SEBI ने Dalmia Group के चेयरमैन संजय डालमिया को गोल्डन टोबैको लिमिटेड (GTL) केस में दो साल के लिए शेयर बाजार से प्रतिबंधित किया और 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। उनके साथ अनुराग डालमिया और पूर्व निदेशक अशोक कुमार जोशी पर भी अलग-अलग अवधि के प्रतिबंध और जुर्माना लगाया गया। आरोप वित्तीय गड़बड़ी और शेयरधारकों को सही जानकारी न देने के हैं।
Dalmia Group: नई दिल्ली में SEBI ने गोल्डन टोबैको लिमिटेड (GTL) मामले में Dalmia Group के चेयरमैन संजय डालमिया के खिलाफ आदेश पारित किया। नियामक ने उन्हें दो साल के लिए प्रतिभूति बाजार में प्रवेश से प्रतिबंधित किया और 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। SEBI ने पाया कि GTL ने 2010–2015 के बीच अपनी सहायक कंपनी GRIL को 175.17 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए, जिसमें अधिकांश धन प्रवर्तक-संबंधित संस्थाओं में चला गया। इसके अलावा, कंपनी की भूमि परिसंपत्तियों से संबंधित समझौतों और वित्तीय विवरणों में गड़बड़ी के चलते यह कार्रवाई की गई।
संजय डालमिया पर 2 साल का बाजार प्रतिबंध
SEBI ने अपने आदेश में कहा कि GTL और उसके प्रमुख अधिकारियों द्वारा संपत्ति का दुरुपयोग और वित्तीय विवरणों में गड़बड़ी की गई। नियामक ने संजय डालमिया को प्रतिभूति बाजार में अनुचित व्यापार व्यवहार और धोखाधड़ी के नियमों के उल्लंघन के लिए प्रतिबंधित किया। उनके खिलाफ लिस्टिंग दायित्व और प्रकटीकरण नियमों के उल्लंघन का भी आरोप है।
आदेश के अनुसार, संजय डालमिया को दो साल के लिए बाजार में प्रवेश से रोका गया है। इसके साथ ही उनके अलावा अनुराग डालमिया को डेढ़ साल के लिए प्रतिबंधित किया गया है और उन पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। GTL के पूर्व निदेशक अशोक कुमार जोशी को एक साल के लिए बाजार में प्रवेश से प्रतिबंधित किया गया और उन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
भूमि लेनदेन में नियमों का उल्लंघन
SEBI के अनुसार, GTL ने वित्त वर्ष 2010 से 2015 तक अपनी सहायक कंपनी GRIL को लोन और अग्रिम के रूप में 175.17 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट में इसे बकाया दिखाया गया। SEBI ने आरोप लगाया कि कुल अग्रिम में से केवल 36 करोड़ रुपये ही वापस किए गए। शेष राशि GRIL से प्रवर्तक-संबंधित संस्थाओं में स्थानांतरित कर दी गई।
नियामक ने कहा कि GTL के प्रवर्तकों और निदेशकों ने शेयरधारकों को उचित जानकारी दिए बिना कंपनी की प्रमुख भूमि परिसंपत्तियों से संबंधित समझौते किए। इन समझौतों में भूमि की बिक्री या पट्टे के लिए तीसरे पक्षों के साथ किए गए लेनदेन शामिल थे। SEBI का आरोप है कि यह लेनदेन या तो कंपनी के सर्वोत्तम हित में नहीं था या स्टॉक एक्सचेंज के समक्ष इसका पारदर्शी खुलासा नहीं किया गया।
GTL में वित्तीय गड़बड़ी पर SEBI की सख्त कार्रवाई
SEBI ने GTL के वित्तीय दस्तावेजों और लेनदेन की विस्तृत जांच की। जांच में पाया गया कि कंपनी के प्रवर्तकों ने वित्तीय अनुशासन का पालन नहीं किया। इसके अलावा, कंपनी के निदेशक और प्रमुख अधिकारियों ने शेयरधारकों को वास्तविक वित्तीय स्थिति की जानकारी नहीं दी। इस वजह से निवेशकों और बाजार में विश्वास को चोट पहुंची।
SEBI ने आदेश में कहा कि वित्तीय विवरणों में गड़बड़ी और संपत्ति के दुरुपयोग के कारण बाजार में अनुचित लाभ उठाने की प्रवृत्ति सामने आई। यही कारण है कि संजय डालमिया और अन्य अधिकारियों पर प्रतिबंध और जुर्माना लगाया गया।
कार्रवाई का असर
इस आदेश के बाद GTL और डालमिया ग्रुप के निवेशकों और शेयरधारकों के लिए स्पष्ट संदेश गया है कि SEBI वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता के उल्लंघन को गंभीरता से लेता है। बाजार से दो साल के लिए प्रतिबंध और भारी जुर्माने की कार्रवाई से निवेशकों में सतर्कता बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के आदेशों से कंपनियों के प्रवर्तकों और निदेशकों पर दबाव बढ़ता है कि वे बाजार में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन बनाए रखें।