शशि थरूर ने खरगे से की अहम बैठक, कांग्रेस के भीतर चल रही असहजता पर चर्चा

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से संसद भवन में मुलाकात की। बैठक में पार्टी के भीतर मतभेद, सार्वजनिक बयानों की रणनीति पर चर्चा

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने संसद भवन में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। दोनों के बीच करीब आधे घंटे तक बातचीत हुई। बैठक में पार्टी के भीतर मतभेद, सार्वजनिक बयानों और आगामी चुनावों की रणनीति पर चर्चा हुई।

New Delhi: कांग्रेस पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही असहजता के बीच तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की है। यह बैठक संसद भवन में हुई और करीब आधे घंटे तक चली। इस मुलाकात को कांग्रेस के आंतरिक हालात के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। पार्टी के भीतर यह चर्चा लंबे समय से चल रही थी कि थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ गई है।

संसद भवन में आधे घंटे की बातचीत

संसद भवन में हुई इस बैठक के दौरान शशि थरूर ने मल्लिकार्जुन खरगे के सामने अपने विचार और चिंताएं रखीं। सूत्रों के मुताबिक यह मुलाकात औपचारिक नहीं बल्कि खुली बातचीत के तौर पर हुई। थरूर ने पार्टी के भीतर अपनी भूमिका, सार्वजनिक बयानों पर उठे सवाल और भविष्य की रणनीति को लेकर अपनी बात रखी। कांग्रेस नेतृत्व भी यह समझने की कोशिश कर रहा है कि मतभेद किस स्तर पर हैं और उन्हें कैसे सुलझाया जा सकता है।

राहुल गांधी से मिलने की भी मांग

बताया जा रहा है कि शशि थरूर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी मिलने के लिए समय मांगा था। उनका उद्देश्य पार्टी नेतृत्व से सीधे संवाद करना और गलतफहमियों को दूर करना बताया जा रहा है। कांग्रेस के भीतर यह माना जा रहा है कि आगामी चुनावों से पहले पार्टी किसी भी तरह के आंतरिक मतभेद को लंबा नहीं खींचना चाहती। इसी कारण थरूर की शिकायतों और नाराजगी को गंभीरता से सुना जा रहा है।

चुनाव से पहले नुकसान से बचने की कोशिश

कांग्रेस के लिए आने वाले चुनाव बेहद अहम माने जा रहे हैं। ऐसे में पार्टी यह नहीं चाहती कि वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी सार्वजनिक विवाद का रूप ले। शशि थरूर जैसे अनुभवी नेता का पार्टी से असहज होना कांग्रेस के लिए राजनीतिक नुकसान का कारण बन सकता है। यही वजह है कि नेतृत्व स्तर पर संवाद की पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कहां से शुरू हुआ मनमुटाव

कांग्रेस और शशि थरूर के रिश्तों में खटास की शुरुआत पिछले साल अप्रैल के बाद मानी जाती है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संकट से निपटने के तरीके की सार्वजनिक रूप से तारीफ की थी। उनका यह बयान कांग्रेस के कई नेताओं को पसंद नहीं आया। पार्टी के भीतर इसे नेतृत्व के रुख से अलग माना गया।

पीएम मोदी की तारीफ पर कांग्रेस की नाराजगी

थरूर की टिप्पणी के बाद कांग्रेस नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ नेताओं ने यहां तक कह दिया कि थरूर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का रास्ता बना रहे हैं। इस बयानबाजी के बाद पार्टी और थरूर के बीच दूरी और बढ़ती दिखी। थरूर ने हालांकि अपने बयान को राष्ट्रीय हित से जुड़ा बताया, लेकिन कांग्रेस के भीतर यह विवाद थम नहीं पाया।

नवंबर में बढ़ी तल्खी

इसके बाद नवंबर महीने में दो घटनाओं ने इस दूरी को और गहरा कर दिया। पहली घटना एक प्राइवेट इवेंट से जुड़ी थी, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाषण दे रहे थे। शशि थरूर उस कार्यक्रम में शामिल हुए और बाद में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री के भाषण की सराहना की।

भाषण पर की गई टिप्पणी बनी विवाद

शशि थरूर ने पोस्ट में लिखा कि यह भाषण एक economic outlook और cultural बदलाव का आह्वान था, जो देश को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। कांग्रेस के भीतर इस टिप्पणी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। पार्टी नेताओं ने सवाल उठाया कि एक वरिष्ठ कांग्रेस सांसद का इस तरह का बयान क्या पार्टी लाइन के अनुरूप है।

कांग्रेस नेताओं का पलटवार

कांग्रेस की सुप्रिया श्रीनेत और संदीप दीक्षित ने थरूर की टिप्पणी पर कड़ा जवाब दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री के भाषण को बकवास करार दिया और थरूर की सराहना पर सवाल उठाए। इसके बाद यह मामला सिर्फ व्यक्तिगत राय का नहीं रह गया, बल्कि पार्टी अनुशासन से जुड़ा मुद्दा बन गया।

आर्टिकल ने बढ़ाई परेशानी

नवंबर में ही दूसरी बड़ी घटना सामने आई, जब शशि थरूर का एक आर्टिकल चर्चा में आया। ‘Indian Politics Are a Family Business’ शीर्षक से लिखे गए इस लेख में उन्होंने परिवार आधारित राजनीति की आलोचना की थी। कांग्रेस जैसी पार्टी, जहां संगठन में परिवारों की भूमिका रही है, इस लेख से असहज नजर आई।

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