RBI ने दिसंबर में 1 लाख करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड खरीदने और 5 अरब डॉलर का फॉरेक्स स्वैप करने की घोषणा की। इस कदम का उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम में स्थायी लिक्विडिटी बढ़ाना और बाजार में ब्याज दरों के दबाव को कम करना है।
RBI OMO Purchase: भारतीय रिजर्व बैंक ने आर्थिक और वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। RBI ने दिसंबर में कुल ₹1 लाख करोड़ के सरकारी बॉन्ड खरीदने और 5 अरब डॉलर के USD/INR फॉरेक्स स्वैप करने का ऐलान किया है। यह कदम Open Market Operation यानी OMO Purchase के तहत उठाया गया है, जिसका उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम में स्थायी और पर्याप्त लिक्विडिटी बनाए रखना है। एनालिस्ट का मानना है कि इस फैसले से बॉन्ड मार्केट को बूस्ट मिलेगा, ब्याज दरों पर दबाव कम होगा और ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा।
RBI का ऐलान
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने MPC बैठक के बाद बताया कि बदलती लिक्विडिटी स्थितियों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बैंक ने OMO के जरिए 1,00,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करने का फैसला किया है। इसके साथ ही 5 अरब डॉलर का 3-वर्षीय USD/INR बाय-सेल स्वैप भी किया जाएगा। गवर्नर ने कहा कि RBI का लक्ष्य सिस्टम में ड्यूरेबल लिक्विडिटी बनाए रखना है ताकि क्रेडिट ग्रोथ को सपोर्ट मिले और फाइनेंशियल सिस्टम में स्थिरता बनी रहे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि OMO का उद्देश्य G-sec यील्ड को सीधे नियंत्रित करना नहीं बल्कि लिक्विडिटी को मैनेज करना है। इसके लिए RBI OMO और LAF (VRR/VRRR) दोनों टूल्स का उपयोग करेगा, जहां LAF अल्पकालिक लिक्विडिटी संतुलित करने के लिए होता है।
OMO और फॉरेक्स स्वैप से क्यों मिलेगा बूस्ट
OMO Purchase का सीधा असर लिक्विडिटी पर पड़ता है। जब RBI सरकारी बॉन्ड खरीदता है, तो बैंकों के पास पैसा आता है। यह पैसा लोन देने में मदद करता है। दूसरी ओर, 5 अरब डॉलर का फॉरेक्स स्वैप रुपये की लिक्विडिटी और मजबूत करेगा।
एनालिस्ट मानते हैं कि दोनों फैसलों का संयोजन बाज़ार में confidence बढ़ाने के साथ-साथ ब्याज दरों पर भी दबाव कम करेगा। ऐसे समय जब रुपया डॉलर के मुकाबले 90 के स्तर को पार कर चुका है, OMO और फॉरेक्स स्वैप करेंसी के दबाव को कम करने में मदद करेंगे।
एनालिस्ट की राय
UTI AMC के अनुराग मित्तल ने कहा कि RBI ने 25 bps की रेपो रेट कट को 1 लाख करोड़ OMO और 5 अरब डॉलर फॉरेक्स स्वैप के साथ मिलाकर एक coordinated policy push दिया है। उनका मानना है कि यह वित्तीय परिस्थितियों को आसान बनाने और ग्रोथ को एक नए स्तर पर ले जाने की दिशा में मजबूत कदम है।
कोटक महिंद्रा AMC के दीपक अग्रवाल ने कहा कि RBI के कदम से मार्केट को उम्मीद के मुताबिक दिशा मिली है। उन्होंने बताया कि 10-year G-sec यील्ड 3 bps नीचे आई है और अब लगभग 6.48% पर ट्रेड कर रही है।
