बिहार के अररिया की रेणुका रंजन ने बेहद सीमित संसाधनों और पारिवारिक परेशानियों के बीच पढ़ाई जारी रखी। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने ITI की पढ़ाई पूरी की और बिजली विभाग में टेक्नीशियन ग्रेड-3 की सरकारी नौकरी हासिल की।
Success Story: बिहार के अररिया जिले की रेणुका रंजन की कहानी संघर्ष, मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल है। बेहद गरीब परिवार में पली-बढ़ीं रेणुका के पास पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं तक नहीं थीं। कभी डिबिया की रोशनी तो कभी बाथरूम में बैठकर पढ़ाई करने वाली रेणुका ने कई असफलताओं के बाद बिजली विभाग में टेक्नीशियन ग्रेड-3 की नौकरी हासिल की।
फूंस के घर से शुरू हुआ संघर्ष
रेणुका रंजन बिहार के अररिया जिले के सिमरा गांव से आती हैं। उनका बचपन बेहद साधारण और आर्थिक कठिनाइयों के बीच बीता। घर की छत फूंस की थी और दीवारें कच्ची थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं जुटाना भी मुश्किल था।

स्कूल के दिनों में रेणुका साइंस स्ट्रीम लेना चाहती थीं, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के कारण उन्हें आर्ट्स से पढ़ाई करनी पड़ी। घर में बिजली की सुविधा नहीं थी, इसलिए उन्हें कई बार डिबिया की रोशनी में पढ़ना पड़ा। इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई छोड़ने का फैसला नहीं किया।
परिवार की परेशानी और लोगों के ताने भी नहीं रोक पाए
रेणुका के मुताबिक, परिवार में भी काफी मुश्किलें थीं। पिता की शराब की लत के कारण घर का माहौल अक्सर तनावपूर्ण रहता था। कई बार नशे की हालत में उनकी मां के साथ मारपीट भी होती थी। ऐसे समय में उनकी मां ने खुद कठिनाइयां सहकर बेटी की पढ़ाई जारी रखने में मदद की।
गांव के कुछ लोग भी रेणुका की पढ़ाई का मजाक उड़ाते थे। उन्हें उनकी आर्थिक स्थिति और कद-काठी को लेकर ताने सुनने पड़ते थे। कुछ लोग कहते थे कि जब उनके पास संसाधन नहीं हैं तो पढ़ाई क्यों कर रही हैं। लेकिन रेणुका ने इन बातों को अपनी कमजोरी बनने नहीं दिया।
बाथरूम में बैठकर की पढ़ाई
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद रेणुका ने ITI में इलेक्ट्रीशियन ट्रेड चुना। सरकारी नौकरी की तैयारी के लिए उन्होंने पटना में भी रहकर पढ़ाई की। आर्थिक स्थिति के कारण अलग कमरा लेना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने कुछ अन्य छात्राओं के साथ रहकर पढ़ाई की।
जिस कमरे में वे रहती थीं, वह गर्मियों में काफी गर्म हो जाता था। पढ़ाई के लिए शांत जगह मिलना भी मुश्किल था। रेणुका ने बताया कि कई बार उन्हें बाथरूम में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती थी, क्योंकि वहां अपेक्षाकृत शांति और ठंडक मिलती थी।
कई असफलताओं के बाद मिली सरकारी नौकरी
रेणुका का सपना रेलवे में सरकारी नौकरी पाने का था। इसके लिए उन्होंने कई परीक्षाओं की तैयारी की, लेकिन आर्थिक परेशानियों के कारण महंगी कोचिंग लेना संभव नहीं था। उन्होंने शिक्षकों से मदद ली और अपनी तैयारी जारी रखी।
इस दौरान उन्हें कई परीक्षाओं में असफलता का सामना करना पड़ा। कुछ फिजिकल टेस्ट में कम हाइट के कारण भी उन्हें बाहर होना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी।
लगातार मेहनत के बाद रेणुका का चयन बिजली विभाग में टेक्नीशियन ग्रेड-3 के पद पर हो गया। हालांकि रेलवे में सरकारी नौकरी पाने का उनका सपना अभी पूरा नहीं हुआ है और वह इसके लिए प्रयास जारी रखने की बात कहती हैं।
रेणुका रंजन की कहानी बताती है कि कठिन आर्थिक परिस्थितियां और लगातार मिलने वाली असफलताएं किसी लक्ष्य की राह में अंतिम बाधा नहीं होतीं। सही दिशा में लगातार मेहनत और हौसला बनाए रखना सफलता की राह खोल सकता है।











