SEBI का बड़ा फैसला: म्यूचुअल फंड खर्च ढांचे में बदलाव से निवेशकों को राहत

SEBI का बड़ा फैसला: म्यूचुअल फंड खर्च ढांचे में बदलाव से निवेशकों को राहत

SEBI ने म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए नया खर्च ढांचा लागू करने का फैसला किया है। 1 अप्रैल से TER की जगह BER लागू होगा, जिससे निवेशकों को खर्च की बेहतर पारदर्शिता और कम लागत का लाभ मिलेगा।

SEBI: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी SEBI ने घरेलू म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा और अहम बदलाव किया है। करीब 80 लाख करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड उद्योग में अब खर्च का नया ढांचा लागू होने जा रहा है। इस फैसले का सीधा मकसद निवेशकों के लिए पारदर्शिता बढ़ाना और साथ ही Asset Management Companies यानी AMC के हितों का संतुलन बनाए रखना है। बाजार नियामक का यह संशोधित नियम 1 अप्रैल से प्रभावी होगा।

TER की जगह BER: क्या बदला और क्यों जरूरी था

अब तक म्यूचुअल फंड योजनाओं में Total Expense Ratio यानी TER लागू था। TER में सिर्फ फंड मैनेजमेंट फीस ही नहीं, बल्कि ब्रोकरेज, Securities Transaction Tax (STT), स्टांप ड्यूटी और एक्सचेंज शुल्क जैसे कई खर्च शामिल होते थे। आम निवेशकों के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता था कि वे असल में फंड मैनेजमेंट के लिए कितना भुगतान कर रहे हैं।

SEBI ने इसी समस्या को हल करने के लिए Base Expense Ratio यानी BER का कॉन्सेप्ट पेश किया है। नए नियम के तहत BER में केवल वही फीस शामिल होगी, जो AMC निवेशकों के पैसे को मैनेज करने के लिए लेती है। बाकी सभी खर्च जैसे ब्रोकरेज और टैक्स को BER से बाहर रखा जाएगा और इन्हें अलग से डिस्क्लोज किया जाएगा। इससे निवेशकों को खर्च का पूरा ब्रेकअप साफ तौर पर दिखेगा।

इक्विटी फंड्स के लिए नया खर्च ढांचा

ओपन-एंडेड इक्विटी ओरिएंटेड योजनाओं के लिए संशोधित BER तय कर दिया गया है। जिन योजनाओं की एसेट साइज 500 करोड़ रुपये तक है, उनके लिए अधिकतम BER 2.10 फीसदी होगा। वहीं जिन योजनाओं की एसेट साइज 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है, उनके लिए यह घटकर 0.95 फीसदी रह जाएगा।

इस बदलाव का मतलब साफ है। जैसे-जैसे किसी फंड का आकार बढ़ेगा, वैसे-वैसे निवेशकों पर लगने वाला खर्च कम होता जाएगा। इससे बड़े और स्थापित फंड्स में निवेश करने वाले निवेशकों को लंबी अवधि में सीधा फायदा मिलेगा।

नॉन-इक्विटी और क्लोज-एंडेड योजनाओं पर असर

गैर-इक्विटी यानी debt और hybrid जैसी योजनाओं के लिए भी BER की नई सीमा तय की गई है। इन योजनाओं में समान एसेट कैटेगरी के हिसाब से BER 1.85 फीसदी से लेकर 0.70 फीसदी के बीच रहेगा। वहीं क्लोज-एंडेड योजनाओं के लिए भी आधार व्यय अनुपात को घटा दिया गया है।

इस कदम से उन निवेशकों को राहत मिलेगी जो कम जोखिम वाले फंड्स में निवेश करते हैं और जिनके लिए खर्च का स्तर काफी मायने रखता है।

AMC की चिंता पर SEBI का संतुलित रुख

जब SEBI ने पहली बार म्यूचुअल फंड खर्च ढांचे में बदलाव का प्रस्ताव रखा था, तब कई सूचीबद्ध AMC के शेयरों में गिरावट देखने को मिली थी। निवेशकों को डर था कि इससे AMC का मुनाफा प्रभावित हो सकता है।

SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने साफ किया कि नया ढांचा एक balanced approach है। उन्होंने कहा कि इस बदलाव का मकसद निवेशकों को कम लागत और ज्यादा स्पष्टता देना है, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि AMC पर अनुचित दबाव न पड़े। SEBI का मानना है कि यह बीच का रास्ता है, जिससे इंडस्ट्री की स्थिरता भी बनी रहेगी।

रिसर्च और ब्रोकरेज शुल्क पर बड़ा यू-टर्न

SEBI ने एक और अहम फैसले में रिसर्च और ब्रोकरेज शुल्क को अलग करने का प्रस्ताव वापस ले लिया है। नियामक ने माना कि यूरोप में इस तरह का प्रयोग सफल नहीं रहा था और इससे बाजार में दिक्कतें बढ़ी थीं। इसी अनुभव को देखते हुए SEBI ने यह कदम उठाया।

हालांकि, ब्रोकरेज सीमा को तर्कसंगत जरूर बनाया गया है। कैश मार्केट ट्रांजैक्शन में वैधानिक शुल्क को छोड़कर ब्रोकरेज की सीमा पहले 8.59 बेसिस पॉइंट थी, जिसे घटाकर 6 बेसिस पॉइंट कर दिया गया है। डेरिवेटिव सेगमेंट में यह सीमा 3.89 बेसिस पॉइंट से घटाकर 2 बेसिस पॉइंट कर दी गई है।

पुराने नियमों में बदलाव से सिस्टम होगा सरल

SEBI ने लगभग तीन दशक पुराने म्यूचुअल फंड और स्टॉक ब्रोकर से जुड़े कई नियमों में बदलाव को भी मंजूरी दी है। ऐसे नियम जो अब प्रासंगिक नहीं रहे या जिनका महत्व कम हो चुका है, उन्हें खत्म किया जाएगा या आपस में मर्ज कर दिया जाएगा। इससे रेगुलेटरी फ्रेमवर्क ज्यादा सरल और व्यावहारिक बनेगा।

हितों के टकराव पर फैसला फिलहाल टला

नियामक ने हितों के टकराव से जुड़ी एक उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों को लागू करने का फैसला अभी टाल दिया है। SEBI का कहना है कि कर्मचारियों की संपत्ति के सार्वजनिक खुलासे और गोपनीयता से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई गई है। इन्हीं कारणों से इस पर आगे विचार किया जाएगा।

Leave a comment