PVR प्रमोटर अजय बिजली ने पर्सनल लोन के लिए करीब 4 लाख शेयर गिरवी रखे हैं। शेयर प्लेजिंग की खबर के बीच उनकी संघर्षपूर्ण यात्रा और भारत में मल्टीप्लेक्स कल्चर शुरू करने की कहानी फिर चर्चा में है।
Business News: देश के सबसे बड़े मल्टीप्लेक्स ब्रांड PVR के प्रमोटर अजय बिजली एक बार फिर चर्चा में हैं। वजह है उनके द्वारा कंपनी के करीब 4 लाख शेयर गिरवी रखना। यह खबर सामने आते ही शेयर बाजार से लेकर बिजनेस जगत तक हलचल तेज हो गई। लेकिन इस खबर के पीछे सिर्फ शेयर प्लेजिंग की कहानी नहीं है, बल्कि उस शख्स की पूरी जर्नी है जिसने टिकट बेचकर, पोस्टर लगाकर और जोखिम उठाकर भारत का सबसे बड़ा सिनेमा कारोबार खड़ा किया।
अजय बिजली की कहानी सिर्फ एक कारोबारी की नहीं, बल्कि जुनून, फैसलों की हिम्मत और लंबे संघर्ष की मिसाल है।
PVR के प्रमोटर ने गिरवी रखे 4 लाख शेयर
PVR INOX की ओर से 29 दिसंबर को एक्सचेंज फाइलिंग के जरिए जानकारी दी गई कि कंपनी के प्रमोटर और मैनेजिंग डायरेक्टर अजय बिजली ने अपने कुछ शेयर फाइनेंशियल संस्थानों के पास गिरवी रखे हैं।
फाइलिंग के मुताबिक, अजय बिजली ने इन्फिना फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड के पास 3.10 लाख शेयर और HSBC InvestDirect Financial Services के पास 90,037 शेयर गिरवी रखे हैं। इस तरह कुल मिलाकर करीब 4 लाख शेयर पर्सनल लोन के लिए प्लेज किए गए हैं।
इसके साथ ही अजय बिजली द्वारा गिरवी रखे गए शेयरों की कुल संख्या बढ़कर 29.44 लाख हो गई है, जो कंपनी की कुल शेयर पूंजी का लगभग 3 प्रतिशत है।
शेयर गिरवी रखने की खबर का बाजार पर असर
इस जानकारी के सामने आने के बाद 30 दिसंबर को PVR INOX के शेयरों में करीब 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बना, क्योंकि प्रमोटर द्वारा शेयर गिरवी रखना अक्सर बाजार में निगेटिव संकेत माना जाता है।
हालांकि 31 दिसंबर को शेयरों में करीब 1 प्रतिशत की रिकवरी भी देखी गई, जिससे यह साफ हुआ कि बाजार ने इस खबर को पूरी तरह नकारात्मक रूप में नहीं लिया। कंपनी की ओर से भी यह स्पष्ट किया गया कि शेयर प्लेजिंग पर्सनल लोन के लिए की गई है।
क्या होती है Share Pledging, निवेशकों को क्यों रहना चाहिए सतर्क
शेयर बाजार की भाषा में Share Pledging का मतलब होता है कि प्रमोटर अपने शेयर किसी बैंक या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के पास गिरवी रखकर लोन लेते हैं। आमतौर पर प्रमोटर ऐसा तब करते हैं जब उन्हें फंड की जरूरत होती है लेकिन वे अपने शेयर बेचना नहीं चाहते। इससे उनकी कंपनी में हिस्सेदारी बनी रहती है और जरूरत का पैसा भी मिल जाता है।
हालांकि, अगर शेयर की कीमत ज्यादा गिरती है तो लोन देने वाला संस्थान अतिरिक्त शेयर गिरवी रखने या शेयर बेचने का दबाव बना सकता है। इसी वजह से निवेशक प्रमोटर की शेयर प्लेजिंग पर खास नजर रखते हैं।
अजय बिजली ने क्यों चुना सिनेमा बिजनेस
अजय बिजली की कहानी यहां से और दिलचस्प हो जाती है। उन्होंने वह रास्ता चुना जो उनके परिवार के लिए आसान नहीं था। दिल्ली में उनके पिता ने साल 1978 में प्रिया सिनेमा खरीदा था। परिवार का पारंपरिक कारोबार इसी से जुड़ा था, लेकिन अजय बिजली की सोच इससे कहीं आगे थी।
