पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ रूस से तेल खरीदने की वजह से नहीं, बल्कि भारत-पाक सीजफायर विवाद और कूटनीतिक असहमति के कारण लगाया गया। अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में भी इसका असर दिखा।
New Delhi: RBI के पूर्व गवर्नर और प्रमुख इकोनॉमिस्ट रघुराम राजन ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ के पीछे की सच्चाई को लेकर अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह टैरिफ रूस से तेल खरीदने के कारण नहीं बल्कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर को लेकर विवाद और कूटनीतिक असहमति के कारण लगाया गया। राजन ने UBS सेंटर फॉर फोरम फॉर इकोनॉमिक डायलॉग में यह बात कही।
रघुराम राजन का बयान
रघुराम राजन ने बताया कि ट्रंप ने सीजफायर क्रेडिट पाकिस्तान को दिया और भारत ने इस पर नकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान ने इस मामले को बहुत चालाकी से खेला। उन्होंने अमेरिका को दिखाया कि यह सीजफायर उनके प्रयासों का परिणाम है। भारत ने इसे सैन्य नेताओं के बीच सीधे संवाद का परिणाम बताया, जबकि पाकिस्तान ने इसे ट्रंप का क्रेडिट कहा।' राजन ने यह भी कहा कि इसी कारण अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया जबकि पाकिस्तान पर सिर्फ 19% टैरिफ लगा।
रूस से तेल खरीदना केंद्रीय मुद्दा नहीं
मॉडरेटर ने उनसे यह सवाल किया कि क्या भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने से ट्रंप संतुष्ट नहीं थे। इस पर राजन ने साफ कहा कि रूस से तेल खरीदना कभी भी मुख्य मुद्दा नहीं था। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने भी रूस से तेल खरीदा लेकिन उन पर कोई टैरिफ नहीं लगाया गया।

भारत-अमेरिका संबंधों पर असर
राजन ने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध अगस्त 2025 के बाद कमजोर हुए। उन्होंने बताया कि ट्रंप प्रशासन ने भारतीय राजनीतिक नेतृत्व पर व्यक्तिगत टिप्पणियों और आलोचनाओं के जरिए तनाव बढ़ाया। पीटर नवारो और स्टीफन मिलर जैसे सहयोगियों ने भारतीय नेतृत्व पर हमले किए, यहां तक कि जातिवादी और मजाकिया टिप्पणियां भी शामिल थीं।
ऑपरेशन सिंदूर और मई 2025 संघर्ष
रघुराम राजन ने मई 2025 में हुए भारत-पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस समय पाकिस्तान की ओर से 26 नागरिकों की हत्या के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस घटना के बाद दोनों देशों में तनाव बढ़ गया और अमेरिका को बीच में कूदना पड़ा। इस प्रक्रिया में ट्रंप ने सीजफायर का क्रेडिट पाने की कोशिश की, लेकिन भारत ने इसे स्वीकार नहीं किया।
पाकिस्तान की चालाकी
राजन ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान ने पूरी दुनिया के सामने सीजफायर का क्रेडिट अमेरिका को दिखाया। इसके विपरीत, भारत ने यह कहा कि यह सैन्य संवाद और रणनीति का परिणाम था। उनका कहना था कि पाकिस्तान की रणनीति ने भारत के लिए आर्थिक दबाव बढ़ा दिया और अमेरिकी टैरिफ का रास्ता साफ किया।
रघुराम राजन ने यह भी कहा कि टैरिफ विवाद किसी एक व्यक्ति या रूस से तेल खरीदने के कारण नहीं था। यह भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर के श्रेय को लेकर हुई कूटनीतिक असहमति का परिणाम था। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मामले में अमेरिका ने भारत के बजाय पाकिस्तान को अधिक लाभ दिया।








