कुछ लोग करियर में आगे बढ़ने के लिए हुनर के साथ खुशामद का हुनर भी सीख लेते हैं, लेकिन आरजे महविश ने कभी इस रास्ते को नहीं चुना। शायद यही वजह रही कि बॉस के लिए भिंडी न लाने वाली यह लड़की कई बार दूसरों से पीछे जरूर रह गई, लेकिन उसने कभी हार नहीं मानी।
RJ Mahvash: रेडियो जॉकी, कंटेंट क्रिएटर और अब अभिनेत्री के रूप में अपनी पहचान बना रहीं आरजे माहविश ने हाल ही में अपने करियर और निजी संघर्षों से जुड़े कई अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि अलीगढ़ से निकलकर जब उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की, तब अंग्रेजी समझने के बावजूद उसे बोलने में आत्मविश्वास की कमी थी। यही वजह थी कि ऑफिस में जब लोग तेज अंग्रेजी में बातचीत करते थे तो वह अक्सर चुप रह जाती थीं। हालांकि, समय के साथ उन्होंने अपनी झिझक पर काबू पाया और अपनी आवाज, भाषा और काम के दम पर मनोरंजन की दुनिया में अलग पहचान बनाई।
आरजे माहविश ने अपने नाम के आगे 'RJ' लिखने की वजह भी बताई। उनके मुताबिक, इस पहचान के पीछे उनके संघर्ष और शुरुआती करियर की एक लंबी कहानी है। उन्होंने बताया कि पहली नौकरी में उन्होंने काफी मेहनत की थी, लेकिन उन्हें अपना रेडियो शो नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने तय किया कि वह एक दिन उसी पहचान के साथ मशहूर होंगी।
अंग्रेजी को लेकर कम था आत्मविश्वास
अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए आरजे माहविश ने कहा कि जब वह अलीगढ़ से बाहर निकली थीं, तब उन्हें अंग्रेजी आती थी, लेकिन सार्वजनिक रूप से बोलने का आत्मविश्वास नहीं था। ऑफिस में अंग्रेजी में तेज बातचीत होने पर वह चुप रहना पसंद करती थीं। उन्हें लगता था कि शायद लोग भाषा की क्षमता को ही प्रतिभा का पैमाना मानते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कई बार किसी व्यक्ति की वास्तविक काबिलियत सामने आने में समय लगता है। उनके अनुसार, उनके शुरुआती कार्यस्थल पर भी भाषा को लेकर एक धारणा थी, जबकि वह हिंदी रेडियो चैनल था। माहविश ने इस अनुभव को अपने करियर के कठिन दौर का हिस्सा बताया।
उन्होंने अपने अंदाज में यह भी कहा कि कुछ लोग अपने वरिष्ठों को खुश करने के लिए निजी स्तर पर भी प्रयास करते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा रास्ता नहीं चुना। उनका कहना है कि इस वजह से उन्हें कई बार दूसरों की तुलना में पीछे रहना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने तरीके से आगे बढ़ने का फैसला किया।
'एक दिन इसी नाम से मशहूर होऊंगी'
आरजे माहविश ने बताया कि नौकरी छोड़ते समय उन्होंने खुद से वादा किया था कि वह अपने नाम और अपनी पहचान से एक दिन सफल होंगी। आज जब उनके पुराने सहकर्मी और वरिष्ठ उन्हें बधाई देते हैं तो उन्हें लगता है कि उन्होंने अपने संघर्ष के दौरान किए गए उस दावे को सच साबित किया है। उनका मानना है कि करियर में आगे बढ़ने के लिए प्रतिभा के साथ धैर्य भी जरूरी है।
माहविश ने कहा कि बड़ी और अच्छी उपलब्धियां हासिल करने में समय लगता है और सफलता का कोई आसान शॉर्टकट नहीं होता। उनके अनुसार, जो चीज धीरे-धीरे और सुकून से हासिल होती है, वह लंबे समय तक टिकती है।

राजनीति में जाने का भी मिला था मौका
आरजे माहविश ने अपने जीवन के एक ऐसे दौर का भी जिक्र किया, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। उन्होंने बताया कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में रहते हुए उन्होंने छात्र चुनाव में हिस्सा लिया था। इसके बाद उन्हें एक राजनीतिक पार्टी की ओर से टिकट का प्रस्ताव भी मिला था। हालांकि, राजनीतिक गतिविधियों के दौरान परिस्थितियां बिगड़ गईं और विवाद बढ़ने लगे।
उन्होंने बताया कि इस दौरान उनके भाई को गोली लगने की घटना भी हुई। इसके बाद उन्होंने राजनीति से दूरी बना ली। माहविश ने कहा कि वह अपने लिए जोखिम उठा सकती हैं, लेकिन अपने परिवार को किसी खतरे में नहीं डालना चाहतीं।
'सतरंगी' से एक्टिंग में नई शुरुआत
रेडियो और डिजिटल कंटेंट के बाद अब आरजे माहविश एक्टिंग की दुनिया में भी कदम रख चुकी हैं। उन्होंने बताया कि अभिनय में आने के बाद उन्हें सबसे पहले प्रोडक्शन से जुड़े बजट संबंधी तनाव को छोड़ना सीखना पड़ा। प्रोडक्शन में काम करने के दौरान वह अक्सर लाइट, जनरेटर, लोकेशन और अन्य खर्चों को लेकर चिंतित रहती थीं। लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने यह समझा कि एक अभिनेत्री के रूप में उनका मुख्य काम अपने किरदार पर ध्यान देना है। उन्होंने बताया कि 'सतरंगी' में उन्होंने इस सोच को पीछे छोड़कर पूरी स्वतंत्रता के साथ अभिनय करने की कोशिश की।
माहविश के लिए यह प्रोजेक्ट इसलिए भी खास है क्योंकि उनके अनुसार इसकी कहानी केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक संदेश भी देती है। वह चाहती हैं कि अगर कोई परिवार इस सीरीज को देखने के बाद उसके विषय पर चर्चा करे, तो इसे वह अपनी बड़ी उपलब्धि मानेंगी।
फॉलोअर्स नहीं, फैन हैं मेरी कम्युनिटी
कंटेंट क्रिएटर से अभिनेत्री बनने के सफर पर माहविश ने कहा कि सोशल मीडिया की लोकप्रियता और एक्टिंग की कला दो अलग चीजें हैं। उनके मुताबिक, एक क्रिएटर के रूप में उनके भाव और अभिव्यक्ति पहले ही दर्शकों तक पहुंच चुके हैं, लेकिन अभिनय में किसी किरदार के भावों को कहानी के अनुसार पर्दे पर उतारना अलग चुनौती है।
उन्होंने कहा कि अगर कोई डिजिटल क्रिएटर अभिनय की आवश्यक स्किल सीखकर फिल्म या सीरीज की दुनिया में आता है, तो उसकी पहले से बनी ऑडियंस उपयोगी साबित हो सकती है। माहविश अपनी सोशल मीडिया कम्युनिटी को सिर्फ फॉलोअर्स नहीं, बल्कि फैंस मानती हैं। उनका कहना है कि यह समुदाय लंबे समय की मेहनत से तैयार हुआ है।











