राष्ट्रपति भवन में ‘राजाजी उत्सव’: एडविन लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर सी. राजगोपालाचारी की मूर्ति स्थापित

राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘राजाजी उत्सव’ के दौरान एडविन लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल सी. राजगोपालाचारी की मूर्ति स्थापित की

देश की राजधानी दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में सोमवार को ‘राजाजी उत्सव’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एडविन लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) की प्रतिमा का अनावरण किया।

नई दिल्ली: भारत की राजधानी में स्थित राष्ट्रपति भवन में सोमवार को आयोजित ‘राजाजी उत्सव’ के दौरान एक ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक कदम उठाया गया। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर स्वतंत्र भारत के प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) की प्रतिमा का अनावरण किया।

यह पहल भारत द्वारा औपनिवेशिक प्रतीकों से दूरी बनाकर राष्ट्रीय विरासत और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को प्रमुखता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया ‘अद्भुत पहल’

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर को एक “अद्भुत पहल” बताया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर राष्ट्रपति भवन से संबंधित पोस्ट साझा करते हुए कहा कि ‘राजाजी उत्सव’ राष्ट्र निर्माण में राजाजी के बहुआयामी योगदान को सामने लाने का एक प्रेरणादायक प्रयास है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से इस उत्सव में भाग लेने और राजाजी के जीवन से प्रेरणा लेने का आग्रह भी किया। इससे पहले 22 फरवरी को अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात में उन्होंने कहा था कि भारत अब गुलामी की मानसिकता और औपनिवेशिक प्रतीकों को पीछे छोड़कर अपनी सांस्कृतिक जड़ों और राष्ट्रीय नायकों को सम्मान दे रहा है।

उन्होंने अपने संबोधन में ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ के दौरान दिए गए ‘पंच प्राण’ के संकल्पों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनमें से एक महत्वपूर्ण संकल्प गुलामी की मानसिकता से मुक्ति है। राष्ट्रपति भवन में यह परिवर्तन उसी दिशा में उठाया गया कदम है।

कौन थे सी. राजगोपालाचारी?

सी. राजगोपालाचारी, जिन्हें स्नेहपूर्वक ‘राजाजी’ कहा जाता है, स्वतंत्र भारत के पहले और अंतिम भारतीय गवर्नर जनरल थे। वे 1948 से 1950 तक इस पद पर रहे। वे एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर विचारक, विधिवेत्ता और लेखक भी थे। राजाजी भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ-साथ स्वतंत्र भारत में सुशासन और नैतिक राजनीति के समर्थक रहे। सार्वजनिक जीवन में उनका आचरण, आत्मसंयम और स्वतंत्र सोच आज भी उदाहरण के रूप में देखा जाता है। उन्होंने सत्ता को विशेषाधिकार के बजाय सेवा का माध्यम माना।

एडविन लुटियंस ब्रिटिश काल में नई दिल्ली के वास्तुशिल्पी थे और उन्होंने राष्ट्रपति भवन (पूर्व में वायसराय हाउस) सहित कई प्रमुख इमारतों की डिजाइन तैयार की थी। हालांकि वास्तुकला के क्षेत्र में उनका योगदान ऐतिहासिक है, लेकिन हाल के वर्षों में भारत में औपनिवेशिक प्रतीकों को पुनर्परिभाषित करने और राष्ट्रीय नायकों को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति बढ़ी है।

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