Stock Market Update: टैरिफ चिंता से बाजार में दबाव, सेंसेक्स फिसला और निफ्टी 25700 के नीचे

Stock Market Update: टैरिफ चिंता से बाजार में दबाव, सेंसेक्स फिसला और निफ्टी 25700 के नीचे

टैरिफ चिंता के बीच सोमवार को शेयर बाजार कमजोर खुला। सेंसेक्स गिरकर 83,231 के आसपास रहा, जबकि निफ्टी 25,700 के नीचे फिसला। भारत-यूएस ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता, एशियाई संकेत और बिकवाली दबाव से वोलैटिलिटी बढ़ी।

Stock Market: सोमवार 12 जनवरी 2026 को हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही। एशियाई बाजारों से मिले-जुले संकेतों के बीच भारत और अमेरिका (US) के बीच ट्रेड डील को लेकर जारी असमंजस ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। टैरिफ से जुड़ी आशंकाओं के चलते बाजार में शुरुआती कारोबार से ही बिकवाली का दबाव देखने को मिला। इसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों पर पड़ा।

बाजार की कमजोर शुरुआत

तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 100 अंकों से ज्यादा की गिरावट के साथ 83,435.31 के स्तर पर खुला। ओपनिंग के बाद बिकवाली और तेज हो गई। सुबह करीब 9:22 बजे सेंसेक्स 345.36 अंक यानी 0.41 प्रतिशत टूटकर 83,230.88 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। बैंकिंग, IT और चुनिंदा हेवीवेट शेयरों में दबाव के कारण सेंसेक्स की गिरावट और गहरी हुई।

नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 (Nifty-50) भी कमजोर शुरुआत के साथ 25,669 पर खुला। कुछ ही मिनटों में यह 25,600 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह 9:24 बजे निफ्टी 115.75 अंक या 0.45 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,567.55 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। निवेशकों के लिए 25,700 और 25,600 के स्तर अहम माने जा रहे हैं।

निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिलने से बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। निवेशक फिलहाल रिस्क लेने से बचते नजर आ रहे हैं। ग्लोबल टैरिफ पॉलिसी, जियो-पॉलिटिकल टेंशन और विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियों पर बाजार की नजर बनी हुई है। यही वजह है कि शुरुआती कारोबार में वोलैटिलिटी देखने को मिली।

Global Markets का हाल

एशियाई बाजारों में सोमवार को मिला-जुला रुख देखने को मिला। चीन का CSI 300 इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 0.29 प्रतिशत गिरा। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स भी 0.09 प्रतिशत नीचे कारोबार करता दिखा। इसके उलट जापान का निक्केई इंडेक्स 1.61 प्रतिशत की मजबूती के साथ ट्रेड करता नजर आया। दक्षिण कोरिया का KOSPI इंडेक्स भी 1.26 प्रतिशत चढ़ा।

एशियाई बाजारों की इस मिश्रित चाल का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। निवेशक किसी एक दिशा में बड़ा दांव लगाने से बचते दिखे और इसका असर इंडेक्स की चाल में साफ नजर आया।

Wall Street से मिले पॉजिटिव संकेत

हालांकि अमेरिकी बाजारों से संकेत सकारात्मक रहे। वॉल स्ट्रीट पर शुक्रवार को S&P 500 और डाउ जोन्स नए रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुए। अमेरिकी लेबर मार्केट से जुड़े आंकड़ों ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। दिसंबर में अमेरिका की बेरोजगारी दर में गिरावट दर्ज की गई।

Non-Farm Payroll डेटा के अनुसार पिछले महीने 50,000 नई नौकरियां जुड़ीं। नवंबर के आंकड़ों को संशोधित कर 56,000 किया गया। हालांकि यह आंकड़ा रॉयटर्स सर्वे में जताई गई 60,000 की उम्मीद से थोड़ा कम रहा। इसके बावजूद अमेरिकी बाजारों में मजबूती बनी रही। कारोबारी सत्र के अंत में S&P 500 में 0.65 प्रतिशत की तेजी, डाउ जोन्स में 0.48 प्रतिशत और नैस्डैक में 0.82 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

Q3 Results पर बाजार की नजर

आज कई बड़ी और मिडकैप कंपनियां अपने दिसंबर तिमाही यानी Q3 Results जारी करने वाली हैं। इनमें IT सेक्टर की दिग्गज कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) और HCL Technologies शामिल हैं। इनके अलावा Anand Rathi Wealth, GTPL Hathway, Gujarat Hotels, Lotus Chocolate Company, Maharashtra Scooters, OK Play India और Tierra Agrotech भी अपने तिमाही नतीजे पेश करेंगी।

IT सेक्टर के नतीजों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी। डॉलर-रुपया मूवमेंट, ग्लोबल डिमांड और मैनेजमेंट गाइडेंस से IT शेयरों की दिशा तय हो सकती है। इसके साथ ही निवेशक Avenue Supermarts (DMart), IREDA और अन्य कंपनियों के नतीजों पर भी प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जो शुक्रवार को बाजार बंद होने के बाद घोषित किए गए थे।

भारत-यूएस ट्रेड डील पर बढ़ी चिंता

भारत और अमेरिका के रिश्तों में बनी बेचैनी फिलहाल कम होती नहीं दिख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन के सदस्यों की ओर से हाल में दिए गए बयानों से भी बाजार को ज्यादा राहत नहीं मिली है। निवेशकों को डर है कि अगर ट्रेड डील को लेकर स्थिति और बिगड़ती है तो इसका असर भारत के एक्सपोर्ट और कुछ सेक्टरों पर पड़ सकता है।

हालांकि भारत की ओर से अब तक प्रतिक्रिया संयमित रही है। इसके बावजूद पिछले सप्ताह राष्ट्रपति ट्रंप ने एक ऐसे विधेयक का समर्थन किया है, जिससे उन्हें रूसी मूल के यूरेनियम और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों पर कम से कम 500 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। इस संभावित कदम ने ग्लोबल ट्रेड को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

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