बजाज फिनसर्व AMC के सिद्धार्थ चौधरी ने कहा कि RBI ने बॉन्ड मार्केट की उम्मीदों को पूरा किया है। रेट कट और OMO को देखते हुए आगे और लिक्विडिटी उपायों की गुंजाइश बनती है। उनका मानना है कि महंगाई के कम होने की उम्मीद के चलते आने वाले महीनों में ब्याज दरों में और घटने की संभावना है।
टाटा AMC के मुरली नागराजन ने बताया कि दिसंबर में दो किश्तों में कुल ₹1 लाख करोड़ OMO डालने और 5 अरब डॉलर के फॉरेक्स स्वैप से अगले 15 दिनों में कुल 1,45,000 करोड़ रुपये की लिक्विडिटी सिस्टम में आने की उम्मीद है। इससे 10-year यील्ड 6.25–6.30% के स्तर पर आ सकती है।
मिराए एसेट के महेंद्र कुमार जागू का कहना है कि RBI के निर्णय से बॉन्ड और मनी मार्केट को मजबूत संकेत मिला है। उनका मानना है कि जैसे-जैसे लिक्विडिटी इंजेक्शन का पूरा असर दिखाई देगा, ब्याज दरें धीरे-धीरे और नीचे जा सकती हैं।
ओपन मार्केट ऑपरेशन क्या होता है
ओपन मार्केट ऑपरेशन यानी OMO भारतीय रिजर्व बैंक का एक प्रमुख मौद्रिक नीति टूल है जिसके जरिए केंद्रीय बैंक सरकारी सिक्योरिटीज खरीदकर या बेचकर लिक्विडिटी को नियंत्रित करता है। जब RBI OMO खरीद करता है तो बैंकिंग सिस्टम में पैसा आता है और नकदी बढ़ जाती है। इसके उलट, जब RBI सिक्योरिटीज बेचता है तो सिस्टम से पैसा निकलता है और लिक्विडिटी कम हो जाती है। OMO खरीद का मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि बैंकों के पास पर्याप्त नकदी रहे ताकि लोन, निवेश और आर्थिक गतिविधियों में कोई बाधा न आए।
रुपये पर दबाव बढ़ने पर OMO क्यों जरूरी होता है
हाल ही में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90 के स्तर को पार कर गया, जिससे बाजार में चिंता बढ़ी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली तेज हुई। ऐसी स्थिति में बैंकिंग सिस्टम से लिक्विडिटी तेजी से घटने लगती है और पैसे की उपलब्धता पर दबाव बन जाता है। OMO खरीद इस कमी को भरने का महत्वपूर्ण तरीका बनती है क्योंकि यह सीधे बैंकिंग सिस्टम में स्थायी धन डालती है।
इससे शॉर्ट-टर्म ब्याज दरें स्थिर रहती हैं, रुपये पर दबाव कम होता है और मनी मार्केट की हालत संतुलित होती है। ऐसे समय में RBI OMO, फॉरेक्स स्वैप और स्पॉट डॉलर बिक्री जैसे कई टूल्स का संयुक्त रूप से उपयोग करता है ताकि करेंसी को स्थिर रखा जा सके और क्रेडिट कंडीशंस सख्त न हों।
इकॉनमी और आम लोगों पर OMO का असर
OMO खरीद का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि बैंकों के पास अधिक फंड उपलब्ध हो जाते हैं और इसका सीधा असर आम नागरिकों व कारोबारियों पर दिखाई देता है। जब बैंकों के पास पर्याप्त नकदी होती है तो वे आसानी से और किफायती दरों पर लोन दे पाते हैं, जिससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI में राहत देखने को मिल सकती है।
बिजनेस लोन और MSME फंडिंग भी आसान होती है और कंपनियों के लिए निवेश तथा कैपेक्स बढ़ाना सरल हो जाता है। लिक्विडिटी बढ़ने से बाजार में मांग बढ़ती है, कंपनियां उत्पादन में तेजी लाती हैं और रोजगार के नए अवसर तैयार होते हैं। इन सभी घटनाओं का संयुक्त असर पूरी अर्थव्यवस्था की ग्रोथ में तेजी के रूप में नजर आता है।








