बहुत समय पहले की बात है, एक सुंदर और दयालु लड़की थी जिसका नाम सिंड्रेला था। बचपन में ही उसकी माँ गुजर गई थीं, और उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली थी। उसकी सौतेली माँ और दो सौतेली बहनें बहुत ही घमंडी और क्रूर थीं। वे सिंड्रेला से घर का सारा काम करवाती थीं, जैसे झाड़ू-पोछा और बर्तन साफ करना। उसे पहनने के लिए फटे-पुराने कपड़े देती थीं, फिर भी सिंड्रेला कभी शिकायत नहीं करती थी।
एक दिन, राजा ने अपने बेटे राजकुमार के लिए एक शाही दावत का आयोजन किया। इसमें राज्य की सभी कुंवारी लड़कियों को बुलाया गया ताकि राजकुमार अपनी दुल्हन चुन सके। सिंड्रेला की सौतेली माँ और बहनें अच्छे कपड़े पहनकर दावत में चली गईं, लेकिन उन्होंने सिंड्रेला को घर पर ही छोड़ दिया। सिंड्रेला बहुत दुखी होकर रोने लगी।
तभी वहाँ एक चमकती हुई परी प्रकट हुई। परी ने सिंड्रेला का दुख देखा और उसकी मदद करने का फैसला किया। परी ने अपनी जादुई छड़ी घुमाई और एक कद्दू को शानदार बग्घी में बदल दिया। फिर उसने चूहों को सफेद घोड़ों में बदल दिया। अंत में, परी ने सिंड्रेला के फटे कपड़ों को एक बेहद खूबसूरत नीले गाउन में बदल दिया और उसे पहनने के लिए काँच के सुंदर जूते दिए।
परी ने सिंड्रेला को चेतावनी दी कि जादू रात के ठीक 12 बजे खत्म हो जाएगा, इसलिए उसे उससे पहले घर वापस आना होगा। सिंड्रेला खुशी-खुशी महल गई। वहाँ राजकुमार ने उसे देखा और उस पर मोहित हो गया। राजकुमार ने पूरी रात केवल सिंड्रेला के साथ ही नृत्य किया।
तभी घड़ी में 12 बजने की आवाज आई। सिंड्रेला को परी की बात याद आई और वह घबराकर वहाँ से भागी। जल्दबाजी में सीढ़ियों से उतरते समय उसका एक काँच का जूता वहीं गिर गया, लेकिन उसके पास रुकने का समय नहीं था। जब तक वह घर पहुँची, जादू खत्म हो चुका था।
अगले दिन राजकुमार ने ऐलान किया कि वह उसी लड़की से शादी करेगा जिसके पैर में वह काँच का जूता सही आएगा। सिपाही जूता लेकर हर घर गए। सिंड्रेला की सौतेली बहनों ने जबरदस्ती जूता पहनने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह उनके पैर में नहीं आया।
आखिरकार, सिंड्रेला ने जूता पहनने की मांग की। जैसे ही उसने पैर आगे बढ़ाया, काँच का जूता उसके पैर में एकदम सही आ गया। यह देखकर सब हैरान रह गए। राजकुमार सिंड्रेला को पहचान गया और उसे सम्मान के साथ महल ले गया। दोनों ने शादी कर ली और हमेशा खुशी-खुशी रहने लगे।
सीख
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि इंसान को कठिन परिस्थितियों में भी अपनी अच्छाई और धैर्य नहीं खोना चाहिए। सिंड्रेला के साथ बहुत बुरा व्यवहार हुआ, लेकिन उसने कभी अपनी दयालुता नहीं छोड़ी। अंत में, सच्चाई और अच्छाई की ही जीत होती है। जो लोग विनम्र रहते हैं और दूसरों का बुरा नहीं सोचते, उन्हें जीवन में सफलता और खुशियाँ जरूर मिलती हैं। बाहरी सुंदरता से ज्यादा मन की सुंदरता मायने रखती है।













