राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि किसी भी कानून या नीति की सफलता केवल सरकार के निर्णय पर नहीं, बल्कि जनता के सहयोग और जागरूकता पर निर्भर करती है।
नई दिल्ली: Rashtriya Swayamsevak Sangh के सरसंघचालक Mohan Bhagwat ने अपने हालिया बयान में कहा कि जनसंख्या नियंत्रण से जुड़ी नीतियों और Uniform Civil Code को लागू करने के लिए केवल कानून ही नहीं, बल्कि जनता का सहयोग और दीर्घकालिक सामाजिक सोच भी जरूरी है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि जाति आधारित राजनीति तभी खत्म हो सकती है, जब समाज खुद जातिगत पहचान से ऊपर उठकर एक समान नागरिक दृष्टिकोण अपनाए। उनके अनुसार, सामाजिक बदलाव केवल नीतियों से नहीं बल्कि जनभागीदारी और मानसिकता में बदलाव से संभव है।
जनसंख्या नियंत्रण और UCC पर क्या कहा?

जनसंख्या नियंत्रण नीति और समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर पूछे गए सवालों पर भागवत ने कहा कि ऐसी नीतियां तभी सफल हो सकती हैं जब समाज उन्हें स्वीकार करे और सहयोग दे। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कोई सरकारी संस्था नहीं है, बल्कि एक सामाजिक संगठन है, इसलिए वह सीधे नीतियां लागू नहीं करता। उनके अनुसार, किसी भी नीति की सफलता के लिए दीर्घकालिक सोच और समाज की भागीदारी जरूरी है।
मोहन भागवत ने कहा कि कोई भी कानून सिर्फ बनाने से सफल नहीं होता। उसे लागू करने के लिए लोगों की भागीदारी और समझ आवश्यक है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान लागू किए गए जनसंख्या नियंत्रण उपायों ने समाज में असंतोष और राजनीतिक विरोध को जन्म दिया था।उनके अनुसार, जब नीतियां बिना व्यापक सहमति और जागरूकता के लागू की जाती हैं, तो उनका असर विपरीत हो सकता है।
जाति और राजनीति पर टिप्पणी
अपने संबोधन में भागवत ने जाति आधारित राजनीति पर भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यह समस्या तब तक बनी रहेगी, जब तक समाज खुद जातिगत सोच से ऊपर नहीं उठता। उन्होंने कहा कि कई बार राजनीतिक दल वोट बैंक के आधार पर जाति का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि समाज भी उसी आधार पर प्रतिक्रिया देता है।
मोहन भागवत ने कहा कि जब लोग काम और योग्यता के आधार पर मतदान करने लगेंगे, तब जाति आधारित राजनीति स्वतः कमजोर हो जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि वास्तविक बदलाव केवल कानूनों से नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवहार में सुधार से आएगा। अपने संबोधन में उन्होंने समाज में धार्मिक और सामुदायिक सौहार्द की आवश्यकता पर बल दिया।











