से बाहर निकल चुके हैं। उन्होंने कहा कि कल तक लगभग 67,000 भारतीय अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर चुके हैं।
सरकार की कोशिश है कि जो भी भारतीय वापस आना चाहते हैं उन्हें सुरक्षित तरीके से भारत लाया जाए। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं।











