संघर्ष से सफलता तक: परचून दुकानदार की बेटी ने तीसरी बार पास की UPSC, टॉप-10 में नाम

संघर्ष से सफलता तक: परचून दुकानदार की बेटी ने तीसरी बार पास की UPSC, टॉप-10 में नाम

उत्तर प्रदेश के शामली की आस्था जैन ने लगातार तीसरी बार UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करते हुए इस बार ऑल इंडिया रैंक 9 हासिल की है। पहले दो प्रयासों में भी सफल रहने के बाद उन्होंने बेहतर रैंक के लिए प्रयास जारी रखा और आखिरकार टॉप-10 में जगह बनाकर बड़ी उपलब्धि हासिल की।

UPSC topper Aastha Jain: उत्तर प्रदेश के शामली जिले की रहने वाली आस्था जैन ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 9 हासिल कर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। यह उनका तीसरा प्रयास था और इससे पहले भी वह दो बार यूपीएससी परीक्षा पास कर चुकी थीं। वर्तमान में वह हैदराबाद में आईपीएस ट्रेनिंग कर रही हैं। बेहतर रैंक हासिल करने के लक्ष्य के साथ उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और लगातार मेहनत के दम पर इस बार टॉप-10 में जगह बनाकर परिवार और जिले का नाम रोशन कर दिया।

तीसरे प्रयास में टॉप-10 में बनाई जगह

आस्था जैन इससे पहले भी दो बार UPSC परीक्षा पास कर चुकी हैं। अपने पहले प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 131 हासिल की थी, जबकि दूसरे प्रयास में उनकी रैंक 186 रही थी। इन दोनों सफलताओं के बाद भी उन्होंने बेहतर रैंक हासिल करने का लक्ष्य बनाए रखा।

लगातार मेहनत और धैर्य के साथ तैयारी जारी रखते हुए तीसरे प्रयास में उन्होंने बड़ी उपलब्धि हासिल की और देशभर में 9वां स्थान प्राप्त किया। उनकी इस सफलता से शामली जिले में खुशी और गर्व का माहौल है।

आईपीएस ट्रेनिंग के दौरान आया रिजल्ट

आस्था जैन फिलहाल हैदराबाद में आईपीएस ट्रेनिंग कर रही हैं। इसी दौरान जब UPSC सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ तो उनके परिवार और रिश्तेदारों में खुशी की लहर दौड़ गई।

आस्था के पिता अजय कुमार जैन, जो परचून की दुकान चलाते हैं, ने बताया कि बेटी की इस सफलता से पूरा परिवार बेहद खुश है। रिजल्ट आने के बाद से लगातार रिश्तेदारों और परिचितों के फोन आ रहे हैं और सभी उन्हें बधाई दे रहे हैं।

बचपन से था डीएम बनने का सपना

आस्था जैन की मां ममता जैन के अनुसार उनकी बेटी बचपन से ही प्रशासनिक सेवा में जाने और डीएम बनने का सपना देखती थी। परिवार ने हमेशा उसकी पढ़ाई को प्राथमिकता दी और उसे आगे बढ़ने के लिए पूरा समर्थन दिया।

उन्होंने बताया कि उनके चार बच्चों में तीन बेटियां और एक बेटा है। परिवार ने बेटियों की पढ़ाई को उतना ही महत्व दिया जितना बेटे की शिक्षा को। उनका मानना है कि अगर बच्चों को सही शिक्षा और अवसर मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं।

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