Somvati Amavasya 2026 का व्रत 13 जुलाई, सोमवार को रखा जाएगा। पंचांग गणना के अनुसार अमावस्या तिथि सोमवार को होने से यह व्रत शास्त्रसम्मत माना गया है। इस दिन व्रत, पूजा, दान और शिव-पार्वती आराधना का विशेष महत्व बताया गया है।
Somvati Amavasya 2026: सोमवती अमावस्या 2026 को लेकर कई लोगों के मन में तिथि को लेकर भ्रम बना हुआ है। पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 13 जुलाई, सोमवार से शुरू होकर 14 जुलाई तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार को अमावस्या लगने के कारण इसी दिन व्रत रखना शुभ और शास्त्रसम्मत माना गया है।
पंचांग के अनुसार कब से कब तक रहेगी अमावस्या?

पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 13 जुलाई 2026, सोमवार को सुबह 6:08 बजे शुरू होगी और 14 जुलाई 2026, मंगलवार को दोपहर 3:14 बजे तक रहेगी। चूंकि अमावस्या तिथि सोमवार के दिन ही लग रही है, इसलिए इसे सोमवती अमावस्या माना गया है। धर्मशास्त्रों के अनुसार यदि अमावस्या सूर्यास्त से पहले प्रारंभ हो जाए तो उसी दिन सोमवती अमावस्या का व्रत करना उचित माना जाता है। यही कारण है कि धार्मिक विशेषज्ञ 13 जुलाई को व्रत रखने की सलाह दे रहे हैं।
क्यों माना जाता है सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व?
हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या को अत्यंत शुभ और पुण्यदायी तिथि माना गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने, व्रत रखने तथा पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करने से सुख-समृद्धि, सौभाग्य और परिवार में खुशहाली आती है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित श्रद्धालु भी मनचाहा जीवनसाथी और जीवन में सफलता की कामना के लिए इस दिन पूजा-अर्चना करते हैं।
इस दिन क्या करना शुभ माना जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या के दिन सुबह स्नान करके भगवान शिव, माता पार्वती और पीपल के वृक्ष की पूजा करनी चाहिए। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़ या अन्य सामग्रियों का दान करना भी शुभ माना जाता है। इसके अलावा पितरों की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान का भी विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलने और परिवार पर पूर्वजों का आशीर्वाद बना रहने की मान्यता है।
तिथि को लेकर भ्रम क्यों है?
इस वर्ष अमावस्या तिथि दो दिनों तक रहने के कारण कई पंचांगों में सोमवती अमावस्या का अलग-अलग उल्लेख देखने को मिल रहा है। हालांकि धार्मिक विद्वानों का कहना है कि व्रत के लिए तिथि का निर्णय वार और शास्त्रीय नियमों के आधार पर किया जाता है। इसलिए सोमवार को अमावस्या प्रारंभ होने से 13 जुलाई को ही सोमवती अमावस्या का व्रत करना शास्त्रसम्मत माना गया है, जबकि 14 जुलाई को अमावस्या तिथि के दौरान स्नान, दान और पितृ कर्म किए जा सकते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया सोमवती अमावस्या का व्रत जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सौभाग्य लाने वाला माना जाता है। हालांकि विभिन्न क्षेत्रों की परंपराओं और पंचांगों में मतभेद संभव हैं, इसलिए श्रद्धालु अपने स्थानीय पुरोहित या मान्य पंचांग की सलाह भी ले सकते हैं।








