सोनीपत में नाबालिग से रेप और फर्जी शादी के बाद ससुराल में बंधक बनाकर अमानवीय यातनाएं दी गईं। जातिगत प्रताड़ना झेलने के बाद पीड़िता जान बचाकर भागी और पुलिस को शिकायत दी। अब उसे आरोपियों की गिरफ्तारी और न्याय का इंतजार है।
Haryana: सोनीपत सिविल लाइन थाना पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर और पीड़िता के बयानों से जो कहानी निकलकर आई है, वह समाज में महिलाओं की सुरक्षा और प्रेम संबंधों की आड़ में हो रहे अपराधों की पोल खोलती है। इस पूरी घटना को हम विस्तार से समझते हैं।
स्कूल की दोस्ती
इस खौफनाक सफर की शुरुआत सितंबर 2023 में हुई थी। पीड़िता उस समय स्कूल में पढ़ती थी और नाबालिग थी। उसकी मुलाकात कुमासपुर गांव के रहने वाले एक युवक से हुई। धीरे-धीरे बातों का सिलसिला शुरू हुआ और यह जान-पहचान दोस्ती में बदल गई। युवक ने बड़ी चालाकी से लड़की को अपने विश्वास में ले लिया।
अक्टूबर 2024 में युवक ने लड़की को मिलने के बहाने बुलाया। वह उसे सोनीपत शहर में जुडियो मॉल के पास स्थित एक बैंक के ऊपर बने कमरे में ले गया। यह कमरा किसी होटल जैसा था। आरोप है कि वहां युवक ने नाबालिग के साथ जबरदस्ती (दुष्कर्म) की। जब डरी-सहमी लड़की ने इसका विरोध किया और अपने माता-पिता को बताने की बात कही, तो युवक ने उसे शादी का झांसा दिया। उसने डरा-धमकाकर उसे चुप करा दिया और वादा किया कि वह उससे शादी करेगा और हमेशा खुश रखेगा। डर और बदनामी के भय से लड़की चुप रह गई।
लिव-इन कागजों के जाल में फंसाई गई युवती
युवक की बातों में आकर 24 जनवरी 2025 को युवती अपना घर छोड़कर उसके साथ चली गई। दोनों ने कथित तौर पर शादी कर ली। युवक उसे कोर्ट ले गया और कुछ दस्तावेजों पर साइन करवाए। पीड़िता को लगा कि यह उनकी शादी के कागज हैं, लेकिन बाद में वकील और लड़के ने खुलासा किया कि यह शादी के नहीं बल्कि 'लिव-इन रिलेशनशिप' के कागज थे।
वकील और लड़के ने मिलकर उसे डराया कि अगर उसने मुंह खोला या पुलिस के पास गई, तो इन कागजों के आधार पर वह खुद ही कानूनी पचड़े में फंस जाएगी। इस तरह कानून का डर दिखाकर उसे मानसिक रूप से गुलाम बना लिया गया। घर से भागने के बाद वे भिवानी जिले के गांव फोखरवास में युवक की बहन के घर जाकर रहने लगे।
ससुराल में नरक जैसी जिंदगी

भिवानी में कुछ दिन रहने के बाद जब वे सोनीपत के गांव कुमासपुर (ससुराल) आए, तो पीड़िता की जिंदगी पूरी तरह नरक बन गई। वहां उसे घर के अंदर बंधक बना लिया गया। उसे घर से बाहर निकलने की इजाजत नहीं थी।
ससुराल वालों का व्यवहार बेहद अमानवीय था। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसकी ननदें उसे लोहे की फूंकनी (चूल्हे में हवा फूंकने वाला पाइप) से बुरी तरह पीटती थीं। इतना ही नहीं, एक बार उसे जान से मारने की नीयत से बिजली की तार (लीड) से उसका गला घोटने की कोशिश भी की गई।
शारीरिक मार-पिटाई के साथ-साथ उसे मानसिक रूप से तोड़ने के लिए उसकी जाति को निशाना बनाया गया। ससुराल वाले उसे 'अछूत' कहते थे और ताने मारते थे कि उसे 'नौकरानी' की तरह रखा जाएगा। ताकि वह भविष्य में कभी वहां से भाग न सके या कोई सरकारी मदद न ले सके, ससुराल वालों ने उसके आधार कार्ड, पढ़ाई के सर्टिफिकेट और अन्य सभी जरूरी दस्तावेज घर के चूल्हे में जला दिए।
जान बचाकर भागी
जुल्म की इंतहा होने पर पीड़िता ने वहां से भागने की ठानी। 6 दिसंबर को मौका पाकर वह किसी तरह ससुराल की कैद से भाग निकली। बदहवास हालत में वह सड़क पर पहुंची और वहां से गुजर रहे एक अनजान राहगीर से मदद मांगी। उसने राहगीर का फोन लेकर पुलिस के हेल्पलाइन नंबर 'डायल 112' पर कॉल किया।
सूचना मिलते ही बहालगढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची और युवती को रेस्क्यू किया। पुलिस ने जब उसकी आपबीती सुनी और शुरुआती जांच की, तो पता चला कि जब उसके साथ पहली बार रेप हुआ था, तब वह नाबालिग थी। यह मामला बेहद गंभीर था, इसलिए इसे सिविल लाइन थाना क्षेत्र (जहां रेप की पहली घटना हुई) में ट्रांसफर किया गया।
पुलिस कार्रवाई
सोनीपत पुलिस ने पीड़िता के बयान और मेडिकल जांच के आधार पर तुरंत सख्त एक्शन लिया है। चूँकि घटना के वक्त लड़की नाबालिग थी और वह अनुसूचित जाति (SC) से संबंध रखती है, इसलिए पुलिस ने आरोपी पति और उसके परिवार वालों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दुष्कर्म (धारा 64), गलत तरीके से बंधक बनाने (धारा 127-2), मारपीट (धारा 115-2) और जान से मारने की धमकी (धारा 351-3) का केस बनाया है।
इसके अलावा, नाबालिग होने के कारण पॉक्सो एक्ट की धारा 4 और जातिगत भेदभाव के चलते SC/ST एक्ट की धाराएं लगाई गई हैं, जो आरोपियों को जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने और जाति के आधार पर प्रताड़ित करने के लिए दंडित करती हैं। फिलहाल पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास कर रही है।











