जीवन में केवल पसीना बहाना ही काफी नहीं होता, बल्कि सही तकनीक और खुद को समय देना भी उतना ही जरूरी है। यह कहानी दो लकड़हारों के बीच की प्रतियोगिता की है, जो साबित करती है कि 'कठोर परिश्रम' (Hard Work) से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण 'बुद्धिमानी से किया गया परिश्रम' (Smart Work) है।
कहानी
एक बार एक लकड़ी के व्यापारी ने जंगल में लकड़ियाँ काटने के लिए दो लकड़हारों को काम पर रखा। एक का नाम था 'भोला' और दूसरे का नाम था 'चंदन'। भोला शारीरिक रूप से बहुत ताकतवर और मेहनती था, जबकि चंदन दुबला-पतला लेकिन बहुत समझदार था।
पहले दिन, दोनों ने पूरे जोश के साथ काम शुरू किया। भोला ने अपनी पूरी ताकत लगा दी और दिन खत्म होने तक उसने 10 पेड़ काट गिराए। चंदन ने भी अपनी समझदारी से काम किया और उसने भी 10 पेड़ काटे। मालिक ने दोनों की तारीफ की और कहा, 'बहुत अच्छे! अगर तुम दोनों ऐसे ही काम करते रहे, तो मैं तुम्हें बहुत अच्छा इनाम दूंगा।'
मालिक की बात सुनकर भोला ने सोचा, 'अगर मैं कल और ज्यादा मेहनत करूँ और ज्यादा समय तक काम करूँ, तो मैं चंदन से आगे निकल जाऊंगा और मुझे ज्यादा इनाम मिलेगा।'
अगले दिन, भोला सूरज निकलने से पहले ही जंगल पहुँच गया और पेड़ काटने लगा। उसने दोपहर का खाना भी जल्दी-जल्दी खाया ताकि समय बर्बाद न हो। वह बिना रुके कुल्हाड़ी चलाता रहा। दूसरी तरफ, चंदन अपने तय समय पर आया। उसने काम किया, लेकिन बीच-बीच में वह रुक जाता और आराम करता। शाम को जब मालिक ने लकड़ियाँ गिनीं, तो सब हैरान रह गए। चंदन ने फिर से 10 पेड़ काटे थे, लेकिन इतनी मेहनत के बाद भी भोला केवल 8 पेड़ ही काट पाया था।
भोला को बहुत गुस्सा आया। उसने सोचा, 'शायद मेरी ताकत में कमी रह गई।' तीसरे दिन उसने ठान लिया कि वह आज कोई कसर नहीं छोड़ेगा। उसने अपनी नींद कम कर दी, खाने की छुट्टी भी नहीं ली और पागलों की तरह पेड़ पर कुल्हाड़ी चलाता रहा। पसीने से उसका बुरा हाल था, हाथ में छाले पड़ गए थे, लेकिन वह रुका नहीं।
शाम को जब परिणाम आया, तो भोला के पैरों तले जमीन खिसक गई। आज वह केवल 5 पेड़ ही काट पाया था। जबकि चंदन ने, जो बीच-बीच में आराम कर रहा था और सीटी बजाते हुए काम कर रहा था, आज फिर से 10 पेड़ काटे थे।
भोला हताश होकर जमीन पर बैठ गया। उसने चंदन से पूछा, 'भाई, यह कैसे मुमकिन है? मैं तुमसे ज्यादा समय तक काम करता हूँ, तुमसे ज्यादा ताकत लगाता हूँ, तुमसे कम आराम करता हूँ। फिर भी तुम मुझसे ज्यादा पेड़ कैसे काट लेते हो? क्या तुम कोई जादू जानते हो?'
चंदन मुस्कुराया और बड़े प्यार से बोला, 'नहीं मित्र, कोई जादू नहीं है। बात सिर्फ इतनी है कि जब भी मैं पेड़ काटने के बाद 15 मिनट का आराम लेता हूँ, तो उस समय मैं सिर्फ सुस्ताता नहीं हूँ। मैं उस समय अपनी 'कुल्हाड़ी की धार' तेज करता हूँ।
चंदन ने आगे समझाया, 'तुम पिछले तीन दिनों से लगातार पेड़ काट रहे हो, लेकिन तुमने एक बार भी अपनी कुल्हाड़ी की धार तेज नहीं की। तुम्हारी कुल्हाड़ी की धार कुंद (Blunt) हो चुकी है, इसलिए तुम्हें अब पेड़ काटने में दोगुनी ताकत और दोगुना समय लग रहा है। मैं अपनी कुल्हाड़ी को तेज रखता हूँ, इसलिए मुझे कम मेहनत में ज्यादा परिणाम मिलता है।'
भोला को अपनी गलती समझ आ गई। उसे पता चल गया कि केवल गधे की तरह मेहनत करना ही सफलता नहीं है, बल्कि अपनी क्षमता और अपने औजारों को बेहतर बनाना ही असली सफलता है।
सीख
यह कहानी हमें सिखाती है कि कड़ी मेहनत बहुत जरूरी है, लेकिन उसके साथ-साथ हमें 'रुकना' और अपनी 'कुल्हाड़ी की धार' तेज करना भी आना चाहिए। यहाँ कुल्हाड़ी का मतलब हमारे 'कौशल' (Skills), 'ज्ञान' (Knowledge) और 'मानसिक शांति' से है। अगर हम खुद को अपडेट नहीं करेंगे और लगातार बिना सोचे-समझे काम करते रहेंगे, तो हमारी मेहनत बेकार चली जाएगी। इसलिए, 'स्मार्ट वर्क' करें।













