रणजी ट्रॉफी के इतिहास में अब जम्मू-कश्मीर के कप्तान पारस डोगरा का नाम भी दर्ज हो गया है, जिन्होंने 10,000 रन पूरे कर इस लिस्ट में केवल वसीम जाफर के साथ दूसरी बार ऐसा कारनामा किया।
स्पोर्ट्स न्यूज़: रणजी ट्रॉफी भारत का प्रमुख घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंट है, जिसकी शुरुआत 1934 में हुई थी। इस टूर्नामेंट के इतिहास में अब तक सिर्फ कुछ ही बल्लेबाजों ने 10,000 से अधिक रन बनाए हैं। 1996 से 2020 तक वसीम जाफर ने मुंबई और विदर्भ की टीमों के लिए खेलते हुए 12,038 रन बनाए थे। अब पारस डोगरा, जो हिमाचल प्रदेश में जन्मे हैं, ने भी रणजी ट्रॉफी में 10,000 रन पूरे कर इस रिकॉर्ड की सूची में शामिल हो गए हैं।
सेमीफाइनल में पारस डोगरा का कारनामा
रणजी ट्रॉफी 2025-26 सीजन के सेमीफाइनल में पारस डोगरा ने बंगाल के खिलाफ खेलते हुए अपने रणजी करियर में 10,000 रन पूरे किए। डोगरा की पारी के 11वें रन के साथ ही यह ऐतिहासिक आंकड़ा हासिल हुआ। उन्होंने अब तक 146 रणजी मैच खेले हैं, जिसमें उनकी औसत 48 से अधिक रही है। उनके नाम 33 शतक और कई दोहरे शतक दर्ज हैं।
41 साल के पारस डोगरा इस सीजन जम्मू-कश्मीर की टीम की कप्तानी कर रहे हैं। सेमीफाइनल में उन्होंने 112 गेंदों में 58 रन बनाए और 7 चौकों की मदद से अपनी टीम का मनोबल बढ़ाया। उनके विकेट को बंगाल के मुकेश कुमार ने लिया।

पारस डोगरा का क्रिकेट करियर
पारस डोगरा ने रणजी ट्रॉफी में 2001/02 सीजन में डेब्यू किया था। शुरुआत में उन्होंने हिमाचल प्रदेश के लिए खेलते हुए अपना नाम बनाया। 2018 तक उन्होंने हिमाचल के लिए खेला और फिर 2018 से 2024 तक पोंडिचेरी टीम के साथ जुड़े। 2024 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर टीम जॉइन की और वर्तमान में टीम का नेतृत्व कर रहे हैं।
रणजी ट्रॉफी में पारस डोगरा ने दोहरा शतक लगाने के मामले में भी नाम दर्ज किया है और यह रिकॉर्ड चेतेश्वर पुजारा के साथ साझा करते हैं। यह दिखाता है कि वह लंबी पारी खेलने और बड़े मैचों में प्रदर्शन करने में माहिर हैं।
सेमीफाइनल का मैच और बंगाल की प्रतिक्रिया
पारस डोगरा की 10,000 रन की उपलब्धि उस मैच को भी खास बना गई। बंगाल ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सुदीप कुमार घरामी के 146 रनों की पारी की मदद से 328 रन बनाए। जम्मू-कश्मीर के लिए पारस की कप्तानी और शानदार बैटिंग ने टीम को मुकाबले में बनाए रखा। डोगरा के इस मील का पत्थर ने भारतीय घरेलू क्रिकेट में उनके अनुभव और लगन को भी उजागर किया। रणजी ट्रॉफी में उनके लंबे करियर ने यह साबित किया कि खिलाड़ी उम्र और परिस्थितियों से परे अपने प्रदर्शन से रिकॉर्ड बना सकते हैं।








