Thunderquakes से धरती के अंदर की जांच, वैज्ञानिकों ने खोजी X-Ray जैसी नई Urban Seismology तकनीक

वैज्ञानिकों ने Thunderquakes और Fiber-Optic Cable की मदद से बिना ड्रिलिंग करीब 100 मीटर गहराई तक जमीन के अंदर की संरचना समझने की नई तकनीक खोजी।

नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने दिखाया कि बिजली और गरज से पैदा होने वाली seismic waves यानी Thunderquakes का इस्तेमाल धरती की सतह के नीचे की संरचना समझने में किया जा सकता है। यह तकनीक बिना ड्रिलिंग के करीब 100 मीटर गहराई तक जानकारी दे सकती है।

Tech: Thunderquakes। वैज्ञानिकों ने गरज के दौरान जमीन तक पहुंचने वाली ऊर्जा से पैदा होने वाली seismic waves का इस्तेमाल कर भूमिगत संरचना की मैपिंग का नया तरीका विकसित किया है। रिसर्च में मौजूदा fiber-optic cable को हजारों vibration sensors की तरह इस्तेमाल किया गया। इससे करीब 100 मीटर तक जमीन के नीचे की संरचना को बिना ड्रिलिंग के समझने की संभावना सामने आई है।

Thunderquakes से धरती के अंदर की जांच कैसे संभव हुई?

वैज्ञानिकों ने बिजली और गरज से पैदा होने वाली seismic waves का इस्तेमाल धरती के नीचे की संरचना समझने के लिए किया है। इस तकनीक में मौजूदा fiber-optic cable को vibration sensors की तरह इस्तेमाल किया गया। रिसर्च के मुताबिक, इससे बिना ड्रिलिंग के करीब 100 मीटर तक जमीन के अंदर की संरचना का अध्ययन किया जा सकता है।

Fiber-optic cable बना हजारों Sensors का नेटवर्क

इस रिसर्च की खास बात यह है कि वैज्ञानिकों ने पारंपरिक seismic equipment के बजाय एक पुराने telecom fiber-optic cable का इस्तेमाल किया। Distributed Acoustic Sensing तकनीक के जरिए इस cable को हजारों vibration sensors की तरह इस्तेमाल किया गया।

Penn State के FORESEE प्रोजेक्ट से जुड़े इस प्रयोग में 4 किलोमीटर से अधिक लंबी fiber-optic cable का इस्तेमाल किया गया। इससे 2,100 से ज्यादा sensors जैसी sensing points तैयार हुईं। वैज्ञानिकों ने दो साल के दौरान 458 स्पष्ट और उच्च गुणवत्ता वाले Thunderquakes रिकॉर्ड किए।

इससे वैज्ञानिकों को जमीन और वातावरण के बीच interaction से पैदा होने वाली कुछ खास seismic waves को समझने का मौका मिला। इनमें air-coupled Rayleigh waves महत्वपूर्ण हैं, जो सतह पर मापी जा सकती हैं और जमीन के नीचे काफी गहराई तक की संरचना का अध्ययन करने में मदद करती हैं।

करीब 100 मीटर गहराई तक पहुंची जानकारी

वैज्ञानिकों ने seismic dispersion नाम की प्रक्रिया का इस्तेमाल किया। अलग-अलग frequency वाली waves जमीन के भीतर अलग-अलग गहराई तक प्रभाव डालती हैं और उनकी गति भी अलग हो सकती है। इन बदलावों का अध्ययन करके वैज्ञानिकों ने जमीन के नीचे seismic wave speed का अनुमान लगाया।

रिसर्च के मुताबिक, इस तरीके से करीब 300 फीट यानी लगभग 100 मीटर तक की subsurface structure की जानकारी हासिल की जा सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके लिए जमीन में ड्रिलिंग करने की जरूरत नहीं पड़ती।

Sinkhole और Groundwater की निगरानी में मदद

इस तकनीक का इस्तेमाल भविष्य में सिर्फ वैज्ञानिक अध्ययन तक सीमित नहीं रह सकता। भूमिगत पानी की movement, environmental contamination, sinkholes और building sites या foundations की जांच में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

अमेरिका के Pennsylvania स्थित State College में किए गए परीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने जमीन के भीतर कुछ ऐसे कमजोर क्षेत्रों की पहचान की, जहां seismic waves आसपास की चट्टानों की तुलना में काफी धीमी गति से चल रही थीं। ये क्षेत्र fractured या weathered rock, पानी या हवा की मौजूदगी से जुड़े हो सकते हैं।

Urban Seismology के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?

भूमिगत संरचना की जांच के मौजूदा तरीकों में अक्सर विशेष seismic equipment और अलग-अलग sensors लगाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे surveys महंगे और बड़े क्षेत्रों में लागू करना मुश्किल हो सकते हैं।

Thunderquakes इस चुनौती को कम करने का रास्ता दिखाते हैं, क्योंकि thunderstorms प्राकृतिक seismic energy source उपलब्ध कराते हैं। वहीं, fiber-optic cables पहले से ही शहरों और कस्बों के नीचे बड़ी संख्या में मौजूद हैं।

भविष्य में इसी infrastructure का इस्तेमाल शहरों के नीचे की जमीन की लगातार निगरानी के लिए किया जा सकता है। इससे urban infrastructure, building foundations और संभावित geological hazards की monitoring को कम लागत में अधिक नियमित बनाने की संभावना बनती है।

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