Rishi Shiv Prasanna Inspiring Story: 12 साल की उम्र में लिखीं 8 किताबें, ऐप डेवलपमेंट में भी बनाई पहचान

ऋषि शिव प्रसन्ना ने 12 साल की उम्र तक 8 किताबें लिखीं और कई मोबाइल ऐप बनाए। जानें उनकी उपलब्धियां और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार की कहानी।

ऋषि शिव प्रसन्ना ने कम उम्र में लेखन और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 12 साल की उम्र तक वह 8 किताबें लिख चुके थे। उन्हें इनोवेशन के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2023 भी मिला।

Rishi Shiv Prasanna Inspiring Story: कम उम्र में नई चीजें सीखने और उन्हें प्रोजेक्ट में बदलने की जिज्ञासा की मिसाल है। कर्नाटक से ताल्लुक रखने वाले ऋषि ने बचपन में ही कोडिंग और ऐप डेवलपमेंट में रुचि दिखाई। उनकी उपलब्धियों में मोबाइल ऐप बनाना, किताबें लिखना और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार हासिल करना शामिल है। उनकी कहानी बच्चों में विज्ञान, तकनीक और रचनात्मकता के प्रति रुचि बढ़ाने की प्रेरणा देती है।

ऋषि शिव प्रसन्ना कौन हैं और कहां रहते हैं?

ऋषि शिव प्रसन्ना उन युवा प्रतिभाओं में शामिल हैं, जिन्होंने कम उम्र में लेखन और तकनीक के क्षेत्र में अपनी रुचि के दम पर पहचान बनाई। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, उनका संबंध कर्नाटक के मैसूर जिले के नंजनगूड कस्बे से है। वर्ष 2023 में वह अपने परिवार के साथ बेंगलुरु के उत्तरहल्ली इलाके में रहते थे।

उनके पिता प्रसन्न कुमार एम. इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर हैं, जबकि उनकी मां राचेश्वरी सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। बताया जाता है कि ऋषि ने स्कूल के शुरुआती वर्षों में ही नई चीजों को तेजी से समझने की क्षमता दिखाई। विज्ञान, अंतरिक्ष और ग्रहों के बारे में जानने की उनकी दिलचस्पी ने आगे चलकर टेक्नोलॉजी की दुनिया में कदम रखने में मदद की।

बचपन में सीखी कोडिंग, बनाए मोबाइल ऐप

ऋषि की उपलब्धियों में कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और ऐप डेवलपमेंट की खास भूमिका रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने करीब पांच साल की उम्र में कोडिंग सीखना शुरू कर दिया था। तकनीक के प्रति इसी लगाव के चलते उन्होंने मोबाइल ऐप बनाने की दिशा में काम किया।

उनके बनाए ऐप्स में IQ Test App for Kids, Countries of the World और COVID Help for Bangaloreans शामिल हैं। इनमें कोविड हेल्पलाइन ऐप का उद्देश्य महामारी के दौरान बेंगलुरु के लोगों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाना था। वहीं, अन्य ऐप्स के जरिए बच्चों और आम लोगों को जानकारी देने की कोशिश की गई।

टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में उनके काम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। ऋषि को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2023 में इनोवेशन कैटेगरी के लिए सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार बच्चों की असाधारण उपलब्धियों और अलग-अलग क्षेत्रों में उनके योगदान को पहचान देने के लिए दिया जाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात और लेखन में उपलब्धि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ऋषि की प्रतिभा की सराहना कर चुके हैं। ऋषि से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उनके ऐप बनाने के शौक और विज्ञान में रुचि का उल्लेख किया था। उन्होंने युवाओं में इनोवेशन को प्रोत्साहित करने के महत्व पर भी जोर दिया था।

ऋषि की रुचि केवल तकनीक तक सीमित नहीं रही। उन्हें किताबें पढ़ने, नई जानकारी जुटाने और उसे दूसरों तक पहुंचाने में भी दिलचस्पी रही है। उपलब्ध रिपोर्ट्स के अनुसार, वह 12 साल की उम्र तक आठ किताबें लिख चुके थे। लेखन और ऐप डेवलपमेंट जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी सक्रियता उनकी विविध रुचियों को दर्शाती है।

ऋषि का IQ 180 बताया जाता है, हालांकि इस आंकड़े के समर्थन में विश्वसनीय सार्वजनिक परीक्षण विवरण की पुष्टि जरूरी है। अल्बर्ट आइंस्टीन के IQ को लेकर प्रचलित आंकड़े भी अनुमान पर आधारित हैं, क्योंकि उनके औपचारिक IQ टेस्ट देने का प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसलिए दोनों के IQ की सीधी तुलना को प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखना चाहिए।

ऋषि की कहानी इस बात को रेखांकित करती है कि बच्चों की जिज्ञासा, सीखने की इच्छा और रचनात्मक सोच को सही अवसर मिले तो वे कम उम्र में भी उल्लेखनीय काम कर सकते हैं। उनकी उपलब्धियां विज्ञान, तकनीक और लेखन में रुचि रखने वाले बच्चों के लिए प्रेरणा बन सकती हैं।

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