तमिलनाडु में सरकार गठन पर सस्पेंस: बहुमत से दूर विजय, राज्यपाल की भूमिका पर बढ़ी नजरें

तमिलनाडु में नई सरकार को लेकर सस्पेंस बना है TVK बहुमत से दूर है। विजय फिर राज्यपाल से मिलेंगे, जबकि MK स्टालिन ने कहा कि छह महीने तक सरकार का विरोध नहीं करेगी।

तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। TVK बहुमत से दूर है और विजय आज फिर राज्यपाल से मिलेंगे। वहीं DMK प्रमुख एमके स्टालिन ने कहा कि उनकी पार्टी छह महीने तक नई सरकार का विरोध नहीं करेगी।

चेन्नई: Tamil Nadu की राजनीति में विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद बड़ा राजनीतिक गतिरोध देखने को मिल रहा है। अभिनेता से राजनेता बने Vijay की पार्टी TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत से दूर होने के कारण सरकार गठन का रास्ता आसान नहीं दिख रहा।

234 सदस्यीय विधानसभा में TVK को 108 सीटें मिली हैं, जबकि सरकार बनाने के लिए 118 सीटों का समर्थन जरूरी है। कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन मिलने के बावजूद पार्टी बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच पा रही है। इसी कारण राज्यपाल ने विजय से पहले पर्याप्त समर्थन दिखाने को कहा है और फिलहाल सरकार बनाने का औपचारिक निमंत्रण नहीं दिया गया।

राज्य की राजनीति में इस घटनाक्रम ने गठबंधन, समर्थन और संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

राज्यपाल से दोबारा मुलाकात करेंगे विजय

राजनीतिक घटनाक्रम के बीच Vijay गुरुवार को एक बार फिर राज्यपाल से मिलने वाले हैं। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में वह अतिरिक्त समर्थन जुटाने और सरकार गठन का नया दावा पेश करने की कोशिश कर सकते हैं।

हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि केवल सबसे बड़ी पार्टी होना पर्याप्त नहीं होता। राज्यपाल यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सरकार स्थिर रहे और विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर सके।

डीएमके ने विपक्ष में बैठने का संकेत दिया

M. K. Stalin ने स्पष्ट संकेत दिया है कि उनकी पार्टी सरकार गठन की दौड़ में शामिल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि जनादेश TVK को मिला है और लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए उनकी पार्टी अगले छह महीने तक नई सरकार का विरोध नहीं करेगी।

स्टालिन के इस बयान को तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है। इससे पहले ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि DMK और AIADMK किसी अप्रत्याशित समीकरण पर विचार कर सकते हैं, लेकिन स्टालिन के बयान ने इन चर्चाओं पर फिलहाल विराम लगा दिया है।

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार DMK विपक्ष में बैठकर सरकार के प्रदर्शन पर नजर रखना चाहती है, ताकि भविष्य की राजनीति में उसे रणनीतिक लाभ मिल सके।

AIADMK ने समर्थन से किया इनकार

All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam ने TVK को समर्थन देने की संभावना पूरी तरह खारिज कर दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता केपी मुनुसामी ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में AIADMK, विजय की पार्टी का समर्थन नहीं करेगी।

इस बयान के बाद TVK के लिए बहुमत जुटाना और कठिन हो गया है। AIADMK का यह रुख तमिलनाडु की राजनीति में पुराने क्षेत्रीय दलों और नए राजनीतिक उभार के बीच बढ़ते टकराव को भी दर्शाता है।

कांग्रेस की रणनीति पर उठे सवाल

Indian National Congress ने चुनाव बाद DMK से दूरी बनाकर TVK को समर्थन देने का फैसला किया, लेकिन इसके बावजूद सरकार गठन की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस ने जल्दबाजी में फैसला लिया। अब पार्टी ऐसी स्थिति में पहुंच गई है जहां न तो वह पूरी तरह DMK के साथ रह गई और न ही TVK को स्थिर बहुमत दिला पाई।

विश्लेषकों का कहना है कि अगर TVK बहुमत साबित नहीं कर पाती है, तो कांग्रेस की रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

VCK ने अभी नहीं खोले पत्ते

दो सीटें जीतने वाली Viduthalai Chiruthaigal Katchi ने अभी तक TVK को समर्थन देने पर अंतिम फैसला नहीं लिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय अध्यक्ष थोल थिरुमावलवन लेंगे।

अगर VCK समर्थन देती है, तब भी TVK को बहुमत के लिए अन्य विधायकों की जरूरत पड़ सकती है।

क्या राज्यपाल सरकार गठन रोक सकते हैं?

तमिलनाडु में मौजूदा राजनीतिक संकट के बीच राज्यपाल की संवैधानिक भूमिका चर्चा के केंद्र में आ गई है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 163 के तहत राज्यपाल को कुछ परिस्थितियों में विवेकाधीन शक्तियां प्राप्त हैं।

जब किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तब राज्यपाल यह तय करते हैं कि किसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाए। इसमें केवल सबसे बड़ी पार्टी होना पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि यह भी देखा जाता है कि कौन स्थिर सरकार देने की स्थिति में है।

संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार राज्यपाल किसी भी दल से समर्थन पत्र, गठबंधन दस्तावेज या बहुमत साबित करने के ठोस प्रमाण मांग सकते हैं। यही कारण है कि TVK को फिलहाल सरकार गठन का सीधा निमंत्रण नहीं मिला है।

DMK ने लगाया AIADMK पर आरोप

DMK सांसद कलानिधि वीरास्वामी ने आरोप लगाया है कि AIADMK अप्रत्यक्ष रूप से विजय को मुख्यमंत्री बनने से रोक रही है। उनका दावा है कि यह जनादेश का अपमान है और क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

हालांकि AIADMK ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि उसका फैसला पूरी तरह राजनीतिक सिद्धांतों पर आधारित है।

तमिलनाडु की राजनीति में नया मोड़

Tamil Nadu लंबे समय से DMK और AIADMK के बीच सत्ता संघर्ष का केंद्र रहा है। लेकिन इस चुनाव में TVK के उभार ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दे दी है।

विजय की लोकप्रियता और युवा मतदाताओं के समर्थन ने TVK को राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बना दिया, लेकिन सरकार गठन के लिए जरूरी संख्या नहीं मिलने से राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति बन गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन तमिलनाडु की राजनीति के लिए बेहद अहम होंगे। यदि TVK बहुमत साबित करने में सफल रहती है, तो यह राज्य में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत हो सकती है। वहीं अगर पार्टी संख्या जुटाने में विफल रहती है, तो राज्य में वैकल्पिक गठबंधन या राष्ट्रपति शासन जैसी संभावनाओं पर भी चर्चा तेज हो सकती है।

राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा असर

तमिलनाडु में जारी यह राजनीतिक गतिरोध केवल राज्य तक सीमित नहीं है। दक्षिण भारत की राजनीति में होने वाले बदलावों का असर राष्ट्रीय गठबंधन राजनीति पर भी पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि Vijay सफलतापूर्वक सरकार बना लेते हैं, तो वह दक्षिण भारतीय राजनीति में एक बड़े क्षेत्रीय चेहरे के रूप में उभर सकते हैं। वहीं पारंपरिक दलों के लिए यह संकेत होगा कि नई पीढ़ी के मतदाता अब अलग राजनीतिक विकल्प तलाश रहे हैं।

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