Cheating Case: सनी लियोन और पति डेनियल वेबर को मिली बड़ी राहत, मुंबई कोर्ट ने खारिज की आपराधिक शिकायत

Sunny Leone Cheating Case: सनी लियोन और पति डेनियल वेबर को कथित धोखाधड़ी मामले में बड़ी राहत मिली है। मुंबई की अदालत ने उनके खिलाफ दायर आपराधिक

अभिनेत्री सनी लियोन और उनके पति के खिलाफ दर्ज कथित धोखाधड़ी की शिकायत पर कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उनके खिलाफ चीटिंग का मामला नहीं बनता और विवाद मूल रूप से एक कारोबारी समझौते से जुड़ा हुआ है।

Sunny Leone Cheating Case: बॉलीवुड अभिनेत्री सनी लियोन और उनके पति डेनियल वेबर को एक कथित धोखाधड़ी मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। मुंबई की डिंडोशी सेशंस कोर्ट ने उनके खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत को खारिज करने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों से मामला मूल रूप से एक कमर्शियल कॉन्ट्रैक्ट और भुगतान विवाद दिखाई देता है, न कि आपराधिक धोखाधड़ी का मामला।

इस मामले में सनी लियोन के अलावा उनके पति डेनियल वेबर और मैनेजर सनी राजानी को भी आरोपी बनाया गया था। शिकायतकर्ता ओमप्रकाश श्रीनारायण लाल जैन ने आरोप लगाया था कि उन्हें एक तेलुगु फिल्म प्रोजेक्ट से जुड़ी रकम पर तय कमीशन का भुगतान नहीं किया गया।

क्या था पूरा मामला?

शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने सनी लियोन के लिए एक तेलुगु फिल्म में भूमिका दिलाने में मदद की थी। उनका दावा था कि इस प्रोजेक्ट से जुड़ी कुल राशि करीब 1.75 करोड़ रुपये थी और समझौते के तहत उन्हें इसका एक निश्चित प्रतिशत बतौर इंसेंटिव या कमीशन मिलना था। जैन ने आरोप लगाया कि उन्हें शुरुआती स्तर पर कुछ भुगतान प्राप्त हुए, लेकिन बाद में उनके हिस्से की पूरी रकम और कमीशन का भुगतान नहीं किया गया। इसी आधार पर उन्होंने सनी लियोन, डेनियल वेबर और उनके मैनेजर के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 406, 420 और 506(II) के तहत आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी जैसे आरोप लगाए गए थे।

पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने भी खारिज की थी शिकायत

इस मामले में अंधेरी की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अदालत ने 10 अक्टूबर 2024 को शिकायत खारिज कर दी थी। इसके बाद शिकायतकर्ता ने इस फैसले को चुनौती देते हुए डिंडोशी सेशंस कोर्ट का रुख किया। जैन का कहना था कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मामले में मौजूद सामग्री पर उचित तरीके से विचार नहीं किया और शिकायत को गलत तरीके से खारिज कर दिया। इसके बाद सेशंस कोर्ट में आपराधिक रिविजन याचिका दाखिल की गई।

कोर्ट ने दस्तावेजों की जांच के बाद क्या कहा?

अतिरिक्त सेशंस जज पी. ए. साने ने मामले की सुनवाई के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों और दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत की समीक्षा की। अदालत के सामने टैक्स इनवॉइस, फॉर्म 16-A से जुड़े दस्तावेज और भुगतान एवं समझौते से संबंधित रिकॉर्ड भी रखे गए। कोर्ट ने पाया कि ये दस्तावेज पक्षों के बीच हुए कारोबारी लेनदेन की ओर इशारा करते हैं। अदालत के मुताबिक, अगर दो पक्षों के बीच किसी अनुबंध की शर्तों को लेकर विवाद या भुगतान में देरी होती है, तो हर स्थिति में उसे आपराधिक धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी कॉन्ट्रैक्ट का कथित उल्लंघन अपने आप में धोखाधड़ी का अपराध नहीं बन जाता। आपराधिक मामला स्थापित करने के लिए यह दिखाना जरूरी होता है कि शुरुआत से ही धोखा देने या बेईमानी की मंशा मौजूद थी।

शिकायतकर्ता जरूरी सबूत नहीं दे पाए

सेशंस कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता ऐसे पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सके, जिनसे धोखाधड़ी या आपराधिक विश्वासघात के जरूरी तत्व साबित हों। अदालत को रिकॉर्ड में ऐसा आधार नहीं मिला, जिसके आधार पर मजिस्ट्रेट कोर्ट के पहले के फैसले में हस्तक्षेप किया जा सके। कोर्ट ने यह भी माना कि उपलब्ध सामग्री विवाद को एक कारोबारी समझौते से जुड़ा मामला दिखाती है। इसलिए इसे आपराधिक रंग देना उचित नहीं होगा।

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