तालिबान ने ईरान का किया समर्थन, अमेरिका को दी सैन्य चेतावनी

तालिबान ने अमेरिका को चेतावनी दी और ईरान का समर्थन किया। अफगानिस्तान चाहता है कि दोनों देशों में जंग न हो। जिनेवा में वार्ता से तनाव कम करने की उम्मीद।

अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने ईरान का समर्थन करते हुए कहा कि अगर अमेरिका हमला करता है तो काबूल पूरी तरह तेहरान के साथ खड़ा रहेगा। अमेरिका-ईरान वार्ता आज यानि मंगलवार, 17 फरवरी को जिनेवा में होगी।

World News: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने ईरान का समर्थन करते हुए कहा है कि अगर अमेरिका हमला करता है तो काबूल तेहरान का साथ देगा। तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने रविवार, 15 फरवरी 2026 को स्पष्ट किया कि अफगानिस्तान चाहता है कि ईरान और अमेरिका के बीच जंग नहीं हो, लेकिन किसी भी परिस्थिति में ईरान को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है।

अमेरिका-ईरान विवाद

ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर टकराव जारी है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने यूरेनियम एनरिचमेंट को पूरी तरह बंद करे और परमाणु हथियारों के निर्माण से जुड़े कार्यक्रम रोक दे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बार-बार चेतावनी दी है कि यदि वह जल्द परमाणु समझौता नहीं करता तो सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। 

इसके जवाब में ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने कहा कि तेहरान परमाणु समझौते के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए वाशिंगटन को ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने पर चर्चा करने को तैयार होना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर किसी भी चर्चा के लिए तैयार नहीं है, भले ही अमेरिका और इजरायल दबाव डालते रहें।

तालिबान का बयान

तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने रेडियो ईरान की पश्तो सर्विस को दिए इंटरव्यू में कहा कि यदि अमेरिका हमला करता है और ईरान मदद मांगे तो काबूल उसका पूरा समर्थन करेगा। उन्होंने पिछले साल ईरान और इजरायल के बीच हुई लड़ाई का हवाला देते हुए कहा कि ईरान ने उस संघर्ष में जीत हासिल की थी। मुजाहिद ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान चाहता है कि सभी विवाद डिप्लोमैटिक तरीकों से सुलझाए जाएं। तालिबान का موقف साफ है कि ईरान को अपनी सीमाओं और सुरक्षा की रक्षा करने का अधिकार है।

अफगानिस्तान और ईरान के संबंध

तालिबान ने यह भी कहा कि ईरान और अफगानिस्तान लंबी सीमा साझा करते हैं। सीमा पर अफगान शरणार्थियों की उपस्थिति के कारण पहले भी तनावपूर्ण स्थिति रही है, लेकिन इसके बावजूद तालिबान ने स्पष्ट किया कि वे ईरान के सपोर्ट में खड़े हैं। प्रवक्ता ने कहा कि अफगानिस्तान चाहता है कि किसी भी तरह का सैन्य संघर्ष रोका जाए और बातचीत के जरिए समाधान खोजा जाए।

जिनेवा में वार्ता

अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि 17 फरवरी 2026 को जिनेवा में एक बार फिर से बातचीत के लिए मिल रहे हैं। इस वार्ता का उद्देश्य दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते को लेकर तनाव को कम करना और संभावित सैन्य संघर्ष को टालना है। तालिबान ने इस वार्ता का स्वागत करते हुए कहा कि कूटनीतिक तरीके ही सभी मुद्दों का स्थायी हल निकाल सकते हैं।

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