त्रिपुरा में वोटों की गिनती के दौरान बवाल, लाठीचार्ज के बाद भगदड़ में एक की मौत

पुरा के खैवाई में पंचायत चुनाव की मतगणना के दौरान सुरक्षा बलों के लाठीचार्ज के बाद भगदड़ में एक व्यक्ति की मौत हो गई। घटना को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

त्रिपुरा के खैवाई जिले में गांव समिति चुनाव की मतगणना के दौरान सोमवार को तनाव बढ़ गया। चंपाहावर मतगणना केंद्र के बाहर सुरक्षा बलों के लाठीचार्ज के बाद भगदड़ में एक व्यक्ति की मौत हो गई। घटना को लेकर पुलिस और TIPRA Motha के दावे अलग-अलग हैं।

अगरतला: त्रिपुरा में आदिवासी क्षेत्रों की ग्राम समिति चुनावों की मतगणना के दौरान सोमवार को तनाव की स्थिति पैदा हो गई। खैवाई जिले के चंपाहावर मतगणना केंद्र के बाहर बड़ी संख्या में विभिन्न राजनीतिक दलों के समर्थक चुनाव परिणाम जानने के लिए जुटे थे। इसी दौरान विवाद बढ़ने के बाद सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया। इसके बाद भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हुई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई। 

मृतक की पहचान मटीलाल कर्मकार के रूप में हुई है। TIPRA Motha के नेताओं ने दावा किया कि कर्मकार पार्टी से सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे और सुरक्षा बलों की कथित लाठीचार्ज कार्रवाई में घायल होने के बाद उनकी मौत हुई। हालांकि, पुलिस के प्रारंभिक आकलन में अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह पुष्टि हो कि उनकी चोटें सीधे लाठीचार्ज के कारण लगी थीं। 

घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और मामले की जांच की जा रही है।

मतगणना केंद्र के बाहर कैसे बिगड़ा माहौल?

घटना सोमवार को चंपाहावर इलाके में उस समय हुई, जब ग्राम समिति चुनावों की मतगणना चल रही थी। रिपोर्टों के मुताबिक, अलग-अलग राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थक परिणाम जानने के लिए मतगणना केंद्र के बाहर जमा हुए थे।

स्थिति बिगड़ने के बाद सुरक्षा कर्मियों ने भीड़ को हटाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप किया। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने बताया कि सुरक्षा बलों द्वारा लाठीचार्ज के बाद भगदड़ मची और इसी दौरान एक व्यक्ति की मौत हुई। उन्होंने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और मृतक के परिवार को सरकार की ओर से हरसंभव सहायता देने की बात कही। 

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ग्राम समिति चुनाव की पूरी प्रक्रिया अधिकांश हिस्सों में शांतिपूर्ण रही, हालांकि कुछ स्थानों पर अप्रिय घटनाएं हुईं।

मृतक को लेकर अलग-अलग दावे

TIPRA Motha के विधायक रंजीत देबबर्मा ने दावा किया कि मृतक मटीलाल कर्मकार पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मकार को मतगणना केंद्र के बाहर सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान गंभीर चोटें आईं और बाद में उनकी मौत हो गई। देबबर्मा ने कहा कि पार्टी CCTV फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी की समीक्षा के बाद प्राथमिकी दर्ज कराने पर फैसला करेगी। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील भी की।

दूसरी ओर, पुलिस के प्रारंभिक बयान में कहा गया है कि कर्मकार को मतगणना केंद्र से करीब 100 मीटर दूर घायल अवस्था में पाया गया था। उनके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोट के निशान थे। उन्हें पहले खैवाई जिला अस्पताल ले जाया गया और बाद में अगरतला के एजीएमसी एवं जीबी पंत अस्पताल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुलिस के प्रारंभिक जांच निष्कर्ष के मुताबिक, अभी तक ऐसा सबूत नहीं मिला है जिससे यह कहा जा सके कि चोटें सुरक्षा बलों के लाठीचार्ज से ही लगी थीं। मौत की सटीक वजह आगे की जांच से स्पष्ट होने की बात कही गई है।

12 लोग घायल, पुलिसकर्मी भी प्रभावित

घटना के दौरान कई अन्य लोगों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई में कम से कम 12 लोग घायल हुए। इनमें महिलाएं भी शामिल थीं। कुछ घायलों को खैवाई अस्पताल ले जाया गया। 

