Smallcap Funds ने अपनी निवेश रणनीति बदली है। अब ये बेहद छोटे और जोखिम भरे शेयरों से दूरी बनाकर मजबूत स्मॉलकैप कंपनियों में निवेश कर रहे हैं। इससे बाजार उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।
Smallcap Funds: शेयर बाजार में स्मॉलकैप का नाम आते ही ज्यादातर निवेशकों के दिमाग में सबसे पहले जोखिम, तेज उतार चढ़ाव और अचानक गिरावट की तस्वीर बनती है। लंबे समय तक यह धारणा बनी रही कि स्मॉलकैप फंड्स बहुत छोटे, अनजान और ज्यादा जोखिम वाले शेयरों में पैसा लगाते हैं। लेकिन अब हकीकत इससे काफी अलग नजर आ रही है।
हालिया आंकड़े बताते हैं कि Smallcap Funds ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब इन फंड्स का फोकस बेहद छोटे शेयरों की बजाय अपेक्षाकृत मजबूत और स्थापित स्मॉलकैप कंपनियों पर है। यही वजह है कि मौजूदा बाजार उतार चढ़ाव के बावजूद स्मॉलकैप फंड्स में निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।
Ventura की स्टडी ने खोली असल तस्वीर
Ventura की एक ताजा स्टडी के मुताबिक, स्मॉलकैप फंड्स का करीब 83 प्रतिशत निवेश टॉप 750 कंपनियों में किया गया है। इसका मतलब साफ है कि फंड मैनेजर 1000वीं रैंक से नीचे आने वाले बेहद छोटे और ज्यादा जोखिम वाले शेयरों से दूरी बना रहे हैं।
आम धारणा के उलट, स्मॉलकैप फंड्स अब सिर्फ नाम के स्मॉलकैप नहीं रह गए हैं। इनमें से ज्यादातर निवेश उन कंपनियों में है जो भले ही स्मॉलकैप कैटेगरी में आती हों, लेकिन बिजनेस, बैलेंस शीट और ग्रोथ के मामले में काफी मजबूत हैं। इससे निवेश का जोखिम सीमित होता है और रिटर्न की संभावनाएं भी बेहतर रहती हैं।
251 से 750 रैंक वाले शेयर क्यों बने फंड्स की पहली पसंद
Smallcap Funds का सबसे बड़ा हिस्सा उन कंपनियों में निवेश किया गया है, जिनकी मार्केट कैप रैंकिंग 251 से 750 के बीच है। यह सेगमेंट इन फंड्स की असली रीढ़ माना जा रहा है।
इन कंपनियों की खासियत यह है कि ये न तो बहुत बड़ी हैं और न ही बहुत छोटी। इनके पास ग्रोथ की अच्छी संभावनाएं होती हैं, मैनेजमेंट अपेक्षाकृत मजबूत होता है और बिजनेस मॉडल भी समझने लायक होता है। यही वजह है कि फंड मैनेजर इन्हें लॉन्ग टर्म निवेश के लिए ज्यादा सुरक्षित मानते हैं।
इसके अलावा, कुछ हिस्सा 751 से 1000 रैंक वाली कंपनियों में भी लगाया गया है, लेकिन यह निवेश सीमित रखा गया है ताकि जोखिम संतुलन में रहे।
लार्ज और मिडकैप में भी दिख रहा बैलेंस
एक और अहम बात यह है कि स्मॉलकैप फंड्स पूरी तरह सिर्फ स्मॉलकैप शेयरों पर निर्भर नहीं हैं। पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखने के लिए फंड मैनेजर कुछ हिस्सा लार्जकैप और मिडकैप शेयरों में भी निवेश कर रहे हैं।
इसका मकसद साफ है। जब बाजार में अचानक गिरावट आती है, तो लार्ज और मिडकैप शेयर पोर्टफोलियो को संभालने का काम करते हैं। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर तुरंत नकदी उपलब्ध कराने के लिए कुछ हिस्सा कैश और डेट इंस्ट्रूमेंट्स में भी रखा जाता है।
