सुल्तानपुर में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। जिले में दो दिनों से रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी है और इसके साथ तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर पेड़ और पेड़ों की डालियां टूटकर सड़कों पर गिर गईं। कई जगह कच्चे मकानों और दीवारों के गिरने की भी सूचना है। पेड़ और मलबा सड़क पर आने के कारण कई मार्गों पर आवागमन बाधित हुआ। दूसरी ओर बिजली के तारों और फीडरों पर पेड़-डालियां गिरने तथा कुछ स्थानों पर शॉर्ट सर्किट की वजह से बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।
शुक्रवार को जिले में हुई बारिश का असर सबसे ज्यादा ग्रामीण इलाकों में दिखाई दिया। 12 घंटे के दौरान सुल्तानपुर में 43 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई। लगातार बारिश और हवा के कारण कई जगह पेड़ उखड़ गए। खेतों में खड़ी अगेती धान की फसल भी तेज हवा और बारिश के कारण गिर गई। वहीं लगातार नमी के चलते कमजोर और कच्चे मकानों पर भी असर पड़ा है। कुछ परिवारों के मकान गिरने से घर का सामान मलबे में दब गया और उनके सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई।
जयसिंहपुर और कुड़वार क्षेत्र के कई गांवों में बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश के दौरान बिजली के तारों पर पेड़ या उनकी डालियां गिरने से कई फीडर बंद हो गए। कुड़वार और सरकौड़ा उपकेंद्र से जुड़े इलाकों में बिजली संकट ज्यादा गंभीर रहा। रिपोर्ट के मुताबिक इन दोनों उपकेंद्रों से जुड़े एक लाख से अधिक लोग गुरुवार रात करीब एक बजे से बिजली संकट झेल रहे थे और शुक्रवार शाम तक मरम्मत का काम जारी था।
कुड़वार क्षेत्र में अमहट हवाई पट्टी के पास भी एक पेड़ की डाल बिजली के तार पर गिर गई। इसके अलावा बहुबरा, सरैया माफी, भंड़रा, राजापुर समेत कई गांवों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। लंबे समय तक बिजली नहीं रहने से ग्रामीणों को पेयजल, मोबाइल चार्जिंग, घरेलू कामकाज और अन्य जरूरी गतिविधियों में परेशानी हुई। विभागीय कर्मचारी खराबी वाले स्थानों की पहचान कर लाइन को दुरुस्त करने में जुटे रहे।
बारिश से सिर्फ बिजली व्यवस्था ही प्रभावित नहीं हुई, बल्कि सड़क यातायात पर भी इसका सीधा असर पड़ा। अलग-अलग स्थानों पर पेड़ और बड़ी डालियां गिरने से रास्ते अवरुद्ध हुए। ग्रामीण मार्गों पर मलबा और पानी जमा होने के कारण छोटे वाहनों को निकलने में परेशानी हुई। जिन रास्तों से रोजाना स्कूल, बाजार और कामकाज के लिए बड़ी संख्या में लोग गुजरते हैं, वहां भी बारिश के कारण आवाजाही प्रभावित हुई। स्थानीय स्तर पर लोगों ने पेड़ और डालियां हटाकर रास्ता साफ करने का प्रयास किया।
बारिश के कारण कई परिवारों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कच्चे मकानों के गिरने से घर में रखा सामान भी मलबे में दब गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे ही एक प्रभावित परिवार के सामने बारिश के बाद खुले आसमान के नीचे रहने की स्थिति बन गई। प्रशासन की ओर से नुकसान का आकलन कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। बल्दीराय के नायब तहसीलदार गुलाब सिंह ने बताया कि हल्का लेखपाल को मौके पर भेजकर नुकसान का जायजा लेने और शासन से नियमानुसार मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया की जाएगी।
कृषि क्षेत्र पर भी इस बारिश का असर देखने को मिला है। तेज हवा के साथ हुई बारिश से अगेती धान की फसल कई स्थानों पर खेत में गिर गई। लगातार बारिश से खेतों में नमी बढ़ गई है, जिससे किसानों को फसल को लेकर चिंता है। हालांकि बारिश की मात्रा और उसके बाद मौसम की स्थिति के आधार पर फसल पर वास्तविक नुकसान का आकलन कृषि विभाग और स्थानीय स्तर पर निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार सुल्तानपुर समेत पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश में बारिश का यह दौर अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। शनिवार को भी राज्य के कई हिस्सों में बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार रविवार तक कई इलाकों में बारिश जारी रह सकती है। सुल्तानपुर और आसपास के जिलों में भी भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना वाले क्षेत्रों में शामिल किया गया है।
लगातार बारिश के कारण तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से चार से सात डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला गया। सुल्तानपुर के लिए शनिवार के मौसम पूर्वानुमान में बारिश के साथ अधिकतम तापमान करीब 25 डिग्री और न्यूनतम तापमान करीब 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। रविवार से बादल रहने के बावजूद बारिश में कमी आने और तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी के संकेत हैं।
मौसम में अचानक आए इस बदलाव की वजह बंगाल की खाड़ी में विकसित हुआ मौसम तंत्र बताया गया है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी आने के कारण उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से में बादल बने और बारिश का दौर लंबा चला। क्षेत्रीय मौसम केंद्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि इस सिस्टम के प्रभाव से पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश हो रही है।
बिजली संकट को देखते हुए विभागीय टीमें प्रभावित फीडरों और लाइनों की मरम्मत में लगी हुई हैं। पेड़ गिरने या तार टूटने वाले स्थानों पर पहले रास्ता साफ करने और उसके बाद बिजली आपूर्ति बहाल करने का काम किया जा रहा है। बारिश के दौरान टूटे या नीचे गिरे बिजली के तारों से लोगों को दूर रहने की जरूरत है, क्योंकि पानी भरी जमीन पर करंट फैलने का खतरा हो सकता है। किसी भी टूटे तार को खुद हटाने के बजाय बिजली विभाग को सूचना देना सुरक्षित रहेगा।
फिलहाल सुल्तानपुर में बारिश का असर व्यापक है। एक तरफ पेड़, मकान और दीवारें गिरने से स्थानीय स्तर पर आवागमन प्रभावित हुआ है, वहीं दूसरी तरफ बिजली आपूर्ति बाधित होने से बड़ी आबादी को परेशानी उठानी पड़ रही है। प्रशासन और बिजली विभाग की टीमें स्थिति सामान्य करने में जुटी हैं। आने वाले एक-दो दिनों में बारिश की स्थिति और प्रभावित इलाकों में राहत कार्य की प्रगति से यह स्पष्ट होगा कि जनजीवन कब तक पूरी तरह सामान्य हो पाता है।