वह भारत में सिनेमा देखने के अनुभव को बदलना चाहते थे। सिंगल स्क्रीन थिएटर से आगे बढ़कर उन्होंने मल्टीप्लेक्स का सपना देखा। इसी सपने के साथ उन्होंने अपने पिता के पुश्तैनी कारोबार से अलग राह चुनी।
1997 में रखी PVR की नींव

साल 1997 में अजय बिजली ने ‘प्रिया विलेज रोड शो’ यानी PVR की शुरुआत की। उस समय भारत में मल्टीप्लेक्स कल्चर लगभग न के बराबर था। लोग सिंगल स्क्रीन थिएटर में फिल्म देखने के आदी थे। मल्टीप्लेक्स का कॉन्सेप्ट नया था, रिस्क भरा था और भारी निवेश की जरूरत थी।
इसके बावजूद अजय बिजली ने पीछे हटने का फैसला नहीं किया। उन्होंने छोटे स्तर से शुरुआत की और धीरे-धीरे PVR को एक ब्रांड के रूप में खड़ा किया।
खुद लगाए पोस्टर, खुद बेचे टिकट
अजय बिजली के जुनून का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने PVR को ब्रांड बनाने के लिए खुद जमीन पर काम किया।
शुरुआती दौर में उन्होंने खुद मूवी के पोस्टर लगाए, टिकट बेचे और दर्शकों से फीडबैक लिया। वह सिर्फ ऑफिस में बैठकर फैसले लेने वाले बिजनेसमैन नहीं थे, बल्कि हर स्तर पर शामिल रहे। यही वजह रही कि PVR धीरे-धीरे लोगों की पसंद बनता चला गया।
भारत में मल्टीप्लेक्स कल्चर की शुरुआत
अजय बिजली को भारत में मल्टीप्लेक्स कल्चर का जनक भी कहा जाता है। उन्होंने सिनेमा को सिर्फ फिल्म देखने की जगह नहीं, बल्कि एक एक्सपीरियंस (experience) के रूप में पेश किया। एसी हॉल, बेहतर साउंड सिस्टम, आरामदायक सीटें और फूड कोर्ट जैसे कॉन्सेप्ट ने लोगों को आकर्षित किया। धीरे-धीरे PVR ने बड़े शहरों से निकलकर छोटे शहरों तक अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
आज कितना बड़ा है PVR का कारोबार
आज की तारीख में PVR INOX भारत का नंबर वन मल्टीप्लेक्स ब्रांड है। कंपनी देश के 111 शहरों में मौजूद है। PVR के पास कुल 1743 स्क्रीन्स हैं और करीब 3.54 लाख सीटों की क्षमता है। भारत के अलावा श्रीलंका में भी PVR के मल्टीप्लेक्स संचालित हो रहे हैं। यह सफर किसी एक रात में तय नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे सालों की मेहनत, निवेश और सही समय पर लिए गए फैसले हैं।
OTT के दौर में सिनेमा बिजनेस की चुनौती
पिछले कुछ वर्षों में OTT प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते चलन ने सिनेमा कारोबार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। कोविड के बाद लोगों की आदतें बदलीं और घर पर कंटेंट देखने का ट्रेंड बढ़ा। इस वजह से मल्टीप्लेक्स बिजनेस पर असर जरूर पड़ा। हालांकि अजय बिजली ने कई बार साफ किया है कि थिएटर का अनुभव OTT से अलग है और सिनेमा हॉल की अहमियत बनी रहेगी।
शेयर गिरवी रखने को लेकर क्या कहते हैं एक्सपर्ट
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि शेयर प्लेजिंग को हमेशा नकारात्मक रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अगर प्रमोटर की हिस्सेदारी सीमित मात्रा में गिरवी है और कंपनी की फंडामेंटल स्थिति मजबूत है, तो इसका असर लंबे समय में कम होता है।
PVR के मामले में भी यही कहा जा रहा है कि शेयर गिरवी रखना पर्सनल लोन के लिए है और कंपनी के ऑपरेशंस पर इसका सीधा असर नहीं पड़ता।












