अयोध्या: सावन के आखिरी सोमवार पर रामनगरी अयोध्या शिवभक्ति में डूबी नजर आई। सुबह से ही सरयू घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। भक्तों ने पवित्र सरयू में स्नान किया और इसके बाद भगवान शिव के दर्शन एवं जलाभिषेक के लिए नागेश्वरनाथ मंदिर की ओर रुख किया। हाथों में गंगाजल, दूध, बेलपत्र और पूजन सामग्री लिए श्रद्धालु कतारों में आगे बढ़ते रहे। मंदिर परिसर में पहुंचते ही भक्तों ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया और हर-हर महादेव, बम-बम भोले के जयकारे लगाए।
सावन का अंतिम सोमवार होने के कारण इस दिन शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। अयोध्या में भी सुबह से ही धार्मिक वातावरण बना रहा। सरयू तट से लेकर नागेश्वरनाथ मंदिर तक जगह-जगह श्रद्धालुओं की आवाजाही दिखाई दी। बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचे तो कई कांवड़िए भी जल लेकर मंदिर पहुंचे।
श्रद्धालुओं ने सबसे पहले सरयू में स्नान कर पुण्य अर्जित किया। स्नान के बाद भक्तों ने पूजा सामग्री खरीदी और नागेश्वरनाथ मंदिर की तरफ बढ़े। मंदिर के आसपास फूल, बेलपत्र, धतूरा, दूध और प्रसाद की दुकानें सुबह से ही सजी हुई थीं। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजन सामग्री लेकर मंदिर पहुंचे और शिवलिंग पर जल अर्पित किया।
नागेश्वरनाथ मंदिर अयोध्या के प्रमुख शिव मंदिरों में शामिल है। सावन के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सोमवार के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करने की विशेष धार्मिक मान्यता है। इसी वजह से अंतिम सोमवार को मंदिर में भक्तों की संख्या और बढ़ गई।
मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला। कतार में खड़े लोग लगातार भगवान शिव के जयकारे लगाते रहे। कई श्रद्धालु हाथ में जलपात्र लेकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। जैसे ही उन्हें गर्भगृह में पहुंचकर जलाभिषेक का अवसर मिला, उन्होंने श्रद्धा के साथ भगवान शिव को जल, दूध और बेलपत्र अर्पित किए।
अयोध्या के सरयू घाटों पर भी सुबह से धार्मिक माहौल रहा। श्रद्धालु स्नान करने के बाद पूजा-अर्चना करते दिखाई दिए। कई लोगों ने सरयू तट पर बैठकर शिव मंत्रों का जाप किया। कुछ श्रद्धालुओं ने घाट पर ही पूजा कर भगवान शिव से परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना की।
सावन के अंतिम सोमवार को लेकर प्रशासन की ओर से भी विशेष व्यवस्था की गई। मंदिर और सरयू घाट के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई और श्रद्धालुओं को निर्धारित रास्ते से मंदिर तक पहुंचाया गया। भीड़ अधिक होने की स्थिति में बैरिकेडिंग और कतार व्यवस्था के जरिए दर्शन कराने की व्यवस्था की गई।
सरयू घाटों पर भी सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया। श्रद्धालुओं से नदी में स्नान करते समय सावधानी बरतने की अपील की गई। घाटों पर भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार निगरानी करती रहीं।
सावन के अंतिम सोमवार पर अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में स्थानीय लोगों के साथ दूसरे जिलों और राज्यों से आए भक्त भी शामिल रहे। कई श्रद्धालु रात में ही अयोध्या पहुंच गए थे ताकि सुबह सरयू स्नान के बाद नागेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक कर सकें।
कांवड़ियों में भी विशेष उत्साह देखने को मिला। कई भक्त दूर-दराज के क्षेत्रों से पैदल या कांवड़ यात्रा के जरिए जल लेकर अयोध्या पहुंचे। उन्होंने मंदिर में भगवान शिव का अभिषेक किया और अपनी यात्रा पूरी की। कांवड़ियों के समूह में भी बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे।
मंदिर के आसपास भक्तिमय वातावरण के बीच धार्मिक गीत और भजन भी सुनाई देते रहे। कहीं श्रद्धालु शिव चालीसा का पाठ करते नजर आए तो कहीं महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जा रहा था। मंदिर परिसर में लगातार पूजा-अर्चना चलती रही।
सावन के अंतिम सोमवार का इंतजार कई श्रद्धालु पूरे महीने से कर रहे थे। जिन लोगों ने सावन के सोमवार का व्रत रखा था, उन्होंने अंतिम सोमवार को विशेष पूजा के साथ व्रत का समापन किया। महिलाओं और युवाओं के साथ बड़ी संख्या में पुरुष श्रद्धालु भी मंदिर पहुंचे।
श्रद्धालुओं का कहना था कि सावन में भगवान शिव की पूजा करने से मन को शांति मिलती है। अंतिम सोमवार पर सरयू में स्नान और नागेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक करना उनके लिए विशेष आस्था का विषय है। कई भक्तों ने भगवान शिव से परिवार के स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की कामना की।
अयोध्या में सावन के दौरान धार्मिक पर्यटन भी बढ़ जाता है। राम मंदिर के साथ-साथ यहां स्थित प्राचीन मंदिरों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सावन के अंतिम सोमवार को शिवभक्तों की भीड़ ने एक बार फिर अयोध्या की धार्मिक पहचान को सामने रखा।
सरयू तट पर स्नान करने के बाद भक्तों का मंदिर की ओर बढ़ना लगातार जारी रहा। कई जगहों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें नजर आईं। मंदिर परिसर में प्रवेश से पहले सुरक्षा जांच की गई। इसके बाद भक्तों को कतार के माध्यम से दर्शन और जलाभिषेक के लिए आगे बढ़ाया गया।
जिन भक्तों के पास गंगाजल या सरयू जल था, उन्होंने उससे शिवलिंग का अभिषेक किया। कुछ श्रद्धालुओं ने दूध और पंचामृत से भी पूजा की। बेलपत्र और फूल अर्पित करने के बाद भक्तों ने भगवान शिव के सामने दीप जलाया और आरती की।
अयोध्या की गलियों में भी सुबह से ही सावन का रंग दिखाई दिया। जगह-जगह श्रद्धालुओं की भीड़, पूजा सामग्री की दुकानें और शिवभक्तों के जयकारे माहौल को भक्तिमय बना रहे थे। मंदिर के आसपास प्रसाद और फूल-माला की दुकानों पर भी काफी चहल-पहल रही।
अंतिम सोमवार पर मंदिरों में भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं से धैर्य बनाए रखने और कतार में रहकर दर्शन करने की अपील की। भीड़ के बीच बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने को कहा गया।
सावन के अंतिम सोमवार के साथ ही पूरे महीने चले शिव आराधना के प्रमुख आयोजनों का समापन भी होने लगा। हालांकि श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिरों में पूजा-अर्चना का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
सावन के आखिरी सोमवार पर अयोध्या में सुबह से ही आस्था का सैलाब देखने को मिला। भक्तों ने सरयू में स्नान किया और नागेश्वरनाथ मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। हाथों में जल और बेलपत्र लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। मंदिर परिसर और आसपास हर-हर महादेव, बम-बम भोले के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा। शिवभक्तों के लिए सावन का यह अंतिम सोमवार श्रद्धा, भक्ति और आस्था से भरा खास दिन रहा।











