Budget 2026 के दौरान Share Market Crash ने निवेशकों को चौंका दिया। STT बढ़ोतरी और LTCG Tax पर राहत न मिलने से बाजार में भारी बिकवाली हुई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
Share Market Crash की खबर ने बजट 2026 के दिन निवेशकों को चौंका दिया। बजट से पहले जहां उम्मीद थी कि बाजार को राहत मिलेगी, वहीं बजट भाषण के दौरान हुए कुछ ऐलानों ने तस्वीर बदल दी। नतीजा यह रहा कि कुछ ही घंटों में शेयर बाजार भारी दबाव में आ गया और निवेशकों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा।
रविवार को घरेलू शेयर बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 1546.84 अंकों यानी करीब 1.88 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80,722.94 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 इंडेक्स भी 495.20 अंकों यानी लगभग 1.96 प्रतिशत टूटकर 24,825.45 पर बंद हुआ। बजट के दिन बाजार हरे निशान में खुला था और शुरुआती मिनटों में हल्की तेजी भी दिखी, लेकिन जैसे-जैसे बजट भाषण आगे बढ़ा, निवेशकों की चिंता बढ़ती गई और बाजार तेजी से फिसलता चला गया।
बजट के दिन बाजार का मिजाज क्यों बदला
बजट 2026 से पहले निवेशकों को कई तरह की राहत की उम्मीद थी। खासतौर पर Tax Relief, Capital Gains Tax और ट्रेडिंग से जुड़े नियमों को लेकर बाजार सकारात्मक संकेतों का इंतजार कर रहा था। बजट भाषण के शुरुआती हिस्से में जब कोई नकारात्मक संकेत नहीं मिला, तो बाजार में थोड़ी मजबूती दिखी।
लेकिन जैसे ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कुछ अहम टैक्स से जुड़े ऐलान किए, निवेशकों की धारणा अचानक बदल गई। देखते ही देखते मुनाफावसूली और घबराहट वाली बिकवाली शुरू हो गई। इस गिरावट ने यह साफ कर दिया कि बाजार इस बजट से कुछ अलग उम्मीद कर रहा था।
क्या कहती है Market Expert की राय
India TV से बातचीत में जाने-माने मार्केट एक्सपर्ट कुणाल सरावगी ने इस गिरावट के पीछे दो बड़े कारण बताए। उनके मुताबिक, बजट के दौरान किए गए कुछ ऐलान निवेशकों को पसंद नहीं आए और इसी वजह से बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली।
उनका कहना है कि यह गिरावट किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका असर पूरे बाजार पर दिखा। खासतौर पर ट्रेडिंग से जुड़े स्टॉक्स और ब्रॉड मार्केट में दबाव ज्यादा रहा।
STT बढ़ोतरी बना पहला बड़ा कारण
कुणाल सरावगी के अनुसार, बाजार टूटने का सबसे बड़ा कारण Future and Options Trading से जुड़ा फैसला रहा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में STT (Securities Transaction Tax) बढ़ाने का ऐलान किया।
बजट में फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर STT को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया। वहीं ऑप्शंस प्रीमियम पर STT को 0.10 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने की घोषणा की गई।
यह ऐलान सामने आते ही बाजार में बेचने वालों की संख्या तेजी से बढ़ गई। डेरिवेटिव्स सेगमेंट में काम करने वाले ट्रेडर्स को लगा कि अब उनकी ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ जाएगी, जिससे मुनाफा कम हो सकता है। इसी डर की वजह से बड़े पैमाने पर बिकवाली शुरू हुई और बाजार तेजी से नीचे चला गया।
F&O ट्रेडर्स पर क्यों पड़ा ज्यादा असर
भारत में बड़ी संख्या में रिटेल और प्रोफेशनल निवेशक F&O Trading के जरिए बाजार में सक्रिय रहते हैं। STT में बढ़ोतरी का सीधा असर उनकी जेब पर पड़ता है।
जब ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ती है, तो छोटे निवेशकों और एक्टिव ट्रेडर्स के लिए बाजार में टिके रहना मुश्किल हो जाता है। बजट में STT बढ़ाने के फैसले को बाजार ने नकारात्मक रूप में लिया और यही वजह रही कि गिरावट अचानक और तेज हो गई।
LTCG Tax पर राहत न मिलना दूसरा कारण
मार्केट क्रैश का दूसरा बड़ा कारण LTCG (Long Term Capital Gains) Tax को लेकर कोई राहत न मिलना रहा। निवेशकों को उम्मीद थी कि सरकार इस बार लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में कुछ छूट दे सकती है।
पिछले कुछ समय से बाजार में यह मांग उठ रही थी कि सरकार इक्विटी निवेश को बढ़ावा देने के लिए LTCG टैक्स की दर कम करे या इसमें कोई राहत दे। लेकिन बजट 2026 में इस दिशा में कोई बड़ा ऐलान नहीं हुआ।
निवेशकों की यह उम्मीद टूटने के बाद बाजार में निराशा बढ़ गई और कई निवेशकों ने अपने शेयर बेचकर मुनाफा सुरक्षित करना बेहतर समझा।
अभी कितना LTCG टैक्स देना पड़ता है
वर्तमान नियमों के मुताबिक, लिस्टेड इक्विटी शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड अगर 12 महीने से ज्यादा समय तक होल्ड किए जाते हैं, तो वे LTCG Tax के दायरे में आते हैं।
वहीं गोल्ड ETF और अनलिस्टेड शेयरों के लिए यह होल्डिंग पीरियड 24 महीने का होता है। सरकार अभी इक्विटी शेयरों, म्यूचुअल फंड्स और ETF पर 12.5 प्रतिशत का LTCG टैक्स वसूल रही है।
निवेशकों को उम्मीद थी कि इस टैक्स दर में कुछ कटौती होगी, जिससे लॉन्ग टर्म निवेश को बढ़ावा मिलेगा। लेकिन राहत न मिलने से बाजार की भावना कमजोर हुई और इसका असर सीधे शेयर बाजार पर दिखा।










