तिलक लगाने के सही नियम: जानिए भगवान, स्वयं और अतिथि को किस उंगली से लगाना चाहिए तिलक

जानिए भगवान, स्वयं, अतिथि और पितरों को किस उंगली से तिलक लगाना चाहिए। सनातन धर्म में तिलक लगाने के सही नियम और धार्मिक महत्व पढ़ें।

सनातन धर्म में तिलक लगाने के लिए अलग-अलग उंगलियों का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान, स्वयं, अतिथि और पितरों को अलग उंगली से तिलक लगाया जाता है, जिससे पूजा का शुभ फल प्राप्त होता है।

 Tilak Rules:सनातन धर्म में तिलक को आस्था और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार तिलक लगाने के लिए दाहिने हाथ की हर उंगली का अलग महत्व होता है। भगवान, स्वयं, अतिथि और पितरों को तिलक लगाने के नियम अलग बताए गए हैं। सही विधि से तिलक लगाने को शुभ और आध्यात्मिक रूप से लाभकारी माना जाता है।

तिलक लगाने में उंगलियों का क्या होता है महत्व

सनातन परंपरा में तिलक केवल धार्मिक पहचान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और शुभता का प्रतीक माना जाता है। पूजा-पाठ या किसी मांगलिक कार्य के दौरान तिलक लगाने के लिए किस उंगली का उपयोग करना चाहिए, इसके भी विशेष नियम बताए गए हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर उंगली का संबंध अलग ग्रह और ऊर्जा से जुड़ा होता है।

इसी वजह से भगवान, स्वयं, अतिथि और पितरों को तिलक लगाने के लिए अलग-अलग उंगलियों का उपयोग करने की परंपरा मानी जाती है।

भगवान और स्वयं को किस उंगली से लगाएं तिलक

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अनामिका यानी रिंग फिंगर को सबसे शुभ माना गया है। यह सूर्य से जुड़ी मानी जाती है और शांति, सम्मान व सफलता का प्रतीक होती है। भगवान, देवी-देवताओं और गुरु को तिलक लगाने के लिए इसी उंगली का उपयोग करना उत्तम माना गया है।

वहीं स्वयं को तिलक लगाने के लिए मध्यमा उंगली का इस्तेमाल किया जाता है। इसका संबंध शनि ग्रह से माना गया है। मान्यता है कि पूजा के बाद पहले भगवान को तिलक लगाना चाहिए और फिर खुद को तिलक करना चाहिए।

अतिथि या सम्मानित व्यक्ति को तिलक लगाने के लिए अंगूठे का उपयोग शुभ माना गया है। यह शुक्र ग्रह से संबंधित माना जाता है, जो यश और वैभव का प्रतीक होता है।

किन बातों का रखना चाहिए विशेष ध्यान

तर्जनी उंगली का उपयोग सामान्य पूजा में नहीं किया जाता। इसका प्रयोग पितरों और पिंडदान से जुड़े कार्यों में बताया गया है। वहीं कनिष्ठा यानी सबसे छोटी उंगली को तिलक और पूजा कार्यों में इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तिलक हमेशा स्नान  बाद ही लगाना चाहिए। तिलक दाहिने हाथ से और दोनों भवों के बीच आज्ञा चक्र पर लगाया जाता है। इसके लिए चंदन, कुमकुम, सिंदूर या भस्म का उपयोग शुभ माना गया है।

Leave a comment