लखनऊ: उत्तर प्रदेश में लाइब्रेरियन भर्ती की मांग को लेकर युवाओं का आक्रोश सड़क पर देखने को मिला। राजधानी लखनऊ में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने डिप्टी मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आवास का घेराव कर भर्ती प्रक्रिया शुरू कराने की मांग की। प्रदर्शन कर रहे युवाओं का कहना था कि लाइब्रेरियन के पदों पर लंबे समय से भर्ती नहीं हुई है और वर्ष 2016 के बाद से नई भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। युवाओं ने सरकार से खाली पदों की संख्या स्पष्ट करने और जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग उठाई।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना था कि लाइब्रेरियन के पदों पर भर्ती नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में योग्य युवा वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें रोजगार का अवसर नहीं मिल पा रहा है। उनका आरोप है कि विभागों और शिक्षण संस्थानों में लाइब्रेरियन के पद खाली होने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा रही है।
युवाओं के प्रदर्शन के दौरान सरकार से तत्काल भर्ती विज्ञापन जारी करने की मांग की गई। अभ्यर्थियों का कहना था कि उन्होंने लाइब्रेरी साइंस और संबंधित शैक्षणिक योग्यता हासिल करने के बाद वर्षों तक सरकारी नौकरी की तैयारी की है। उम्र बढ़ने के साथ उनके सामने अवसरों की संख्या भी कम होती जा रही है। ऐसे में लंबे समय से रुकी भर्ती को जल्द शुरू करना जरूरी है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि यदि विभाग में बड़ी संख्या में पद खाली हैं तो उनका नियमित आकलन कर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। युवाओं का तर्क है कि सरकारी संस्थानों में लाइब्रेरी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षित लाइब्रेरियन की आवश्यकता होती है। खाली पदों के कारण विद्यार्थियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
डिप्टी मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रदर्शन कर रहे युवाओं की मांग को सुना और समस्या का समाधान निकालने का भरोसा दिया। उन्होंने अभ्यर्थियों को आश्वासन दिया कि उनकी मांग पर संबंधित स्तर पर विचार किया जाएगा और भर्ती से जुड़े मामले में आवश्यक कदम उठाने की कोशिश की जाएगी।
डिप्टी CM के आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारी युवाओं को उम्मीद है कि लंबे समय से अटकी भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकार जल्द कोई ठोस निर्णय लेगी। हालांकि अभ्यर्थियों की मुख्य मांग यही है कि केवल आश्वासन तक मामला सीमित न रहे, बल्कि भर्ती का आधिकारिक कार्यक्रम जारी किया जाए।
लाइब्रेरियन भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्ष 2016 के बाद से उन्हें नई भर्ती का इंतजार है। लंबे अंतराल के कारण भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कई अभ्यर्थी ऐसे हैं जिन्होंने वर्षों से अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की है, लेकिन संबंधित पदों पर नियमित वैकेंसी नहीं आने के कारण उन्हें अवसर नहीं मिल सका।
अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकारी भर्ती में लंबे अंतराल का असर सीधे युवाओं के करियर पर पड़ता है। एक ओर वे लगातार परीक्षा की तैयारी करते रहते हैं, वहीं दूसरी ओर भर्ती नहीं निकलने से उनकी उम्र बढ़ती जाती है। ऐसे में सरकार को रिक्त पदों की गणना कर नियमित भर्ती कैलेंडर के तहत प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी भी की। उनका कहना था कि लाइब्रेरियन के पदों पर भर्ती केवल रोजगार का मुद्दा नहीं है, बल्कि सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में पुस्तकालय व्यवस्था को मजबूत करने से भी जुड़ा हुआ है।
लाइब्रेरी विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई और संदर्भ सामग्री का महत्वपूर्ण केंद्र होती है। यहां किताबों के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं, शोध और शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़ी सामग्री उपलब्ध रहती है। इसलिए लाइब्रेरी की व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता होती है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि लंबे समय से पद खाली हैं तो सरकार को विभागवार रिक्तियों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। इससे अभ्यर्थियों को यह स्पष्ट हो सकेगा कि कुल कितने पद खाली हैं और किन विभागों या संस्थानों में लाइब्रेरियन की आवश्यकता है।
भर्ती प्रक्रिया में देरी का एक दूसरा असर यह भी है कि संबंधित विषय में प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को निजी क्षेत्र या दूसरे रोजगार विकल्पों की ओर जाना पड़ता है। कई अभ्यर्थी सरकारी नौकरी की तैयारी में वर्षों लगा चुके हैं और अब वे भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार एक निश्चित समयसीमा तय करे। इसमें रिक्त पदों का आकलन, अधियाचन भेजने, भर्ती विज्ञापन जारी करने, आवेदन प्रक्रिया, परीक्षा और नियुक्ति तक की पूरी प्रक्रिया शामिल हो। इससे अभ्यर्थियों को अनिश्चितता से राहत मिल सकती है।
ब्रजेश पाठक की ओर से समाधान का भरोसा मिलने के बाद अब अभ्यर्थियों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। यदि संबंधित विभागों से रिक्त पदों का विवरण लेकर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाती है तो लंबे समय से तैयारी कर रहे युवाओं को बड़ी राहत मिल सकती है।
युवाओं का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। उनका उद्देश्य केवल इतना है कि वर्षों से लंबित भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए और योग्य अभ्यर्थियों को अपनी योग्यता के आधार पर सरकारी सेवा में आने का अवसर मिले।
लखनऊ में डिप्टी CM आवास के बाहर हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर सरकारी भर्तियों में लंबे अंतराल और भर्ती कैलेंडर को लेकर युवाओं की चिंता सामने ला दी है। अभ्यर्थियों की उम्मीद अब सरकार की ओर से होने वाली अगली कार्रवाई पर टिकी है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2016 के बाद से भर्ती का इंतजार कर रहे लाइब्रेरियन अभ्यर्थियों के लिए सरकार कब तक नई भर्ती का रास्ता साफ करती है। डिप्टी मुख्यमंत्री के आश्वासन से प्रदर्शनकारियों को उम्मीद जरूर मिली है, लेकिन युवाओं की मांग है कि जल्द ही रिक्त पदों का आंकड़ा जारी कर भर्ती का आधिकारिक विज्ञापन निकाला जाए। इससे वर्षों से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को रोजगार का अवसर मिलेगा और सरकारी संस्थानों में पुस्तकालय व्यवस्था को भी मजबूती मिल सकेगी।