24 फरवरी को घरेलू बाजार कमजोरी के साथ खुला। सेंसेक्स 242 अंक गिरकर 83,053 पर खुला और निफ्टी 25,600 के आसपास फिसला। आईटी शेयरों में बिकवाली रही। वैश्विक संकेतों और अमेरिकी बाजार गिरावट का असर दिखा।
Stock Market Update: 24 फरवरी को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों का असर भारतीय सूचकांकों पर साफ दिखा। बीएसई सेंसेक्स करीब 242 अंक की गिरावट के साथ 83,053 के स्तर पर खुला। शुरुआती कारोबार में बिकवाली बढ़ने से सेंसेक्स लगभग 380 अंक टूटकर 82,920 के आसपास पहुंच गया। यह करीब आधा प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है।
एनएसई निफ्टी 50 भी दबाव में रहा। निफ्टी करीब 100 अंक फिसलकर 25,613 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। कारोबार के दौरान निफ्टी ने 25,600 के स्तर को परखा। इस स्तर के आसपास उतार चढ़ाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया। बाजार में फिलहाल सावधानी का माहौल बना हुआ है।
आईटी शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव
आज के कारोबार में आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। HCL Technologies, Tech Mahindra और Infosys के शेयर करीब 2 प्रतिशत तक गिर गए। Eternal में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी टेक कंपनियों को लेकर बनी अनिश्चितता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़े संभावित जोखिमों की चर्चा का असर भारतीय आईटी शेयरों पर भी पड़ा है। निवेशक फिलहाल टेक सेक्टर में नई पोजीशन लेने से बचते नजर आ रहे हैं।
वैश्विक संकेतों का असर
आज बाजार पर ग्लोबल संकेतों का सीधा असर दिखा। एशिया पैसिफिक क्षेत्र के बाजारों में मिलाजुला रुख रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा नए टैरिफ की धमकियों और AI से जुड़े सॉफ्टवेयर सेक्टर पर संभावित प्रभाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।
दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 1.1 प्रतिशत गिरा। ऑस्ट्रेलिया का S&P ASX 200 हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ। वहीं जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 0.77 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। इससे साफ है कि एशियाई बाजारों में स्पष्ट दिशा का अभाव है।
अमेरिकी बाजार में भी दबाव
पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी शेयर बाजार में भी गिरावट रही। निवेशक जोखिम वाले शेयरों से दूरी बनाते नजर आए। AI के बढ़ते प्रभाव और सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद बाजार में अस्थिरता देखी गई।
S&P 500 इंडेक्स में 1.04 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। तकनीकी इंडेक्स नैस्डैक कंपोजिट 1.13 प्रतिशत नीचे रहा। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 1.66 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई। अमेरिकी बाजार में आई यह गिरावट भारतीय बाजार की धारणा पर भी असर डाल रही है।
बीएस मंथन सम्मेलन की शुरुआत
आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में बिजनेस स्टैंडर्ड मंथन सम्मेलन का तीसरा संस्करण शुरू हो रहा है। यह दो दिवसीय वार्षिक शिखर सम्मेलन है जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के 40 विशेषज्ञ और उद्योग जगत के नेता शामिल होंगे।
सम्मेलन में फायरसाइड चैट और पैनल डिस्कशन के माध्यम से आर्थिक नीतियों, उद्योग की चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा होगी। ऐसे आयोजनों से बाजार की दिशा को लेकर संकेत मिलते हैं और निवेशकों को व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण समझने में मदद मिलती है।
विदेशी और घरेलू निवेशकों की गतिविधि
बाजार में पूंजी के प्रवाह को समझना भी जरूरी है। विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII ने 3,550.66 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DII ने 1,417.12 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
यह आंकड़े बताते हैं कि विदेशी निवेशकों की ओर से खरीदारी देखी गई, जबकि घरेलू संस्थानों ने मुनाफावसूली की। आने वाले सत्रों में इन दोनों वर्गों की गतिविधि बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
आईपीओ मार्केट में हलचल
आज प्राइमरी मार्केट में भी गतिविधि बनी हुई है। मुख्य धारा के आईपीओ में PNGS रेव डायमंड ज्वेलरी का सब्सक्रिप्शन शुरू हो रहा है। क्लीन मैक्स एनवायरो एनर्जी सॉल्यूशंस और श्री राम ट्विस्टेक्स आईपीओ दूसरे दिन में हैं। Gaudium IVF एंड वूमेन हेल्थ आईपीओ आज अंतिम दिन में प्रवेश कर गया है।
एसएमई सेगमेंट में अकॉर्ड ट्रांसफॉर्मर एंड स्विचगियर, मोबिलाइज एप लैब और कियासा रिटेल के आईपीओ दूसरे दिन में हैं। मनीलम इंडस्ट्रीज इंडिया का आईपीओ आज अंतिम दिन है।
आईपीओ मार्केट में बनी यह सक्रियता दिखाती है कि निवेशकों की दिलचस्पी अभी भी नए अवसरों में बनी हुई है। हालांकि लिस्टिंग गेन और लंबी अवधि के निवेश को लेकर सावधानी जरूरी है।
कमोडिटी मार्केट में नरमी
कमोडिटी बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई। ब्रेंट क्रूड 71.49 डॉलर प्रति बैरल पर 0.38 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा है। अमेरिकी WTI क्रूड 66.24 डॉलर प्रति बैरल पर 0.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा है।
तेल की कीमतों में नरमी से आयात बिल पर राहत मिल सकती है, लेकिन वैश्विक मांग को लेकर चिंता बनी हुई है। कमोडिटी की चाल का असर ऊर्जा और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों पर पड़ सकता है।











