सीकर कलेक्ट्रेट में दिशा बैठक के दौरान AC नहीं चलने पर जनप्रतिनिधियों ने नाराजगी जताई। कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा ने चुटकी लेते हुए कहा कि शायद उन्हें जल्दी रवाना करने की तैयारी है। बैठक में विकास कार्यों और अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठे।
सीकर: जिले में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक उस समय चर्चा का विषय बन गई, जब भीषण गर्मी के बीच बैठक कक्ष का एयर कंडीशनर (AC) काम नहीं कर रहा था। बैठक में सांसद, विधायक, जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, लेकिन तकनीकी अव्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों की कमी ने जनप्रतिनिधियों को नाराज कर दिया।
बैठक के दौरान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और लक्ष्मणगढ़ विधायक Govind Singh Dotasra ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि “लगता है कलेक्टर हमें जल्दी रवाना करना चाहते हैं।” उनके इस बयान के बाद सभागार में मौजूद अन्य जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच हलचल बढ़ गई।
दिशा बैठक में बिजली-पानी से लेकर सड़क तक के मुद्दों पर चर्चा
सीकर जिला कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित दिशा बैठक की अध्यक्षता सीकर सांसद Amra Ram ने की। बैठक में बिजली, सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।
बैठक में जिला कलेक्टर आशीष मोदी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक तेजपाल सिंह, विभिन्न विभागों के अधिकारी और कई विधायक मौजूद रहे। चर्चा के दौरान कई जनप्रतिनिधियों ने सरकारी योजनाओं के धीमे क्रियान्वयन और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर नाराजगी जाहिर की।
AC बंद होने पर डोटासरा ने ली चुटकी
बैठक के दौरान जब गर्मी बढ़ने लगी और एयर कंडीशनर काम नहीं करता दिखाई दिया, तब गोविंद सिंह डोटासरा ने हल्के अंदाज में प्रशासन पर टिप्पणी की। उनके बयान के बाद खंडेला विधायक Subhash Meel ने भी पीछे मुड़कर AC की ओर देखा।
इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी तुरंत सक्रिय हुए और बिजली तथा एयर कंडीशनिंग व्यवस्था को दुरुस्त करने का प्रयास किया गया। हालांकि यह छोटा तकनीकी मामला बैठक में प्रशासनिक तैयारी पर सवाल खड़े कर गया।
अधिकारियों की तैयारी पर उठे सवाल
बैठक के दौरान कई जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी बिना पर्याप्त तैयारी के पहुंचे थे और उनके जवाब संतोषजनक नहीं थे।
गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि पिछली दिशा बैठक में जिन मुद्दों को उठाया गया था, उन पर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि कई विभागों ने अब तक अनुपालन रिपोर्ट भी ठीक से प्रस्तुत नहीं की।
उन्होंने अधिकारियों पर जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब प्रशासन जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेता, तो विकास कार्यों की गति प्रभावित होती है।

पेयजल संकट और अधूरी परियोजनाओं पर चिंता
बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा पेयजल संकट का रहा। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि सीकर जिले में पानी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है, लेकिन समाधान के लिए कोई ठोस योजना धरातल पर दिखाई नहीं दे रही।
सांसद अमराराम ने कहा कि वर्ष 2021 से चूरू और झुंझुनूं क्षेत्र की पेयजल परियोजनाओं पर पर्याप्त काम नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के कई कार्य स्वीकृत होने के बावजूद बेहद धीमी गति से चल रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जिले में कई ट्यूबवेल खोदे गए, लेकिन उनमें से केवल कुछ को ही बिजली कनेक्शन मिल पाया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट और गहरा गया है।
सड़क, स्वास्थ्य और बिजली व्यवस्था पर भी उठे सवाल
बैठक में कई विधायकों ने खराब सड़कों, अधूरी परियोजनाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर चिंता व्यक्त की।
फतेहपुर विधायक Hakam Ali Khan ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान बनी कई सड़कें अब पूरी तरह टूट चुकी हैं और उनकी मरम्मत का काम समय पर नहीं हो रहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ निर्माण ठेकेदार काम अधूरा छोड़कर चले गए हैं और अधिकारी उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं कर रहे। विधायक ने कहा कि पहले अधिकारी ठेकेदारों पर नियंत्रण रखते थे, लेकिन अब हालात उल्टे दिखाई दे रहे हैं।
नीमकाथाना अस्पताल अब भी उद्घाटन का इंतजार कर रहा
डोटासरा ने बैठक के दौरान यह मुद्दा भी उठाया कि Neem Ka Thana जिला अस्पताल लगभग एक साल से उद्घाटन का इंतजार कर रहा है।
उन्होंने कहा कि अस्पताल भवन तैयार होने के बावजूद सेवाएं शुरू नहीं हो सकी हैं, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इसे प्रशासनिक उदासीनता का उदाहरण बताया।
DMFT बजट रोकने पर सरकार की आलोचना
नीमकाथाना विधायक Suresh Modi ने जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के बजट पर रोक को लेकर सरकार की आलोचना की।
उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ साल से DMFT से जुड़े विकास कार्य ठप पड़े हैं। विधायक ने चेतावनी दी कि यदि वैध खनन गतिविधियों को बढ़ावा नहीं दिया गया, तो अवैध खनन बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों के लिए बजरी की आवश्यकता होती है और यदि वैध लीज नहीं मिलेगी तो अवैध कारोबार बढ़ेगा, जिससे सरकार को राजस्व नुकसान और जनता को महंगी सामग्री का सामना करना पड़ेगा।
जनप्रतिनिधियों ने प्रशासनिक ढांचे पर जताई चिंता
बैठक में शामिल कई जनप्रतिनिधियों ने कहा कि प्रशासनिक तंत्र में समन्वय की कमी दिखाई दे रही है। उनका कहना था कि विकास परियोजनाओं की स्वीकृति के बाद भी जमीन पर काम शुरू होने में लंबा समय लग रहा है।
जनप्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि कई विभाग केवल “देखेंगे” और “करवा देंगे” जैसे जवाब देकर मामलों को टाल रहे हैं, जबकि जनता महीनों से समस्याओं का सामना कर रही है।
जिला कलेक्टर ने दिए समयबद्ध कार्यों के निर्देश
बैठक के अंत में जिला कलेक्टर आशीष मोदी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभाग विकास योजनाओं का समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि जनता से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए और अगली दिशा बैठक से पहले लंबित कार्यों की प्रगति रिपोर्ट तैयार की जाए।
आगामी बैठकों पर रहेगी नजर
दिशा बैठक में उठाए गए मुद्दों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि राजस्थान के कई जिलों में बुनियादी सुविधाओं, प्रशासनिक समन्वय और विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जिला स्तर पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जाए, तो पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी समस्याओं के समाधान में तेजी लाई जा सकती है।
अब सभी की नजर आगामी दिशा बैठक पर रहेगी, जिसमें यह देखा जाएगा कि अधिकारियों द्वारा दिए गए आश्वासन कितने प्रभावी तरीके से धरातल पर लागू हो पाते हैं।