रिपोर्ट के मुताबिक, झड़प के दौरान पुलिस और त्रिपुरा स्टेट राइफल्स के कुछ जवान भी घायल हुए। एक पुलिस अधिकारी के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। इससे पहले भी मतगणना के दौरान राज्य के कुछ अन्य इलाकों में तनाव, प्रदर्शन और सड़क अवरोध की घटनाएं सामने आई थीं। हालांकि, प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के बाद स्थिति नियंत्रण में होने की बात कही है।

पुलिस का दावा- भीड़ ने किया पथराव

स्थानीय पुलिस के अनुसार, मतगणना केंद्र के बाहर कुछ राजनीतिक समर्थकों के बीच पहले कहासुनी हुई और बाद में स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई। कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा कर्मियों ने भीड़ को हटाने की कोशिश की।

पुलिस के एक विस्तृत प्रारंभिक विवरण के मुताबिक, सुरक्षा कर्मियों के हस्तक्षेप के दौरान भीड़ की ओर से पत्थरबाजी भी की गई। इसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए न्यूनतम आवश्यक बल का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है। 

पुलिस ने कहा है कि इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और फिलहाल कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में है।

त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों में हुए थे ग्राम समिति चुनाव

यह चुनाव त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (TTAADC) के तहत आने वाली ग्राम समितियों से जुड़े थे। कुल 587 ग्राम समितियों में 4,597 सीटों की व्यवस्था थी। इनमें से 2,950 सीटों पर मतदान हुआ, जबकि बड़ी संख्या में सीटें निर्विरोध भी तय हुई थीं।

मतगणना के दौरान राज्य के कई केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मतपत्रों की मैनुअल गिनती के कारण प्रक्रिया में समय लगने की जानकारी भी चुनाव अधिकारियों ने दी थी। 

TIPRA Motha का प्रदर्शन

शुरुआती नतीजों में TIPRA Motha Party ने बड़ी संख्या में सीटों पर जीत दर्ज की। सोमवार को उपलब्ध शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, पार्टी ने घोषित 2,037 सीटों में से 1,814 सीटें जीती थीं, जबकि BJP ने 184 सीटों पर जीत दर्ज की थी। निर्दलीय उम्मीदवारों ने 22 सीटें जीती थीं। 

हालांकि, मतगणना आगे बढ़ने के साथ आंकड़े बदलते गए। बाद के अपडेट में TIPRA Motha की जीत का आंकड़ा और बढ़ा। अंतिम परिणामों के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पार्टी ने 4,594 घोषित सीटों में से 3,428 सीटें जीतीं, जबकि BJP को 859 सीटें मिलीं और CPI(M) ने 87 सीटों पर जीत दर्ज की। 

इसलिए शुरुआती और अंतिम आंकड़ों में अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।

BJP-TIPRA Motha गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण चुनाव

TIPRA Motha राज्य में सत्तारूढ़ BJP की सहयोगी पार्टी है। ग्राम समिति चुनावों के नतीजों ने आदिवासी क्षेत्रों में दोनों दलों की राजनीतिक स्थिति को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

हालांकि, इन चुनावों के स्थानीय निकाय स्वरूप और अलग निर्वाचन क्षेत्र को देखते हुए इनके परिणामों को सीधे राज्य विधानसभा चुनाव के नतीजों के बराबर नहीं माना जा सकता। फिर भी, TTAADC क्षेत्रों में स्थानीय राजनीतिक समीकरण समझने के लिए ये नतीजे महत्वपूर्ण हैं।

IG की गाड़ी पर हमले की भी जानकारी

मतगणना के दौरान त्रिपुरा के सिपाहीजाला जिले के थलिबाड़ी इलाके में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इप्पर मोंचक की गाड़ी पर हमले की जानकारी भी सामने आई। 

मुख्यमंत्री माणिक साहा से जब इस घटना को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने मामले की जानकारी लेने और जांच कराने की बात कही। राज्य में मतगणना के दौरान सामने आई अलग-अलग घटनाओं के बाद प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है।

अब जांच से साफ होगी मौत की वजह

चंपाहावर की घटना में सबसे महत्वपूर्ण सवाल मटीलाल कर्मकार की मौत की वजह को लेकर है। मुख्यमंत्री का कहना है कि लाठीचार्ज के बाद भगदड़ में उनकी मौत हुई, जबकि TIPRA Motha ने सीधे सुरक्षा बलों की कार्रवाई को उनकी चोटों और मौत से जोड़ा है।

पुलिस के प्रारंभिक निष्कर्ष में अभी तक लाठीचार्ज से चोट लगने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए मौत के कारण पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और मेडिकल तथा अन्य साक्ष्यों के सामने आने के बाद ही निकाला जा सकेगा।  फिलहाल प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट इस मामले में आगे की जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

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