रूस का कीव पर अब तक का सबसे बड़ा हमला, 30 की मौत; 91 घायल, कई रिहायशी इमारतें तबाह

रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर ड्रोन और मिसाइलो से बड़ा हमला किया, जिसमे कम से कम 30 लोगों की मौत और 91 घायल हुए। यूक्रेन ने इसे नागरिक इलाकों पर हमला बताया।

रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर ड्रोन और मिसाइलों से बड़े पैमाने पर हमला किया, जिसमें कम से कम 30 लोगों की मौत और 91 लोग घायल हो गए। यूक्रेन ने इसे नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाने वाला हमला बताया, जबकि रूस ने सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई का दावा किया।

रूस/यूक्रेन वॉर: रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर गुरुवार तड़के बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार इस हमले में कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई, जबकि 91 अन्य घायल हुए हैं। राजधानी के विभिन्न हिस्सों में कई रिहायशी इमारतें, सार्वजनिक सुविधाएं और राहत केंद्र क्षतिग्रस्त हुए। कीव प्रशासन ने इसे राजधानी पर अब तक के सबसे बड़े संयुक्त हवाई हमलों में से एक बताया है।

11 घंटे तक जारी रहा हमला

यूक्रेनी प्रशासन के अनुसार हमला करीब 11 घंटे तक अलग-अलग चरणों में जारी रहा। पहले ड्रोन हमले हुए, जिनके बाद बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें दागी गईं। सुबह तक लगातार ड्रोन हमलों के कारण पूरे शहर में एयर रेड अलर्ट जारी रहा और बड़ी संख्या में लोगों ने मेट्रो स्टेशनों तथा भूमिगत शेल्टरों में शरण ली। कीव मेट्रो प्रशासन के मुताबिक 52 हजार से अधिक लोगों ने रात भूमिगत स्टेशनों में बिताई, जिनमें हजारों बच्चे भी शामिल थे।

रिहायशी इलाकों में भारी नुकसान

हमले के दौरान राजधानी के कई आवासीय इलाकों को नुकसान पहुंचा। दक्षिण-पूर्वी कीव के डार्नित्स्की जिले में एक बहुमंजिला इमारत का हिस्सा मिसाइल हमले में ढह गया। पास स्थित किंडरगार्टन के निकट बड़ा गड्ढा बन गया और आसपास की इमारतें आग की चपेट में आ गईं। बचाव दल कई घंटों तक मलबा हटाकर फंसे लोगों की तलाश में जुटा रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ निवासी इमारत के बेसमेंट में मौजूद थे, जिनकी तलाश जारी रही।

रेड क्रॉस का राहत केंद्र भी प्रभावित

हमले में यूक्रेनी रेड क्रॉस का एक गोदाम भी पूरी तरह नष्ट हो गया। संस्था के अनुसार लाखों राहत सामग्री नष्ट होने से देशभर में चल रहे मानवीय सहायता अभियानों पर असर पड़ सकता है। राहत एजेंसियां प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाने की वैकल्पिक व्यवस्था करने में जुटी हैं।

रूस का दावा- सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना

रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि हमले का उद्देश्य यूक्रेन के सैन्य और रक्षा उद्योग से जुड़े प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना था। मॉस्को का कहना है कि यह कार्रवाई रूस के नागरिक बुनियादी ढांचे पर हुए यूक्रेनी हमलों के जवाब में की गई। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि रूस अपने घोषित सैन्य उद्देश्यों को हासिल करने के लिए दबाव बनाए रखेगा।

यूक्रेन ने लगाया नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप

यूक्रेन ने रूस के दावों को खारिज करते हुए कहा कि मिसाइल और ड्रोन हमलों का सबसे अधिक असर नागरिक इलाकों पर पड़ा है। यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि आवासीय भवनों, सार्वजनिक सेवाओं और राहत सुविधाओं को नुकसान पहुंचना इस बात का संकेत है कि आम नागरिक भी हमलों की चपेट में आए। यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी भी सैन्य कार्रवाई की तुलना उस देश की आत्मरक्षा से नहीं की जा सकती, जिस पर हमला किया गया हो।

एयर डिफेंस के सामने बड़ी चुनौती

यूक्रेनी वायुसेना के अनुसार रूस ने रातभर में 74 मिसाइलें और 496 ड्रोन दागे। वायु रक्षा प्रणाली ने अधिकांश हथियारों को रास्ते में ही मार गिराया, लेकिन कई मिसाइलें और ड्रोन अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे, जिससे राजधानी सहित कई स्थानों पर नुकसान हुआ। सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि अलग-अलग प्रकार की मिसाइलों और ड्रोन का एक साथ उपयोग यूक्रेन की एयर डिफेंस प्रणाली के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है।

सहयोगी देशों से अतिरिक्त मदद की अपील

हमले के बाद राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सहयोगी देशों से यूक्रेन की वायु रक्षा क्षमता मजबूत करने की अपील की। उन्होंने आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइल उत्पादन से जुड़े सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि भविष्य में ऐसे बड़े हमलों का प्रभाव कम किया जा सके।

रूस-यूक्रेन युद्ध लगातार गहराता संकट

फरवरी 2022 में शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध को अब चार वर्ष से अधिक समय हो चुका है। इस दौरान दोनों देशों के बीच लगातार मिसाइल, ड्रोन और लंबी दूरी के हमले होते रहे हैं। हाल के महीनों में दोनों पक्षों ने ऊर्जा ढांचे, सैन्य प्रतिष्ठानों और रणनीतिक ठिकानों पर हमले तेज किए हैं। ताजा हमला एक बार फिर यह दिखाता है कि संघर्ष अभी समाप्त होने से दूर है और आम नागरिकों पर इसका मानवीय प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता, तब तक क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के सामने यह संकट गंभीर चुनौती बना रहेगा।

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