SIR विवाद के बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी और कांग्रेस से माफी की मांग की। चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को कहा कि SIR से जुड़े फैसले तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे।
गुवाहाटी: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक विवाद के बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा है। सरमा ने कहा कि चुनाव आयोग के 26 सितंबर के स्पष्टीकरण के बाद राहुल गांधी और कांग्रेस को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों के बीच भ्रम पैदा किया। चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को हुई पूर्ण आयोग की बैठक के बाद कहा कि SIR से जुड़े फैसले तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने यह भी बताया कि SIR से जुड़े नोटिस पाने वाले मतदाताओं की सुविधा के लिए कई प्रक्रियात्मक बदलाव किए गए हैं।
हिमंता सरमा ने राहुल गांधी से माफी की मांग की
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 26 सितंबर को राहुल गांधी की SIR को लेकर की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एकतरफा फैसले लिए, जबकि आयोग ने अपने बयान में कहा कि SIR से संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
सरमा ने राहुल गांधी पर चुनाव हारने के बाद संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता को लोगों के बीच भ्रम पैदा करने के अपने आधार के बारे में जवाब देना चाहिए।
यह मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का राजनीतिक बयान है। राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से SIR और निर्वाचन आयोग को लेकर अलग-अलग आपत्तियां लगातार सामने आती रही हैं।
राहुल गांधी ने CEC ज्ञानेश कुमार पर क्या आरोप लगाया?
SIR विवाद के बीच राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राहुल गांधी ने एक पूर्व केरल मुख्य सचिव जीजी थॉमसन के उस दावे का हवाला दिया, जिसमें थॉमसन ने कहा था कि 2016 में एक विमान यात्रा के दौरान ज्ञानेश कुमार ने उन्हें 2019 का लोकसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ने का सुझाव दिया था। थॉमसन ने कहा कि उन्होंने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया।
राहुल गांधी ने इस दावे के आधार पर आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार को पहले भाजपा के लिए उम्मीदवार तलाशने में इस्तेमाल किया गया और बाद में उन्हें चुनाव आयोग का प्रमुख बनाया गया। उन्होंने चुनाव में “मैच-फिक्सिंग” का आरोप भी लगाया।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टिंग में जीजी थॉमसन का दावा राहुल गांधी के इस निष्कर्ष को स्वयं प्रमाणित नहीं करता कि ज्ञानेश कुमार ने बाद में चुनावों में हस्तक्षेप किया। इसलिए दोनों बातों को अलग-अलग रखना जरूरी है।
चुनाव आयोग ने SIR पर क्या कहा?
26 सितंबर को निर्वाचन सदन, नई दिल्ली में दोपहर 3 बजे पूर्ण चुनाव आयोग की बैठक हुई। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ निर्वाचन आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी शामिल हुए।
बैठक के बाद आयोग ने कहा कि देशभर में SIR से जुड़े फैसले आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने विशेष रूप से 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जारी SIR आदेश का उल्लेख किया और कहा कि उसे भी तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी मिली थी। आयोग के मुताबिक, इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के आदेश में बरकरार रखा था।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में मतदाता पंजीकरण से जुड़े बदलावों और SIR प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों के बीच कुछ भ्रम पैदा हुआ था।
मतदाताओं की सुविधा के लिए क्या बदलाव किए गए?
आयोग की 26 सितंबर की बैठक में SIR प्रक्रिया के दौरान नोटिस पाने वाले मतदाताओं की परेशानियों को कम करने के लिए कई फैसले किए गए।
आयोग के आधिकारिक बयान के अनुसार, जिन लोगों को ‘अनमैप्ड’ या ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के आधार पर नोटिस दिया गया है, उनके घर बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO दस्तावेज लेने के लिए जाएंगे। इन दस्तावेजों को ECINet पर अपलोड किया जाएगा और संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी यानी ERO उस पर निर्णय लेंगे।
आयोग ने कहा कि ऐसे मतदाताओं को सामान्य तौर पर ERO या AERO कार्यालय में सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी। केवल असाधारण परिस्थितियों में, ERO के निर्णय के अनुसार सुनवाई आयोजित की जाएगी और इसे प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन रखा जाएगा।
पूर्ण आयोग की बैठक में लिए गए नौ फैसले
26 सितंबर की बैठक में आयोग ने कुल नौ फैसलों की घोषणा की। इनमें से कई निर्णय मौजूदा SIR प्रक्रिया में मतदाताओं को हो रही दिक्कतों को कम करने से संबंधित थे।
इन फैसलों में नोटिस पाने वाले मतदाताओं से दस्तावेज एकत्र करने के लिए BLO को उनके घर भेजना, दस्तावेजों को ECINet पर अपलोड करना और सुनवाई की प्रक्रिया को आसान बनाना शामिल है। आयोग ने अपने बयान में SIR के आदेशों को सर्वसम्मत बताते हुए आंतरिक मतभेदों को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी स्पष्टीकरण दिया।
हालांकि, कुछ विपक्षी नेताओं और दलों ने आयोग के स्पष्टीकरण पर सवाल उठाए हैं। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पूछा कि आयोग के किन फैसलों को सर्वसम्मत कहा जा रहा है और निर्णय प्रक्रिया को लेकर अतिरिक्त सवाल उठाए।
आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्टों से शुरू हुआ विवाद
SIR को लेकर विवाद के बीच आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्टें भी सामने आई थीं। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, निर्वाचन आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी ने अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच आयोग के कुछ फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। इन मुद्दों में मतदाता पंजीकरण और नाम हटाने, अपीलों तथा मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रियाएं शामिल थीं।
हालांकि, चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट किया कि तीन सदस्यीय आयोग में किसी मुद्दे पर अलग-अलग विचार होना संभव है, लेकिन अंतिम आयोगीय निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए। 26 सितंबर के बयान में आयोग ने इसी स्थिति को दोहराया।
BJP ने भी कांग्रेस के आरोपों का किया विरोध
चुनाव आयोग के बयान के बाद भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों का विरोध किया। भाजपा नेताओं ने कहा कि आयोग की ओर से SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मत बताए जाने से विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठते हैं।
भाजपा ने राहुल गांधी के बयानों को राजनीतिक आरोप बताया और कहा कि कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रही है। नितिन नवीन ने भी SIR विवाद को लेकर कांग्रेस पर “गढ़े हुए झूठ” के आधार पर आरोप लगाने का आरोप लगाया था।
वहीं, विपक्षी दलों ने आयोग की कार्यप्रणाली और SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटने की आशंकाओं को लेकर सवाल उठाना जारी रखा है। विपक्षी दलों की बैठक 30 सितंबर को होने की संभावना भी रिपोर्टों में सामने आई है।
SIR विवाद में आगे क्या?
SIR को लेकर राजनीतिक बहस अब चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से आगे बढ़कर संस्थागत पारदर्शिता के सवालों तक पहुंच गई है।
एक तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि SIR से संबंधित उसके अंतिम फैसले तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं और मतदाताओं की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल आयोग की कार्यप्रणाली तथा कुछ निर्णयों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
इसी बीच हिमंता बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी और कांग्रेस से माफी की मांग की है। राहुल गांधी ने हालांकि आयोग और उसके प्रमुख को लेकर अपने आरोप वापस लेने का संकेत नहीं दिया है। इसलिए SIR विवाद में राजनीतिक बयानबाजी आगे भी जारी रहने की संभावना है।












