बाजार: शेयर बाजार में पिछले हफ्ते रिलायंस इंडस्ट्रीज के निवेशकों को सबसे बड़ा फायदा हुआ। कंपनी का मार्केट कैप ₹24,697 करोड़ बढ़ा। वहीं भारती एयरटेल, HDFC बैंक और SBI समेत कई कंपनियों के शेयरहोल्डरों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्ताह सीमित बढ़त देखने को मिली, लेकिन देश की शीर्ष कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन में भारी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। बीएसई सेंसेक्स की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से छह कंपनियों के मार्केट कैप में कुल ₹74,111.57 करोड़ की बढ़ोतरी हुई, जबकि चार कंपनियों को संयुक्त रूप से ₹51,320.6 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा।
इस दौरान सबसे बड़ा लाभ Reliance Industries को हुआ, जिसके निवेशकों की संपत्ति में ₹24,696.89 करोड़ का इजाफा हुआ। दूसरी ओर Bharti Airtel के शेयरधारकों को सबसे बड़ा नुकसान झेलना पड़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेतों, विदेशी निवेश, तेल कीमतों और घरेलू बाजार की स्थिरता ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
सेंसेक्स में मामूली तेजी, लेकिन मार्केट कैप में बड़ा बदलाव
पिछले सप्ताह बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 177.36 अंक यानी लगभग 0.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। हालांकि इंडेक्स में यह बढ़त सीमित रही, लेकिन कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में मजबूत गतिविधि देखने को मिली।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों का फोकस इस समय बैंकिंग, आईटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा सेक्टर पर बना हुआ है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज बनी सबसे बड़ी गेनर
देश की सबसे मूल्यवान कंपनी Reliance Industries ने पिछले सप्ताह सबसे अधिक मार्केट कैप बढ़ोतरी दर्ज की।
कंपनी का बाजार पूंजीकरण ₹24,696.89 करोड़ बढ़कर ₹18.33 लाख करोड़ पर पहुंच गया।
रिलायंस के शेयरों में यह तेजी ऐसे समय आई है जब कंपनी अपने रिटेल, डिजिटल और ऊर्जा कारोबार के विस्तार पर लगातार काम कर रही है। निवेशकों को उम्मीद है कि कंपनी आने वाले समय में नई टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में मजबूत प्रदर्शन कर सकती है।
हालांकि यह उल्लेखनीय है कि इससे पहले वाले सप्ताह में रिलायंस के मार्केट कैप में लगभग ₹1.34 लाख करोड़ की भारी गिरावट दर्ज की गई थी। ऐसे में ताजा उछाल को निवेशकों के लिए राहत माना जा रहा है।
टीसीएस और आईसीआईसीआई बैंक को भी मिला फायदा
Tata Consultancy Services यानी टीसीएस का मार्केट कैप ₹19,338.68 करोड़ बढ़कर ₹8.38 लाख करोड़ हो गया।
आईटी सेक्टर में वैश्विक मांग और डिजिटल सेवाओं की स्थिर ग्रोथ के चलते टीसीएस के शेयरों में मजबूती बनी रही।
वहीं ICICI Bank का बाजार पूंजीकरण ₹14,515.93 करोड़ बढ़कर ₹9.06 लाख करोड़ तक पहुंच गया।
विश्लेषकों के मुताबिक निजी बैंकों के मजबूत वित्तीय नतीजों और बेहतर लोन ग्रोथ ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।

एलआईसी, बजाज फाइनेंस और एलएंडटी में भी तेजी
Life Insurance Corporation of India यानी एलआईसी का मार्केट कैप ₹9,076.37 करोड़ बढ़कर ₹5.14 लाख करोड़ हो गया।
बीमा क्षेत्र में बढ़ती मांग और निवेश योजनाओं में सुधार का असर कंपनी के शेयरों पर दिखाई दिया।
वहीं Bajaj Finance की बाजार वैल्यू ₹3,797.83 करोड़ बढ़कर ₹5.70 लाख करोड़ हो गई।
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की दिग्गज कंपनी Larsen & Toubro के मार्केट कैप में भी ₹2,685.87 करोड़ की बढ़ोतरी हुई और यह ₹5.40 लाख करोड़ पर पहुंच गया।
एयरटेल निवेशकों को सबसे बड़ा नुकसान
जहां कुछ कंपनियों ने मजबूत बढ़त दर्ज की, वहीं टेलीकॉम सेक्टर की प्रमुख कंपनी Bharti Airtel को सबसे बड़ा झटका लगा।
कंपनी का मार्केट कैप ₹20,229.67 करोड़ घटकर ₹11.40 लाख करोड़ रह गया।
विश्लेषकों का मानना है कि प्रतिस्पर्धा, निवेश खर्च और बाजार में मुनाफावसूली के कारण एयरटेल के शेयर दबाव में रहे।
एचडीएफसी बैंक और एसबीआई भी दबाव में
भारत के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank का बाजार पूंजीकरण ₹2,094.35 करोड़ घटकर ₹11.79 लाख करोड़ पर आ गया।
हालांकि गिरावट सीमित रही, लेकिन बैंकिंग सेक्टर में निवेशकों का रुख सतर्क दिखाई दिया।
वहीं State Bank of India यानी एसबीआई का मार्केट कैप ₹12,784.4 करोड़ घटकर ₹8.76 लाख करोड़ रह गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की।
हिंदुस्तान यूनिलीवर की वैल्यूएशन में गिरावट
एफएमसीजी सेक्टर की दिग्गज कंपनी Hindustan Unilever का मार्केट कैप ₹16,212.18 करोड़ घटकर ₹5.17 लाख करोड़ रह गया।
उपभोक्ता मांग में धीमापन और ग्रामीण बाजारों में सीमित ग्रोथ को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।
बाजार में उतार-चढ़ाव की क्या है वजह?
विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले सप्ताह बाजार पर कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों का प्रभाव रहा।
इनमें प्रमुख हैं:
- कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
- अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता
- विदेशी निवेशकों की गतिविधियां
- वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंका
- कॉर्पोरेट कंपनियों के तिमाही नतीजे
इन सभी कारणों से बाजार में सेक्टर आधारित खरीदारी और बिकवाली देखने को मिली।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार फिलहाल स्थिरता और अनिश्चितता के मिश्रित दौर से गुजर रहा है।
ऊर्जा, बैंकिंग और आईटी सेक्टर में मजबूत कंपनियां अभी भी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं, जबकि उपभोक्ता और टेलीकॉम सेक्टर में दबाव देखा जा रहा है।
विशेषज्ञ लंबी अवधि के निवेशकों को मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं।
भारतीय बाजार का वैश्विक महत्व बढ़ा
हाल के वर्षों में भारतीय शेयर बाजार दुनिया के प्रमुख निवेश केंद्रों में शामिल हुआ है। विदेशी निवेशकों की लगातार दिलचस्पी और घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने बाजार को नई मजबूती दी है।
हालांकि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन भारत की तेज आर्थिक वृद्धि और कॉर्पोरेट सेक्टर का विस्तार निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।
फिलहाल पिछले सप्ताह के आंकड़े यह दिखाते हैं कि बाजार में अवसर और जोखिम दोनों मौजूद हैं, और निवेशकों को सतर्क रणनीति के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है।










