Columbus

SCO Summit में नेपाल-चीन द्विपक्षीय बैठक! लिपुलेख मुद्दे पर ओली को मिला ठंडा जवाब

SCO Summit में नेपाल-चीन द्विपक्षीय बैठक! लिपुलेख मुद्दे पर ओली को मिला ठंडा जवाब

नेपाल के पीएम ओली ने SCO Summit में लिपुलेख दर्रे का मुद्दा चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग के सामने उठाया, लेकिन चीन ने इसे नजरअंदाज किया। भारत और नेपाल के बीच विवाद जारी, क्षेत्रीय कूटनीति प्रभावित हो सकती है।

SCO Summit: चीन के त्येनजिन में चल रहे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सम्मेलन में नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने लिपुलेख दर्रे का मुद्दा उठाया। ओली का मकसद यह था कि भारत और चीन के बीच लिपुलेख को व्यापार मार्ग के रूप में इस्तेमाल करने के समझौते पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई जाए।

जिनपिंग ने नजरअंदाज किया ओली का मुद्दा

प्रधानमंत्री ओली की कोशिश के बावजूद राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। चीन की ओर से आधिकारिक बयान में भी इस मामले का कोई उल्लेख नहीं किया गया। इस तरह ओली की उम्मीदों को निराशा का सामना करना पड़ा और चीन ने नेपाल को इस मामले में कोई तरजीह नहीं दी।

नेपाल का दावा और भारत का रुख

नेपाल लिपुलेख क्षेत्र पर अपना दावा जताता रहा है। वहीं भारत ने बार-बार यह दावा खारिज किया है। भारत का कहना है कि लिपुलेख का क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है और नेपाल का दावा ऐतिहासिक और कानूनी दृष्टि से सही नहीं है। इसके अलावा, भारत और चीन के बीच हाल ही में हुए समझौते के तहत लिपुलेख पास से व्यापार करने पर सहमति बनी थी। नेपाल ने पहले भी इस समझौते पर आपत्ति जताई थी।

SCO सम्मेलन में द्विपक्षीय बैठक

एससीओ समिट के दौरान ओली और जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक आयोजित हुई। बैठक में नेपाल-चीन संबंधों को और मज़बूत करने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा की। हालांकि लिपुलेख मुद्दे पर ओली की आपत्तियों को कोई विशेष महत्व नहीं दिया गया।

नेपाल की आपत्तियां

नेपाल प्रधानमंत्री सचिवालय ने बैठक के बाद बयान जारी किया। विदेश सचिव अमृत बहादुर राय के हवाले से कहा गया कि प्रधानमंत्री ओली ने स्पष्ट रूप से भारत और चीन के बीच लिपुलेख को व्यापार मार्ग बनाने पर आपत्ति जताई। लेकिन चीन ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

भारत-चीन व्यापार समझौता

भारत और चीन के बीच लिपुलेख पास के माध्यम से व्यापार शुरू करने की योजना बनी है। यह मार्ग दोनों देशों के बीच सामान और माल के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाएगा। नेपाल इस कदम से असंतुष्ट है और चाहता है कि इस इलाके का उपयोग बिना उसकी सहमति के न किया जाए।

Leave a comment