ब्रिटेन में सोशल मीडिया के जरिए अवैध और अनियमित स्पर्म डोनेशन सेवाओं का खुलासा हुआ है। जांच में महिलाओं के शोषण, स्वास्थ्य जोखिम और गैरकानूनी गतिविधियों की पुष्टि हुई है। नियामक संस्थाओं ने ऐसे प्लेटफॉर्म से बचने की चेतावनी दी है।
लन्दन: ब्रिटेन में सामने आई एक जांच में यह खुलासा हुआ है कि सोशल मीडिया और अनऑफिशियल वेबसाइट्स के जरिए अवैध और अनियंत्रित (unregulated) स्पर्म डोनेशन का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। यह नेटवर्क उन महिलाओं को निशाना बना रहा है जो मां बनने के लिए संघर्ष कर रही हैं और महंगे फर्टिलिटी ट्रीटमेंट तक पहुंच नहीं रखतीं।
जांच में सामने आया कि कुछ पुरुष सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर खुद को “डोनर” बताकर महिलाओं को स्पर्म सैंपल ऑफर कर रहे हैं, जबकि कई मामलों में सेक्स के लिए दबाव, पैसे की मांग और गलत व्यवहार जैसी गंभीर शिकायतें भी सामने आई हैं।
“टिंडर फॉर स्पर्म” जैसे प्लेटफॉर्म्स का बढ़ता उपयोग
रिपोर्ट के अनुसार, कई अनऑफिशियल वेबसाइट्स और सोशल मीडिया ग्रुप्स ऐसे प्लेटफॉर्म की तरह काम कर रहे हैं जिन्हें “टिंडर फॉर स्पर्म” जैसे नामों से भी जाना जाता है। इन प्लेटफॉर्म्स पर लोग अपने शारीरिक गुणों के आधार पर डोनर चुन सकते हैं, जैसे आंखों का रंग, बालों का रंग आदि।
इन ग्रुप्स में हजारों-लाखों सदस्य जुड़े हुए हैं और कई मामलों में यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी मेडिकल जांच, कानूनी निगरानी या स्वास्थ्य सुरक्षा के की जा रही है।
बीबीसी जांच में चौंकाने वाला खुलासा
एक बीबीसी वेल्स की जांच में यह सामने आया कि पत्रकारों ने एक ऑनलाइन डोनर से संपर्क कर £100 में अगले दिन डिलीवरी वाला स्पर्म सैंपल प्राप्त किया। यह सैंपल एक साधारण पैकेज में भेजा गया था, जिसमें आइस पैक की जगह जमी हुई टमाटर प्यूरी का इस्तेमाल किया गया था।

मेडिकल जांच में पाया गया कि प्राप्त सैंपल में मौजूद स्पर्म सेल्स मृत थे, जिससे इस तरह की अनियंत्रित सेवाओं की विश्वसनीयता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
महिलाओं के शोषण और जबरदस्ती के आरोप
जांच में यह भी सामने आया कि कई पुरुष डोनर खुद को “नेचुरल इंसिमिनेशन” के नाम पर पेश करते हैं और महिलाओं पर शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डालते हैं। कई महिलाओं ने शिकायत की कि उन्हें सेक्स के लिए मजबूर करने या निजी तस्वीरें मांगने जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ा।
ब्रिटेन के फर्टिलिटी रेगुलेटर (HFEA) ने चेतावनी दी है कि ऐसी स्थिति में महिलाएं “प्रेडेटरी डोनर्स” के शोषण का शिकार हो सकती हैं।
अवैध डोनेशन और कानून की स्थिति
ब्रिटेन में मानव निषेचन और भ्रूण विज्ञान अधिनियम (HFE Act) के तहत स्पर्म या एग्स की प्रोसेसिंग, स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन केवल लाइसेंस प्राप्त क्लिनिक के माध्यम से ही वैध है।
अनियंत्रित डोनेशन को कानून के बाहर माना जाता है और इससे जुड़े लोग गंभीर कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। हालांकि, जो महिलाएं इस तरह के डोनर का उपयोग करती हैं, वे सीधे तौर पर अपराधी नहीं मानी जातीं, लेकिन जोखिम उनके लिए काफी अधिक होता है।
सोशल मीडिया कंपनियों की भूमिका पर सवाल
जांच में यह भी सवाल उठाया गया है कि फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ऐसे ग्रुप्स को कैसे अनुमति दे रहे हैं। नियामक संस्थाओं का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर चल रहे ग्रुप्स कई बार स्थानीय कानूनों का उल्लंघन करते हैं, फिर भी पूरी तरह बंद नहीं किए जाते।
मेटा (Meta) ने जवाब में कहा है कि वह ऐसी गतिविधियों की रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई करता है और अवैध कंटेंट को हटाने की प्रक्रिया अपनाता है, लेकिन नियामकों का मानना है कि यह पर्याप्त नहीं है।
इसके अलावा, कई मामलों में डोनर अपनी पहचान और स्वास्थ्य रिकॉर्ड छिपाते हैं, जिससे भविष्य में गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
बढ़ते बाजार में “कमर्शियल डोनेशन” का ट्रेंड
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुछ डोनर इस प्रक्रिया को एक व्यवसाय की तरह चला रहे हैं। वे यात्रा, स्वास्थ्य और अन्य खर्चों के नाम पर पैसे लेते हैं और कई देशों में हजारों डॉलर तक की मांग करते हैं।
कुछ डोनर खुद को “ओपन डोनर” बताते हैं और बच्चों के साथ भविष्य में संपर्क रखने की बात भी करते हैं, जिससे कानूनी और पारिवारिक जटिलताएं और बढ़ जाती हैं।
विशेषज्ञों और अधिकारियों की चेतावनी
फर्टिलिटी रेगुलेटर और पुलिस अधिकारियों ने लोगों को चेतावनी दी है कि केवल लाइसेंस प्राप्त क्लिनिक के माध्यम से ही फर्टिलिटी ट्रीटमेंट लिया जाए। अनरेगुलेटेड डोनेशन को बेहद जोखिम भरा बताया गया है, खासकर उन महिलाओं के लिए जो भावनात्मक रूप से कमजोर स्थिति में होती हैं।












