RBI MPC Meeting: GDP और Inflation दोनों मजबूत, लेकिन क्या RBI बदलेगा Repo Rate? आज आएगा फैसला

RBI आज MPC बैठक का नतीजा घोषित करेगा। GDP 8.2% और Inflation 0.25% के बीच Repo Rate में बदलाव की उम्मीद कम है। यह फैसला EMI, Loans, Savings और बाजार पर बड़ा असर

आज RBI MPC बैठक का परिणाम घोषित करेगा। GDP 8.2% और Inflation 0.25% के बीच Repo Rate स्थिर रहने की उम्मीद है। यह निर्णय Loans, EMI, Savings और बाजार पर सीधा प्रभाव डाल सकता है, इसलिए निवेशकों की नजरें इस पर टिकी हैं।

RBI MPC Meeting: भारत की अर्थव्यवस्था इस समय एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है क्योंकि GDP Growth 8.2% के मजबूत स्तर पर है और Retail Inflation 0.25% के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच चुकी है। ऐसे माहौल में आज शुक्रवार को RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा मौद्रिक नीति समिति यानी MPC की दिसंबर बैठक का नतीजा घोषित करेंगे। 

इस घोषणा पर बाजार, निवेशक और अर्थशास्त्री सभी की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि Repo Rate में किसी भी तरह का बदलाव Loan EMI से लेकर बैंकिंग सेक्टर तक पर सीधा असर डालता है। दिसंबर की MPC बैठक 3 से 5 दिसंबर के बीच आयोजित की गई और यह वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी महत्वपूर्ण पॉलिसी समीक्षा है। अगली MPC बैठक 4 से 6 फरवरी 2026 को होगी जिसमें नए वित्तीय वर्ष के अनुमान और नीति दिशा तय की जाएगी।

RBI Governor का संबोधन कहां देखा जा सकता है

RBI Governor संजय मल्होत्रा का संबोधन आज सुबह 10 बजे लाइव प्रसारित होगा। इसे देखने के लिए लोगों के पास कई विकल्प उपलब्ध हैं। संबोधन को RBI के YouTube चैनल पर लाइव देखा जा सकता है। इसके अलावा RBI का X यानी Twitter अकाउंट और उसकी Official Website भी इस Broadcast को उपलब्ध कराएगी।

दिसंबर MPC बैठक से क्या है उम्मीद

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आज की नीति बैठक में Repo Rate को यथावत रखने की संभावना सबसे ज्यादा है। Business Standard के सर्वे में 12 में से 7 अर्थशास्त्रियों ने स्पष्ट कहा कि Rate Cut की उम्मीद फिलहाल नहीं की जानी चाहिए। इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। 

पहला कारण यह है कि भारत की GDP जुलाई से सितंबर की तिमाही में 8.2% की मजबूत वृद्धि के साथ एक मजबूत आधार पर खड़ी है। पिछले साल की तुलना में यह वृद्धि कहीं बेहतर है और यह संकेत देती है कि उत्पादन, खपत और निर्यात सभी मोर्चों पर अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन कर रही है। 

दूसरा अहम कारण Retail Inflation है जो अक्टूबर में घटकर 0.25% पर पहुंच गया, जो देश के आर्थिक इतिहास में बेहद कम स्तर माना जाता है। इसे सस्ती खाद्य सामग्री और GST में हुई हालिया कटौती का फायदा मिला है। Growth और Inflation दोनों के इतने अनुकूल संकेत RBI के लिए आज का फैसला और भी दिलचस्प बना देते हैं क्योंकि सामान्यत: इतनी कम महंगाई और इतनी अधिक ग्रोथ के साथ ब्याज दरों में बदलाव पर विचार किया जाता है, लेकिन RBI की सतर्कता को देखते हुए बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है।

अक्टूबर 2025 की MPC बैठक का संदर्भ

अक्टूबर 2025 की MPC बैठक में समिति ने सर्वसम्मति से Repo Rate को 5.5% पर स्थिर रखा था और Policy Stance को भी ‘neutral’ रखा था, जिसे जून में ‘accommodative’ से बदला गया था। RBI अर्थव्यवस्था की स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है और अचानक नीति परिवर्तन के बजाय संतुलन बनाए रखना चाहता है। इसी बैठक में समिति ने वित्त वर्ष 2025-26 की GDP Growth का अनुमान बढ़ाकर 6.8% किया था और Inflation का अनुमान घटाकर 2.6% कर दिया था। इन अनुमानों ने बाजार को यह संकेत दे दिया था कि RBI मौद्रिक नीति में तेजी से किसी भी तरह का बदलाव नहीं करेगा और इसकी प्राथमिकता Growth को सपोर्ट करते हुए Inflation को नियंत्रण में रखना है।

मौद्रिक नीति बैठक आम लोगों के लिए क्यों है महत्वपूर्ण

MPC की बैठक हर दो महीने में होती है और इसका सीधा प्रभाव आम जनता की जेब पर पड़ता है। Repo Rate वह ब्याज दर है जिस पर RBI बैंकों को ऋण देता है। यदि Repo Rate बढ़ता है, तो बैंकों के लिए पैसा महंगा हो जाता है और इसके परिणामस्वरूप Home Loan, Car Loan और Personal Loan जैसी सभी Borrowings महंगी हो जाती हैं। 

यानी उपभोक्ताओं की EMI बढ़ जाती है। वहीं अगर Repo Rate घटता है, तो कर्ज सस्ता हो सकता है और EMI कम हो सकती है, लेकिन इसका दूसरा पहलू यह भी है कि Savings Account और Fixed Deposit पर मिलने वाला ब्याज कम हो सकता है। 

GDP और Inflation के मौजूदा आंकड़े क्यों हैं खास

GDP Growth का 8.2% स्तर भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। यह संकेत देता है कि देश में आर्थिक गतिविधियां तेज हैं और निवेश, उपभोग और निर्माण क्षेत्रों में सुधार देखने को मिल रहा है। वहीं Retail Inflation का 0.25% पर आना आम लोगों के लिए राहत की बड़ी खबर है क्योंकि इससे घरेलू खर्च पर दबाव कम होता है। यह दोनों संकेत मिलकर RBI को एक संतुलित पॉलिसी अपनाने का आधार देते हैं लेकिन RBI आमतौर पर तब तक दरों में बदलाव नहीं करता जब तक यह सुनिश्चित न हो जाए कि Inflation लगातार नियंत्रित स्तर पर बना रहेगा।

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