स्मॉलकैप कंपनियां अब पहले जैसी छोटी नहीं रहीं
पिछले कुछ सालों में कई स्मॉलकैप कंपनियों का आकार तेजी से बढ़ा है। जो कंपनियां कभी बहुत छोटी मानी जाती थीं, उनका मार्केट कैप अब कई गुना हो चुका है।
इस बदलाव ने स्मॉलकैप सेगमेंट की परिभाषा ही बदल दी है। आज कई ऐसी कंपनियां हैं, जो नाम से भले ही स्मॉलकैप हों, लेकिन उनका बिजनेस स्केल, रेवेन्यू और मार्केट प्रेजेंस उन्हें मजबूत बनाता है। यही कारण है कि फंड मैनेजर इन्हें लंबे समय के निवेश के लिए उपयुक्त मान रहे हैं।
ऐसे सेक्टर जहां स्मॉलकैप की पकड़ मजबूत
Smallcap Funds का एक बड़ा फायदा यह है कि ये निवेशकों को ऐसे सेक्टरों में निवेश का मौका देते हैं, जो लार्जकैप या मिडकैप में आसानी से उपलब्ध नहीं होते।
बिजनेस सर्विसेज, मीडिया, एंटरटेनमेंट और कुछ खास इंडस्ट्रियल सेगमेंट में कई अहम कंपनियां स्मॉलकैप कैटेगरी में आती हैं। इन सेक्टरों में ग्रोथ की संभावनाएं ज्यादा होती हैं, लेकिन लार्जकैप में इनका प्रतिनिधित्व कम देखने को मिलता है।
यही वजह है कि स्मॉलकैप फंड्स को पोर्टफोलियो में अलग और खास जगह दी जाती है।
स्मॉलकैप को लेकर निवेशकों की गलत धारणा
दिलचस्प बात यह है कि कई जानी पहचानी कंपनियां, जिन्हें आम निवेशक मिडकैप या उससे भी बड़ी समझते हैं, असल में स्मॉलकैप की कैटेगरी में आती हैं।
इस गलतफहमी के चलते स्मॉलकैप को अक्सर ज्यादा जोखिम वाला समझ लिया जाता है। जबकि फंड मैनेजर इन्हें पूरी तरह स्मॉलकैप मानते हुए ही निवेश करते हैं और हर कंपनी का फंडामेंटल, ग्रोथ और वैल्यूएशन देखकर फैसला लेते हैं।
कमजोर प्रदर्शन के बावजूद निवेशकों का भरोसा
हाल के महीनों में Smallcap Funds का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। बाजार में करेक्शन और उतार चढ़ाव के चलते रिटर्न पर दबाव जरूर आया है। इसके बावजूद निवेशकों ने इन फंड्स से पैसा निकालने के बजाय और निवेश किया है।
यह संकेत देता है कि अब निवेशक छोटे समय के उतार चढ़ाव से ज्यादा लंबी अवधि की ग्रोथ पर भरोसा कर रहे हैं। SIP के जरिए नियमित निवेश भी इसी सोच को मजबूत करता है।
लंबी अवधि में क्यों जरूरी हैं स्मॉलकैप
Ventura की स्टडी के मुताबिक, स्मॉलकैप शेयरों में जोखिम जरूर होता है, लेकिन समय के साथ इस सेगमेंट में अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ी है। कंपनियों का साइज बढ़ा है, कॉर्पोरेट गवर्नेंस में सुधार हुआ है और निवेश के मौके भी पहले से ज्यादा हुए हैं।
लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न पाने के लिए पोर्टफोलियो में स्मॉलकैप का हिस्सा होना जरूरी माना जा रहा है। हालांकि, इसमें निवेश करते समय धैर्य और सही फंड का चुनाव बेहद जरूरी है।












