SHANTI Act: भारत के परमाणु क्षेत्र में निजी निवेश पर अमेरिकी उद्योग की नजर, मसौदा नियमों पर देगा सुझाव

SHANTI Act के तहत भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी और निवेश की संभावनाएं बढ़ीं। अमेरिकी परमाणु उद्योग मसौदा नियमों पर भारत सरकार को सुझाव देगा।

अमेरिकी परमाणु उद्योग भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी का रास्ता खोलने वाले शांति (SHANTI) अधिनियम के प्रस्तावित नियमों और विनियमों पर भारत सरकार को व्यापक सुझाव देगा।

नई दिल्ली: भारत के असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने के लिए लाए गए SHANTI Act के प्रस्तावित नियमों को लेकर अमेरिकी परमाणु उद्योग ने सक्रिय रुचि दिखाई है। अमेरिकी कंपनियों की ओर से भारत सरकार को इन नियमों पर विस्तृत सुझाव दिए जाने की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित नियमों में लाइसेंसिंग, जवाबदेही, बीमा, निजी कंपनियों की भूमिका और परमाणु परियोजनाओं की संरचना जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं।

भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग ने हाल ही में SHANTI Act से जुड़े मसौदा नियम और विनियम जारी किए हैं। सरकार ने इन प्रस्तावित प्रावधानों पर हितधारकों से सुझाव मांगे हैं और इसके लिए 4 सितंबर 2026 तक की समयसीमा निर्धारित की गई है।

अमेरिकी परमाणु उद्योग क्यों दे रहा है सुझाव?

यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) अमेरिकी परमाणु उद्योग की ओर से भारत सरकार को मिलने वाले सुझावों के समन्वय में जुटा है। फोरम ने अमेरिकी परमाणु कंपनियों के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों के साथ SHANTI Act के मसौदा नियमों पर चर्चा की है। USISPF के अनुसार, उसका उद्देश्य अमेरिकी परमाणु उद्योग के विभिन्न हिस्सों से जुड़े हितधारकों की राय को एक साथ लाकर भारत सरकार के सामने व्यापक सुझाव रखना है। इसके लिए फोरम ने अपनी न्यूक्लियर इंडस्ट्री कमेटी के साथ एक ऑनलाइन बैठक भी आयोजित की।

इस बैठक में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र की अलग-अलग गतिविधियों से जुड़े वरिष्ठ उद्योग प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा का फोकस यह समझना था कि प्रस्तावित नियम निजी कंपनियों के प्रवेश और भविष्य की परमाणु परियोजनाओं को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं।

लाइसेंसिंग और जवाबदेही पर विशेष चर्चा

बैठक में SHANTI Act के तहत निजी क्षेत्र के लिए संभावित अवसरों के साथ-साथ नियामकीय चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। खासतौर पर लाइसेंसिंग प्रक्रिया, जवाबदेही, बीमा और परमाणु परियोजनाओं की संरचना से जुड़े प्रावधानों पर उद्योग की राय ली गई। परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सुरक्षा और जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में निजी कंपनियों के लिए बाजार खोलने के साथ स्पष्ट नियम और जिम्मेदारियों का निर्धारण निवेशकों के लिए भी अहम होगा।

USISPF की बैठक में दिल्ली स्थित PLR Chambers के कानूनी विशेषज्ञ सुहान मुखर्जी और Nuclear Energy Institute के राष्ट्रीय सुरक्षा एवं अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के वरिष्ठ निदेशक टेड जोन्स ने भी अपनी बात रखी।

SHANTI Act से क्या बदलेगा?

SHANTI Act को भारत के असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश और भागीदारी का रास्ता खोलने वाली महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसके तहत पात्र निजी कंपनियां और संयुक्त उपक्रम परमाणु ऊर्जा से जुड़ी कई गतिविधियों में भाग ले सकेंगे। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत निजी क्षेत्र को परमाणु संयंत्रों के निर्माण, स्वामित्व और संचालन में भूमिका मिल सकती है। इसके अलावा संयंत्रों को बंद करने तथा परमाणु अनुसंधान और विकास से संबंधित गतिविधियों के लिए भी प्रावधान किए गए हैं।

अधिनियम में परमाणु ईंधन के निर्माण और आयनीकरण विकिरण के गैर-बिजली उपयोग से जुड़े क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। आयनीकरण विकिरण का इस्तेमाल चिकित्सा, कृषि और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है। हालांकि, परमाणु क्षेत्र की संवेदनशील गतिविधियों पर सरकार का नियामकीय और रणनीतिक नियंत्रण बना रहेगा। निजी भागीदारी का उद्देश्य क्षेत्र में निवेश, तकनीकी क्षमता और परियोजनाओं की गति को बढ़ाना है।

भारत का 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य

भारत ने अपनी दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति में परमाणु ऊर्जा की भूमिका बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। सरकार की योजना 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक ले जाने की है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकारी क्षेत्र के साथ निजी निवेश और तकनीकी सहयोग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।इसके अलावा भारत ने 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) स्थापित करने का लक्ष्य भी रखा है। SMR छोटे आकार के उन्नत परमाणु विखंडन रिएक्टर होते हैं और एक इकाई से 300 मेगावाट तक बिजली उत्पादन की क्षमता हो सकती है।

Leave a comment