भारत-अमेरिका ट्रेड डील फ्रेमवर्क के तहत टैरिफ में बड़ी कटौती पर सहमति बनी है, जिससे भारतीय निर्यात को अमेरिकी बाजार में सीधा फायदा मिलेगा। कपड़ा, चमड़ा और हैंडीक्राफ्ट जैसे सेक्टर मजबूत होंगे, जबकि ऊर्जा, कृषि और डेयरी क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील: भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने हाल ही में एक ट्रेड डील फ्रेमवर्क पर सहमति बनाई है, जिसके तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 फीसदी करने का फैसला लिया है। यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है। भारत अगले पांच वर्षों में बड़ी मात्रा में अमेरिकी ऊर्जा और औद्योगिक उत्पाद खरीदेगा, जबकि अमेरिका भारतीय निर्यातकों के लिए अपने बाजार को और सुलभ बनाएगा। इस कदम के पीछे सप्लाई चेन मजबूती, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देना मुख्य कारण माना जा रहा है।
टैरिफ कटौती से भारतीय निर्यात को फायदा
इस डील के तहत अमेरिका भारत से आयात होने वाले ज्यादातर उत्पादों पर 18 फीसदी टैरिफ बनाए रखेगा, जो पहले की तुलना में काफी कम है। कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक, जैविक रसायन और हस्तशिल्प जैसे सेक्टर इससे सीधे लाभान्वित होंगे। इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान सस्ता होगा और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होगी।
इसके बदले भारत ने भी कई अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर शुल्क घटाने या खत्म करने पर सहमति जताई है। सूखे अनाज, मेवे, प्रोसेस्ड फूड, सोयाबीन तेल और स्पिरिट्स जैसे उत्पाद अब भारतीय बाजार में अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध हो सकते हैं।

ऊर्जा, डेयरी और एग्री सेक्टर पर बनी सहमति
ट्रेड डील का एक अहम पहलू ऊर्जा सहयोग है। भारत ने अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसमें तेल, गैस और कोकिंग कोल प्रमुख हैं। इसके साथ ही भारत ने रूसी तेल पर निर्भरता कम कर अमेरिका और वेनेजुएला से आयात बढ़ाने का संकेत दिया है।
कृषि और डेयरी सेक्टर में नॉन-टैरिफ बाधाओं को कम करने पर भी सहमति बनी है। दोनों देश कृषि उत्पादों और चिकित्सा उपकरणों पर लंबे समय से चली आ रही तकनीकी और लाइसेंसिंग अड़चनों को दूर करने के लिए साझा मानकों को मान्यता देने की दिशा में काम करेंगे।
भारतीय कारोबारियों के लिए नए मौके
केंद्रीय व्यापार मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक यह फ्रेमवर्क भारतीय निर्यातकों के लिए करीब 30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी बाजार के दरवाजे खोलता है। खासतौर पर किसानों, मछुआरों और एमएसएमई सेक्टर को इससे बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। उन्होंने संकेत दिया कि मार्च तक औपचारिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।
इसके साथ ही संवेदनशील तकनीकों, सप्लाई चेन डायवर्सिफिकेशन और चीन से जुड़ी गैर-बाजार नीतियों पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा, जो रणनीतिक रूप से भी इस डील को अहम बनाता है।










