नोएडा में महिला से 53 लाख की ठगी:मुनाफे का झांसा देकर निवेश कराया, रकम निकालने पर मांगा 15% सर्विस चार्ज

नोएडा में महिला को शेयर बाजार में मुनाफे का झांसा देकर 53 लाख रुपये निवेश कराए गए। रकम निकालने पर 15% सर्विस चार्ज मांगा गया, तब ठगी का पता चला।
नोएडा में महिला से 53 लाख की ठगी:मुनाफे का झांसा देकर निवेश कराया, रकम निकालने पर मांगा 15% सर्विस चार्ज
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नोएडा: ग्रेटर नोएडा वेस्ट की एक महिला को शेयर बाजार और IPO में निवेश के जरिए मोटा मुनाफा कमाने का झांसा देकर साइबर ठगों ने करीब 53 लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने पहले महिला को WhatsApp के जरिए अपने संपर्क में लिया और खुद को निवेश कंपनी का वरिष्ठ प्रतिनिधि बताया। इसके बाद उसे एक WhatsApp ग्रुप में जोड़ा गया, जहां दूसरे लोगों के नाम से कथित तौर पर मुनाफे के स्क्रीनशॉट साझा किए जाते थे। इस पूरी प्रक्रिया के जरिए महिला का भरोसा जीतकर उससे धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश करा ली गई।

मामला तब सामने आया जब महिला ने निवेश की रकम और ऐप पर दिखाई जा रही कथित कमाई को वापस निकालने की कोशिश की। ठगों ने रकम जारी करने के बजाय उससे कुल राशि का 15 प्रतिशत सर्विस चार्ज जमा करने को कहा। इस मांग के बाद महिला को शक हुआ कि वह किसी फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म के जाल में फंस चुकी है।

पीड़िता ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-2 की रहने वाली बताई जा रही है और एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करती हैं। पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, 19 अप्रैल को WhatsApp पर मीरा अय्यर नाम की महिला ने उनसे संपर्क किया। उसने खुद को एक कैपिटल कंपनी की वरिष्ठ प्रतिनिधि बताया और IPO तथा शेयर बाजार में निवेश करने पर अच्छा रिटर्न मिलने का भरोसा दिलाया।

शुरुआत में बातचीत सामान्य निवेश सलाह की तरह की गई। महिला को बताया गया कि शेयर बाजार और IPO में सही तरीके से पैसा लगाने पर कम समय में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। इसके बाद उसे एक WhatsApp ग्रुप में जोड़ दिया गया। ग्रुप में कथित तौर पर पहले से मौजूद सदस्य अपने निवेश पर मुनाफा मिलने के स्क्रीनशॉट साझा करते थे। इससे महिला को लगा कि बाकी लोग भी उसी प्लेटफॉर्म के जरिए पैसा कमा रहे हैं।

ठगों ने महिला को कुछ मोबाइल ऐप के लिंक भी भेजे। रिपोर्ट के मुताबिक, ये ऐप सामान्य तौर पर Google Play Store पर उपलब्ध नहीं थे। महिला ने आरोपियों के बताए लिंक से APK फाइल के रूप में कुछ ऐप डाउनलोड किए। ऐप में निवेश की रकम और उस पर मिलने वाला कथित मुनाफा दिखाई देने लगा। यही फर्जी आंकड़े महिला के लिए सबसे बड़ा भरोसा बनने लगे।

इसके बाद महिला ने शुरुआत में छोटी रकम निवेश की। ठगों ने उसे बताया कि निवेश सही दिशा में जा रहा है और कुछ समय बाद मुनाफा बढ़ता हुआ दिखाई देने लगा। एक सप्ताह बाद उसे IPO अलॉटमेंट में हिस्सा लेने के लिए और रकम जमा करने की बात कही गई। महिला ने आरोपियों की बात पर भरोसा किया और उनके बताए बैंक खातों में अतिरिक्त रकम ट्रांसफर करनी शुरू कर दी।

जैसे-जैसे महिला ज्यादा रकम भेजती गई, फर्जी निवेश ऐप पर उसके खाते में कथित मुनाफा भी बढ़ता हुआ दिखाई देता रहा। इससे उसे लगा कि उसका निवेश सफल हो रहा है। ठगों ने इसी मनोवैज्ञानिक भरोसे का फायदा उठाकर उससे और रकम ट्रांसफर कराई।

पुलिस के अनुसार, अलग-अलग चरणों में महिला से कुल करीब 53 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए। रकम अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई। जब महिला को ऐप पर बड़ी रकम और मुनाफा दिखाई देने लगा तो उसे बताया गया कि अब पूरी रकम एक साथ निकाली जा सकती है। महिला ने जब निकासी की प्रक्रिया शुरू की तो ठगी का असली खेल सामने आया।

महिला को बताया गया कि रकम निकालने से पहले 15 प्रतिशत सर्विस चार्ज जमा करना जरूरी है। यह रकम जमा करने के बाद ही उसके खाते में निवेश और मुनाफे की राशि भेजे जाने का दावा किया गया। इतनी बड़ी रकम पहले ही निवेश कर चुकी महिला को जब अतिरिक्त भुगतान करने को कहा गया तो उसे शक हुआ।

