सुलतानपुर में संजय यदुवंशी के समर्थन में जुटे सैकड़ों लोग, धम्मौर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी; कार्रवाई की मांग

सुलतानपुर के तिकोनिया पार्क में संजय यदुवंशी के समर्थन में लोग जुटे। धम्मौर पुलिस पर दुर्व्यवहार के आरोपों के बीच निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग उठी।
सुलतानपुर में संजय यदुवंशी के समर्थन में जुटे सैकड़ों लोग, धम्मौर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी; कार्रवाई की मांग
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उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर में अवधी गायक और यूट्यूबर संजय यदुवंशी के समर्थन में शुक्रवार को तिकोनिया पार्क में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। धम्मौर पुलिस की कार्यशैली के विरोध में आयोजित इस प्रदर्शन में समर्थकों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की और संबंधित थाना प्रभारी समेत पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग उठाई। प्रदर्शन में युवाओं के साथ सोशल मीडिया से जुड़े कई लोग भी शामिल हुए। समर्थकों के जुटने और वाहनों के काफिले के प्रदर्शन स्थल की ओर आने की सूचना पर पुलिस-प्रशासन सतर्क हो गया। मामले को लेकर शहर में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।

संजय यदुवंशी ने धम्मौर पुलिस पर उनके परिवार के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पुलिस रात के समय बिना वारंट उनके घर में दाखिल हुई और उनकी मां तथा बहन के साथ अभद्रता की गई। इस घटना से संबंधित एक वीडियो भी इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुआ था, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया। संजय और उनके परिवार ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए संबंधित कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, पुलिस ने परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है और मामले की जांच कराए जाने की जानकारी दी है।

विवाद की पृष्ठभूमि में संजय यदुवंशी और उनके भाई समेत अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज एक मुकदमा भी है। सात सितंबर 2026 को नगर कोतवाली में जफरुल हसन की शिकायत पर संजय यदुवंशी, उनके भाई शिवा यदुवंशी और अन्य लोगों के खिलाफ मारपीट, हत्या के प्रयास समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस इसी मामले की जांच और आरोपितों की तलाश के सिलसिले में संजय के घर पहुंची थी। इस मामले में लगाए गए आरोपों और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। मुकदमा दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि आरोप सिद्ध हो चुके हैं।

पुलिस की दबिश के दौरान क्या हुआ, इसे लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। संजय के परिवार का आरोप है कि पुलिसकर्मी बिना वारंट घर में घुसे और परिवार की महिलाओं के साथ अनुचित व्यवहार किया। परिवार ने इस घटना का वीडियो भी प्रसारित किया। दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिजनों ने पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता की थी और पुलिस कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई कर रही थी। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।

इस विवाद के बाद संजय यदुवंशी ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन का आह्वान किया था। शुक्रवार सुबह से ही उनके समर्थकों के तिकोनिया पार्क पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ। कुछ ही समय में वहां बड़ी संख्या में युवा और सोशल मीडिया से जुड़े लोग एकत्र हो गए। प्रदर्शनकारियों ने धम्मौर थाने की पुलिस और थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। समर्थकों का कहना था कि यदि पुलिसकर्मियों पर दुर्व्यवहार के आरोप लगे हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान संजय यदुवंशी के समर्थकों ने संबंधित पुलिसकर्मियों को निलंबित करने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग भी उठाई। संजय की ओर से पहले जारी बयान में धम्मौर थाना प्रभारी सहित संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। समर्थकों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि पुलिस और आम नागरिकों के बीच भरोसा बना रहे। वहीं, पुलिस का पक्ष है कि कार्रवाई दर्ज मुकदमे की विवेचना के तहत की गई थी। ऐसे में जांच का परिणाम इस विवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मामले ने सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा बटोरी है। संजय यदुवंशी अवधी गीतों और कॉमेडी वीडियो के जरिए लोगों के बीच पहचान रखते हैं। उनके समर्थन में बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने से पुलिस-प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन किसी वीडियो के कुछ हिस्सों के आधार पर पूरे घटनाक्रम का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। घटना के समय मौजूद लोगों के बयान, पुलिस का पक्ष और अन्य साक्ष्य जांच के लिए अहम होंगे।

पुलिस अधिकारियों ने पहले बताया था कि प्रकरण की जांच क्षेत्राधिकारी नगर को सौंपी गई है। जांच में पुलिस की दबिश के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया, परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों और पुलिसकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार जैसे पहलुओं की पड़ताल की जा सकती है। जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना होगा कि कार्रवाई के दौरान निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं और दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल किसी भी पक्ष के दावे को अंतिम निष्कर्ष मानने से पहले जांच के परिणाम की प्रतीक्षा जरूरी है।

इस मामले में एक तरफ संजय यदुवंशी और उनके समर्थक पुलिस की कार्यशैली के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस दर्ज मुकदमे की जांच के सिलसिले में की गई कार्रवाई को कानून के तहत बता रही है। इसलिए पूरे घटनाक्रम में दोनों पक्षों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है। प्रदर्शन के जरिए उठाई गई मांगों पर प्रशासन क्या कदम उठाता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।

फिलहाल सुलतानपुर के तिकोनिया पार्क में हुए प्रदर्शन ने संजय यदुवंशी और धम्मौर पुलिस के बीच विवाद को फिर से चर्चा में ला दिया है। समर्थकों ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है, जबकि पुलिस की ओर से आरोपों को खारिज करते हुए जांच की बात कही गई है। अब मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर नजर रहेगी

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