RBI का आकलन, भारतीय बैंक मजबूत लेकिन NBFC से बढ़ेगा दबाव

RBI का आकलन, भारतीय बैंक मजबूत लेकिन NBFC से बढ़ेगा दबाव

RBI की 2024-25 रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय बैंकिंग सेक्टर मजबूत बना हुआ है। बैंकों की बैलेंस शीट बेहतर है और NPA 10 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है, हालांकि आगे पूंजी और प्रतिस्पर्धा की चुनौतियां बनी रह सकती हैं।

RBI Report: भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने अपनी ताजा ‘प्रवृत्ति और प्रगति रिपोर्ट 2024-25’ जारी की है। इस रिपोर्ट में भारत के बैंकिंग सेक्टर को लेकर एक संतुलित लेकिन अहम तस्वीर सामने आई है। RBI के मुताबिक भारतीय बैंकिंग क्षेत्र इस समय मजबूत स्थिति में है। 

बैंकों की बैलेंस शीट बेहतर है। मुनाफा लगातार बना हुआ है। फंसा हुआ कर्ज यानी NPA बीते 10 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि आने वाले समय में बैंकों को पूंजी जुटाने और गैर-बैंक संस्थानों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की मजबूत ग्रोथ

RBI की रिपोर्ट में कहा गया है कि तेजी से बदलते global environment के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत growth दर्ज की है। दुनिया के कई हिस्सों में आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है लेकिन भारत का macro outlook फिलहाल सकारात्मक नजर आ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार निकट भविष्य में भी आर्थिक गतिविधियां स्थिर रहने की संभावना है। इसके साथ ही inflation भी कई साल के निचले स्तर पर आ चुकी है। महंगाई में आई इस राहत से उपभोक्ताओं की spending capacity और overall demand को सपोर्ट मिल रहा है।

मजबूत बैलेंस शीट से बैंकों को सहारा

रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय बैंकिंग सिस्टम की मजबूती के पीछे कई अहम कारण हैं। बैंकों की balance sheet मजबूत है। लगातार profitability बनी हुई है। asset quality में सुधार हुआ है और capital buffer भी ऊंचे स्तर पर है। इन सभी वजहों से बैंकिंग सेक्टर ने खुद को पहले से कहीं ज्यादा resilient साबित किया है। RBI का मानना है कि बीते कुछ वर्षों में किए गए structural reforms और सख्त regulatory framework का असर अब साफ नजर आ रहा है।

बैंकों की लाभप्रदता बनी मजबूत

वित्त वर्ष 2024-25 में अधिसूचित वाणिज्यिक बैंकों की profitability मजबूत बनी रही। RBI की रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान Return on Assets यानी RoA 1.4 फीसदी और Return on Equity यानी RoE 13.5 फीसदी रहा। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में भी बैंकों का प्रदर्शन संतोषजनक रहा। इस अवधि में RoA 1.3 फीसदी और RoE 12.5 फीसदी दर्ज किया गया। ये आंकड़े बताते हैं कि बैंक न सिर्फ कर्ज बांटने में बल्कि जोखिम प्रबंधन और लागत नियंत्रण में भी बेहतर स्थिति में हैं।

गैर-बैंक संस्थानों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा

हालांकि RBI ने रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया है कि आगे बैंकों के सामने चुनौतियां बढ़ सकती हैं। खासतौर पर commercial sector की जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंकों को non-bank sources से कड़ी प्रतिस्पर्धा झेलनी पड़ेगी। NBFC और अन्य financial institutions तेजी से बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। इससे बैंकों के लिए fund mobilization और loan pricing को लेकर दबाव बढ़ सकता है।

ऋण और जमा वृद्धि में बढ़ता अंतर

रिपोर्ट में एक अहम चेतावनी भी दी गई है। वाणिज्यिक बैंकों की loan growth, deposit growth से तेज हो गई है। इसका सीधा असर credit-deposit ratio पर पड़ा है। बैंकिंग सेक्टर में यह ratio अब 80 फीसदी के पार पहुंच चुका है। इसका मतलब यह है कि बैंकों द्वारा दिए जा रहे कर्ज की तुलना में जमा की रफ्तार धीमी हो रही है। RBI का मानना है कि अगर यह trend लंबे समय तक जारी रहा तो संसाधन जुटाने में बैंकों को परेशानी हो सकती है।

टेक्नोलॉजी से बदलता बैंकिंग व्यवहार

RBI की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तेजी से बदलती technology और digitisation से लोगों का बैंकों के साथ लेनदेन करने का तरीका बदल रहा है। अब ग्राहक अपनी savings और credit needs के लिए पारंपरिक बैंकों के अलावा digital platforms और fintech कंपनियों की ओर भी रुख कर रहे हैं। इससे बैंकों के लिए customer retention और business model में बदलाव की जरूरत बढ़ गई है।

साइबर जोखिम बन रहे नई चुनौती

डिजिटलीकरण के साथ-साथ banking system के सामने नए risks भी खड़े हो रहे हैं। RBI ने रिपोर्ट में cyber threats को एक बड़ी चुनौती बताया है। बढ़ते online transactions और digital banking services के चलते cyber security से जुड़ी घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। RBI ने बैंकों से आग्रह किया है कि वे risk assessment को और मजबूत करें और भरोसेमंद technology को अपनाकर operational efficiency में सुधार लाएं।

रिपोर्ट में RBI ने financial inclusion, consumer education और customer protection पर लगातार ध्यान देने की जरूरत बताई है। RBI का मानना है कि मजबूत बैंकिंग सिस्टम तभी संभव है जब आम उपभोक्ता तक सेवाएं सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से पहुंचें। इसके लिए awareness और grievance redressal mechanism को मजबूत करना जरूरी है।

अलग-अलग लोन सेगमेंट की स्थिति

RBI की रिपोर्ट में loan portfolio की quality को लेकर भी अहम जानकारी दी गई है। शिक्षा ऋण यानी education loan और home loan की asset quality में सुधार हुआ है। इसका मतलब यह है कि इन सेगमेंट में default का जोखिम घटा है। हालांकि मार्च 2025 के अंत तक consumer durables, credit card और vehicle loan categories में asset quality कमजोर होती दिखी है। यह संकेत देता है कि retail lending के कुछ हिस्सों में जोखिम बढ़ रहा है।

विदेशी बैंकों और NBFC का रोल

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बिना रेहन वाले ऋण यानी unsecured loans में विदेशी बैंकों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा बनी रही। इसके अलावा NBFC का प्रदर्शन भी मजबूत रहा है। NBFC ने credit growth और niche segments में अपनी पकड़ बनाए रखी है। इससे banking ecosystem में प्रतिस्पर्धा और विविधता दोनों बढ़ी हैं।

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