यहीं से महिला ने आरोपियों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। WhatsApp पर संपर्क में मौजूद मीरा अय्यर, रानू वोहरा और अन्य लोगों की जानकारी खंगालने पर उसे महसूस हुआ कि पूरा निवेश प्लेटफॉर्म संदिग्ध हो सकता है। इसके बाद उसने पुलिस से शिकायत की।

साइबर ठगी के इस तरीके में अपराधी पहले पीड़ित को छोटे निवेश और कथित मुनाफे के जरिए विश्वास में लेते हैं। इसके बाद बड़ी रकम निवेश कराने के लिए IPO, शेयर अलॉटमेंट, टैक्स, प्रोसेसिंग फीस या अन्य शुल्क का हवाला दिया जाता है। जब पीड़ित अपनी रकम वापस मांगता है तो उससे फिर कोई नया शुल्क जमा करने को कहा जाता है।

इस मामले में भी 15 प्रतिशत सर्विस चार्ज की मांग उसी पैटर्न का हिस्सा बताई जा रही है। महिला ने अगर यह रकम भी जमा कर दी होती तो संभव है कि ठग आगे किसी दूसरे शुल्क के नाम पर फिर पैसे मांगते। ऐसे मामलों में फर्जी ऐप पर दिखाई जा रही रकम और मुनाफा केवल पीड़ित को भरोसा दिलाने का माध्यम हो सकता है।

पुलिस अब मामले की तकनीकी जांच कर रही है। जांच में महिला के बैंक खातों से जिन-जिन खातों में रकम भेजी गई, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। इसके अलावा संबंधित UPI ID, बैंक खाते, डिजिटल वॉलेट और अन्य वित्तीय माध्यमों की जांच की जा रही है।

साइबर पुलिस महिला के मोबाइल फोन में मौजूद WhatsApp चैट, कॉल डिटेल, संदिग्ध ऐप, भेजे गए लिंक और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर सकती है। इसके साथ ही आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, WhatsApp और Signal अकाउंट, वेबसाइट, डोमेन और IP एड्रेस की जानकारी जुटाई जा रही है।

फर्जी निवेश ऐप इस तरह की ठगी का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं। ऐसे ऐप देखने में वास्तविक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जैसे लग सकते हैं। इनमें निवेश की रकम, शेयरों की कीमत और मुनाफे के आंकड़े दिखाई देते हैं। लेकिन जब निवेशक अपनी रकम निकालना चाहता है तो उसे पता चलता है कि निकासी संभव नहीं है।

इस मामले में भी महिला को पहले ऐप पर बढ़ता हुआ मुनाफा दिखाया गया। इससे उसे लगा कि उसके पैसे पर वास्तव में रिटर्न मिल रहा है। लेकिन जब वास्तविक बैंक खाते में पैसा वापस लेने की बारी आई तो 15 प्रतिशत अतिरिक्त रकम की मांग कर दी गई।

पुलिस इस बात की भी जांच करेगी कि महिला से संपर्क करने वाले लोग वास्तव में कौन हैं और क्या वे किसी बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े हैं। यदि बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन से अन्य पीड़ितों का भी पता चलता है तो मामले का दायरा और बड़ा हो सकता है।

इस घटना से उन लोगों के लिए भी सबक है जो सोशल मीडिया या WhatsApp पर मिलने वाले निवेश प्रस्तावों पर भरोसा कर लेते हैं। किसी अनजान व्यक्ति द्वारा शेयर बाजार में निश्चित मुनाफे का दावा करना या किसी खास ऐप के जरिए निवेश करने को कहना अपने आप में सावधानी बरतने का संकेत है।

खास तौर पर यदि कोई ऐप आधिकारिक ऐप स्टोर पर उपलब्ध नहीं है और उसे APK फाइल के जरिए डाउनलोड करने के लिए कहा जा रहा है तो अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। बिना जांचे ऐसे ऐप को मोबाइल में इंस्टॉल करना भी जोखिम भरा हो सकता है।

इसी तरह, निवेश की रकम निकालने के लिए अगर कोई व्यक्ति पहले टैक्स, सर्विस चार्ज, प्रोसेसिंग फीस या सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर अतिरिक्त पैसे मांगता है तो भुगतान करने से पहले उसकी वैधता जांचनी चाहिए। इस मामले में भी 15 प्रतिशत सर्विस चार्ज की मांग ने महिला को ठगी का एहसास कराया।

पुलिस की जांच में अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि 53 लाख रुपये की रकम आखिर किन खातों में पहुंची और उसके बाद उसे कहां-कहां ट्रांसफर किया गया। साइबर अपराधों में ठगी की रकम को कई खातों में घुमाने की कोशिश की जाती है, इसलिए शुरुआती बैंक ट्रेल आरोपियों तक पहुंचने में अहम साबित हो सकती है।

फिलहाल साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।

नोएडा की यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि साइबर ठग किस तरह पहले मुनाफे का भरोसा दिलाकर लोगों से बड़ी रकम निवेश करा लेते हैं और पैसा निकालने के समय नया शुल्क लगाकर ठगी को आगे बढ़ाते हैं। महिला से 53 लाख रुपये निवेश कराने के बाद 15 प्रतिशत सर्विस चार्ज मांगना इसी तरीके की ओर इशारा करता है। अब पुलिस बैंक ट्रांजेक्शन, WhatsApp चैट, मोबाइल नंबर और फर्जी ऐप के डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।

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