टाटा की Air India और Vistara का मर्जर: एक साल बाद क्यों घटा ‘महाराजा’ का क्रेज, देखें डिटेल्स

टाटा की Air India और Vistara का मर्जर: एक साल बाद क्यों घटा ‘महाराजा’ का क्रेज, देखें डिटेल्स

Air India और Vistara के मर्जर के एक साल बाद भी कंपनी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। विमान हादसे, उड़ानों की घटती संख्या, तकनीकी दिक्कतें और कम होती मार्केट शेयर ने एयरलाइन की उड़ान को धीमा किया है।

Business News: कभी देश की इकलौती एयरलाइन रही Air India आज भी नई उड़ान भरने की कोशिश में है। टाटा ग्रुप के हाथों में आने और Vistara के साथ विलय (Merger) के एक साल बाद भी कंपनी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पा रही है। एक साल के भीतर विमान दुर्घटनाएं, उड़ानों में गिरावट, बेड़े (Fleet) की कमी और घटती बाजार हिस्सेदारी (Market Share) ने एयरलाइन की रफ्तार को धीमा कर दिया है।

टाटा की एयरलाइन का इतिहास

भारत की सबसे पुरानी एयरलाइन Air India की शुरुआत 1932 में जे.आर.डी. टाटा ने “टाटा एयरलाइंस” नाम से की थी। उन्होंने खुद कराची से बॉम्बे तक पहली उड़ान भरी थी, जिसमें हवाई डाक ले जाया गया था। बाद में इस एयरलाइन का नाम Air India रखा गया और जे.आर.डी. टाटा को “भारतीय विमानन का जनक” कहा गया।

आजादी के बाद 1953 में भारत सरकार ने इस एयरलाइन में बहुमत हिस्सेदारी लेकर इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया। कई दशकों तक सरकारी नियंत्रण में रहने के बाद कंपनी कर्ज के बोझ में डूब गई। अंततः 2021 में Tata Group ने इसे दोबारा अपने नियंत्रण में लेकर इसके पुनर्जीवन की शुरुआत की।

विस्तारा के साथ हुआ बड़ा मर्जर

टाटा-सिंगापुर एयरलाइंस के संयुक्त उपक्रम Vistara का 12 नवंबर 2024 को एयर इंडिया में औपचारिक विलय किया गया। मर्जर के बाद सभी ऑपरेशंस एयर इंडिया के तहत आ गए और विस्तारा की बुकिंग सिस्टम व उड़ानें भी एयर इंडिया के नाम से संचालित होने लगीं।

हालांकि, इस मर्जर के बाद एयर इंडिया को नई पहचान तो मिली, लेकिन परफॉर्मेंस के मामले में कंपनी पिछड़ती दिखी।

दुर्घटनाओं और तकनीकी समस्याओं ने बढ़ाई मुश्किलें

मर्जर के बाद से एयर इंडिया के सामने कई चुनौतियाँ आईं। जून 2025 में अहमदाबाद में हुई एक घातक विमान दुर्घटना ने एयरलाइन की छवि को झटका दिया। लंदन के लिए रवाना हुआ यह विमान उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें 260 लोगों की मौत हुई।

इस हादसे के बाद एयर इंडिया की सुरक्षा व्यवस्था और ऑपरेशनल दक्षता पर सवाल उठने लगे। साथ ही आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और तकनीकी रखरखाव की दिक्कतों ने एयरलाइन की उड़ान को और धीमा कर दिया।

बेड़े की संख्या में आई कमी

विलय के समय एयर इंडिया और विस्तारा का संयुक्त बेड़ा 208 विमानों का था, जबकि एयर इंडिया एक्सप्रेस समेत कुल संख्या 298 तक पहुंचती थी। लेकिन एक साल बाद यह संख्या घटकर 187 विमानों पर आ गई है। अहमदाबाद हादसे के बाद एक 787 विमान को स्थायी रूप से सेवा से हटा दिया गया।

इसके अलावा पुराने B777-200LR विमानों को बेड़े से बाहर कर दिया गया और पट्टे (Lease) पर लिए गए कुछ विमान अपनी अवधि पूरी होने पर वापस हो गए। वहीं, सिंगापुर एयरलाइंस से मिलने वाले छह B777-300ER विमान अभी तक एयर इंडिया को नहीं मिले हैं।

घट गई उड़ानों की संख्या

विलय से पहले एयर इंडिया और विस्तारा मिलकर लगभग 90 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर साप्ताहिक 5,600 से अधिक उड़ानें संचालित करते थे। लेकिन नवंबर 2025 तक यह संख्या घटकर 4,823 उड़ानें रह गई है।

विमानन विश्लेषण कंपनी Cirium के आंकड़ों के अनुसार, यह गिरावट ऑपरेशनल सीमाओं और बेड़े की कम उपलब्धता के कारण आई है। इससे यात्रियों को टिकट बुकिंग और उड़ान रद्दीकरण की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

मार्केट शेयर में भी गिरावट

जब एयर इंडिया ने अपने परिवर्तन कार्यक्रम Vihaan.AI की शुरुआत की थी, तब लक्ष्य था कि 5 वर्षों में 30% बाजार हिस्सेदारी हासिल की जाए। सितंबर 2024 में, जब चारों एयरलाइंस (Air India, Vistara, AirAsia India और Air India Express) अलग-अलग काम कर रही थीं, तब समूह की बाजार हिस्सेदारी 29.2% थी।

मर्जर के बाद दिसंबर 2024 में यह घटकर 26.4% रह गई और सितंबर 2025 तक केवल 27.4% पर स्थिर रही। यानी एक साल में एयर इंडिया ग्रुप की मार्केट शेयर में लगातार गिरावट आई है।

क्यों नहीं चल पाई ‘नई उड़ान’

विशेषज्ञों का कहना है कि मर्जर के बाद सबसे बड़ी चुनौती रही दोनों कंपनियों की ऑपरेशनल प्रणाली और स्टाफ को एक साथ लाना। विस्तारा की प्रीमियम इमेज और एयर इंडिया की पारंपरिक छवि को एक समान ब्रांड पहचान में बदलना आसान नहीं था।

साथ ही, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए स्लॉट्स की सीमाएं, रखरखाव में देरी और जियोपॉलिटिकल चुनौतियों ने भी प्रगति की रफ्तार धीमी कर दी। इसके अलावा, एयर इंडिया के कई पुराने विमान तकनीकी रूप से कमजोर हैं, जिससे उनकी उड़ान क्षमता प्रभावित हुई है।

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