रांची में पांच महीनों के दौरान जांच किए गए 54 खाद्य नमूनों में 9 मानकों पर खरे नहीं उतरे। पनीर, खोवा, घी, मिठाई और होटल के पेयजल के नमूने जांच के दायरे में रहे।
रांची: राजधानी में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। पिछले पांच महीनों में प्राप्त 54 जांच रिपोर्ट में 9 खाद्य नमूने मानकों के अनुरूप नहीं मिले। इनमें पनीर, खोवा, घी और मिठाई जैसे डेयरी उत्पादों के साथ होटल-रेस्टोरेंट से लिए गए पेयजल के नमूने भी शामिल हैं।
पांच महीने में 9 खाद्य नमूने मानकों पर फेल
रांची जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच के दौरान 9 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, पिछले पांच महीनों में अलग-अलग होटल, रेस्टोरेंट और दुकानों से खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए थे। इन्हें जांच के लिए राज्य खाद्य जांच प्रयोगशाला भेजा गया था।

विभाग को अब तक 14 जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई हैं, जिनमें 9 खाद्य उत्पाद सब-स्टैंडर्ड श्रेणी में पाए गए। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित खाद्य कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
धुर्वा, डोरंडा, रातू रोड, ओरमांझी और बूटी मोड़ के अलावा बुंडू और तमाड़ समेत जिले के अन्य क्षेत्रों से भी खाद्य पदार्थ और पानी के नमूने लिए गए थे।
पनीर और खोवा की गुणवत्ता पर सबसे ज्यादा सवाल
जांच में पनीर, खोवा, मिठाई और घी जैसे डेयरी उत्पादों के नमूने भी मानकों पर खरे नहीं उतरे। ये खाद्य पदार्थ रोजाना बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं तक पहुंचते हैं, इसलिए इनकी गुणवत्ता में कमी मिलना खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण चिंता का विषय है।
हालांकि, किसी खाद्य पदार्थ का सब-स्टैंडर्ड पाया जाना सीधे तौर पर उसके जहरीले या असुरक्षित होने का प्रमाण नहीं है। इसका अर्थ है कि उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करता। किसी खाद्य पदार्थ को असुरक्षित घोषित करने के लिए स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले तत्व या निर्धारित सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का प्रमाण जरूरी होता है।
सब-स्टैंडर्ड खाद्य पदार्थ पर पांच लाख तक जुर्माना
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करने वाले खाद्य पदार्थ को सब-स्टैंडर्ड माना जाता है। अधिनियम की धारा 51 के तहत ऐसे खाद्य पदार्थ के निर्माण, भंडारण, बिक्री या वितरण पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद सक्षम अधिकारी यह तय करता है कि मामला केवल आर्थिक दंड से जुड़ा है या इसमें अभियोजन की जरूरत है। संबंधित कारोबारी को कार्रवाई से पहले अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाता है।
गलत लेबलिंग के मामलों में धारा 52 के तहत तीन लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता या प्रकृति उपभोक्ता की मांग के अनुरूप नहीं होने पर धारा 50 के तहत पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
असुरक्षित खाद्य पदार्थ मिलने पर कार्रवाई ज्यादा सख्त
खाद्य पदार्थ की प्रकृति और उल्लंघन के स्तर के आधार पर कार्रवाई अलग-अलग हो सकती है। यदि जांच में कोई खाद्य पदार्थ असुरक्षित पाया जाता है और मामला गंभीर प्रकृति का है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत अधिक कड़ी कार्रवाई और सजा का प्रावधान है।
इसलिए सब-स्टैंडर्ड और अनसेफ खाद्य पदार्थों को एक ही श्रेणी में रखना सही नहीं होगा। रांची में सामने आए मामलों में विभाग अब जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई कर रहा है।
करीब 300 सैंपल जांच की कतार में
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, अभी करीब 300 सैंपल जांच की प्रक्रिया में हैं। ऐसे में आने वाले समय में और जांच रिपोर्ट सामने आ सकती हैं। विभाग के सामने चुनौती केवल नमूने एकत्र करने की नहीं, बल्कि मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले उत्पादों के कारोबारियों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी है।
खासकर डेयरी उत्पाद बेचने वाले प्रतिष्ठानों, होटल-रेस्टोरेंट और खाद्य दुकानों में नियमित सैंपलिंग और जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्ट्रीट फूड वेंडर्स को भी दिया जा रहा प्रशिक्षण
खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से स्ट्रीट फूड वेंडर्स को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाता रहा है। इसमें भोजन तैयार करने और परोसने की सुरक्षित प्रक्रिया, खाद्य सामग्री का सही भंडारण, साफ पानी के इस्तेमाल और व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़े नियमों की जानकारी दी जाती है।
वेंडर्स को एप्रन, ग्लव्स और हेयर गियर के इस्तेमाल के प्रति भी जागरूक किया जाता है। अधिकारियों के अनुसार, असुरक्षित खाद्य पदार्थों से कई संक्रामक बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए खाद्य कारोबारियों के लिए निर्धारित मानकों का पालन करना जरूरी है।
सभी जिलों में फूड सेफ्टी अपीलीय ट्रिब्यूनल सक्रिय
झारखंड में फूड सेफ्टी अपीलीय ट्रिब्यूनल से जुड़े मामले में भी हाई कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। जस्टिस आनंद सेन की अदालत में रजिस्ट्रार जनरल की ओर से ट्रिब्यूनल के गठन और संचालन से संबंधित अधिसूचना पेश की गई।
अदालत को बताया गया कि जिन जिलों में पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति नहीं होने के कारण ट्रिब्यूनल निष्क्रिय थे, वहां अब नियुक्तियां कर दी गई हैं। इसके साथ ही राज्य के सभी जिलों में फूड सेफ्टी अपीलीय ट्रिब्यूनल के कामकाज को सक्रिय बताया गया।
दुमका में भी पीठासीन अधिकारी का पद भर दिया गया है। 21 अगस्त 2026 को दुमका के जिला जज को ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। यह मामला रंजन कुमार की ओर से दाखिल याचिका से जुड़ा है।










