टेट्रा पैक में शराब की बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पूछा- 'ये जूस है क्या?'

टेट्रा पैक में शराब बेचने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराज़गी जताते हुए पूछा—‘ये जूस है क्या?’ कोर्ट की सख्त टिप्पणियों और सुनवाई की पूरी डिटेल यहां जानें।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शराब को जूस जैसे दिखने वाले टेट्रा पैक में बेचे जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे पैक पहली नजर में जूस जैसे दिखते हैं और आसानी से बच्चों की पहुंच में आ सकते हैं, जिससे बड़ा खतरा पैदा होता है।

नई दिल्ली: भारत के सुप्रीम कोर्ट ने शराब को जूस जैसे दिखने वाले टेट्रा पैक में बेचने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने कहा कि ऐसी पैकिंग न केवल भ्रम उत्पन्न करती है, बल्कि यह बच्चों तक शराब की आसान पहुंच का मार्ग भी बन सकती है। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा— “यह जूस है क्या? पहली बार देखा है कि शराब बिना किसी चेतावनी के ऐसे पैक में बेची जा रही है।”

सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी की कि कई राज्य सरकारें सिर्फ राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से इन उत्पादों को बाजार में आने की अनुमति दे रही हैं। हालांकि, अदालत ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया, लेकिन अपनी टिप्पणियों के जरिए राज्य सरकारों की नीति पर सीधे सवाल खड़े कर दिए।

जूस जैसी पैकिंग पर आपत्ति: 'बच्चों को आसानी से मिल सकती है शराब'

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टेट्रा पैक की पैकिंग ऐसी है जिसे देखकर सामान्य व्यक्ति भी धोखा खा सकता है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि ये पैकेट देखने में जूस के पैक जैसे लगते हैं, और उन पर शराब संबंधी आवश्यक चेतावनियां तक नहीं दी गई हैं। अदालत ने चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे पैकेट बच्चों की नजरों में आसानी से आ सकते हैं और माता-पिता को भी यह पता नहीं चल पाता कि उनके घर में जूस के नाम पर शराब लाई जा रही है। यह स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा, दोनों के लिए खतरनाक है।

पीठ ने कहा, “लगता है राज्य सरकारें सिर्फ राजस्व कमाने के लिए इस तरह की पैकिंग और बिक्री को अनुमति दे रही हैं। पैकिंग भ्रामक है, पहचान में नहीं आती और किसी भी तरह शराब जैसी नहीं लगती। इस टिप्पणी ने शराब बिक्री नीतियों और पैकेजिंग मानकों पर एक व्यापक बहस छेड़ दी है, क्योंकि भारत में शराब पहले से ही युवा पीढ़ी पर अपने प्रभाव को लेकर विवादों के केंद्र में रहती है।

20 साल पुराने ट्रेडमार्क विवाद की सुनवाई के दौरान उठी बात

टेट्रा पैक में शराब बेचने को लेकर सुप्रीम कोर्ट की यह प्रतिक्रिया दो शराब ब्रांडों के बीच लंबे समय से चल रहे ट्रेडमार्क विवाद से जुड़ी सुनवाई के दौरान सामने आई। यह मामला जॉन डिस्टिलरीज और ऑलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स (जो ‘ऑफिसर्स चॉइस’ ब्रांड बनाती है) के बीच ट्रेडमार्क विवाद का है। मद्रास हाईकोर्ट ने इससे पहले ऑलाइड ब्लेंडर्स के पक्ष में फैसला दिया था और जॉन डिस्टिलरीज को अपने उत्पादों से ‘ऑरिजनल चॉइस’ ट्रेडमार्क हटाने का आदेश दिया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए जॉन डिस्टिलरीज सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।

सभी पक्षों की सहमति से कोर्ट ने यह विवाद मध्यस्थता के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव को सौंप दिया है। अदालत ने कहा कि जस्टिस राव जल्द से जल्द इस विवाद पर काम शुरू करें और समाधान निकालने का प्रयास करें।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शराब को जूस जैसे दिखने वाले टेट्रा पैक में बेचे जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे पैक पहली नजर में जूस जैसे दिखते हैं और आसानी से बच्चों की पहुंच में आ सकते हैं, जिससे बड़ा खतरा पैदा होता है।

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