ट्रंप की नजर ग्रीनलैंड पर, पुतिन ने बताया अमेरिका-डेनमार्क का हाल

ट्रंप की नजर ग्रीनलैंड पर, पुतिन ने बताया अमेरिका-डेनमार्क का हाल

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का ग्रीनलैंड पर रुख विवादित है। रूस के पुतिन ने कहा कि यह अमेरिका और डेनमार्क का मामला है, रूस इसमें शामिल नहीं। उन्होंने डेनमार्क और अमेरिका के ऐतिहासिक लेन-देन का भी जिक्र किया।

World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ग्रीनलैंड (Greenland) को हासिल करने की बात कर रहे हैं। उनके इस रुख ने अमेरिका और डेनमार्क (Denmark) के बीच बढ़ते विवाद को फिर से हवा दे दी है। इस विवाद पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने अपना रुख साफ किया और कहा कि रूस का ग्रीनलैंड से कोई लेना-देना नहीं है। पुतिन ने इस विषय पर टिप्पणी करते हुए डेनमार्क और अमेरिका के ऐतिहासिक लेन-देन का भी जिक्र किया और बताया कि पहले भी डेनमार्क ने कुछ क्षेत्रों को अमेरिका को बेच दिया था।

ट्रंप की नजर ग्रीनलैंड पर क्यों

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप का रुख सिर्फ बयानबाजी नहीं है। उनका मानना है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की national security और आर्कटिक (Arctic) क्षेत्र में रणनीतिक स्थिति के लिए बेहद अहम है। यहां अमेरिका पहले से सैन्य रूप से सक्रिय है और ट्रंप चाहते हैं कि यह क्षेत्र पूरी तरह अमेरिका के प्रभाव में रहे।

साल 2019 में जब ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति थे, तब भी उन्होंने ग्रीनलैंड खरीदने की बात कही थी। उस समय डेनमार्क ने इसे अस्वीकार कर दिया था। अब राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने एक बार फिर इस क्षेत्र को हासिल करने की बात उठाई है।

पुतिन ने रूस का रुख किया साफ

बुधवार 21 जनवरी को रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (National Security Council) की बैठक के बाद पुतिन ने टेलीविजन पर संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड का विवाद रूस को प्रभावित नहीं करता। पुतिन ने साफ शब्दों में कहा, 'ग्रीनलैंड का क्या होता है, इससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है।'

पुतिन ने यह भी कहा कि यह मामला अमेरिका और डेनमार्क के बीच का है और उन्हें भरोसा है कि दोनों देश इसे आपस में सुलझा लेंगे। उनका यह बयान दुनिया को यह संकेत देता है कि रूस इस विवाद में सीधे तौर पर शामिल नहीं होगा और आर्कटिक क्षेत्र में अपने हितों को स्थिर रखना चाहता है।

डेनमार्क के रवैये पर पुतिन की टिप्पणी

पुतिन ने डेनमार्क की ऐतिहासिक नीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि डेनमार्क ने हमेशा ग्रीनलैंड को एक उपनिवेश (colony) की तरह माना है और वहां अपने नियंत्रण को बनाए रखने के लिए कठोर, कई बार क्रूर रवैया अपनाया है।

हालांकि पुतिन ने यह भी कहा कि यह बिल्कुल अलग मामला है और फिलहाल किसी को इसमें ज्यादा दिलचस्पी नहीं है। उनके अनुसार अमेरिका और डेनमार्क इसे आपसी बातचीत के जरिए सुलझा लेंगे।

इतिहास में डेनमार्क और अमेरिका के लेन-देन

पुतिन ने अपने बयान में इतिहास का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 1917 में डेनमार्क ने वर्जिन द्वीप समूह (Virgin Islands) को संयुक्त राज्य अमेरिका को बेच दिया था। इसके अलावा उन्होंने 1867 में रूस द्वारा अलास्का (Alaska) को अमेरिका को 72 लाख अमेरिकी डॉलर में बेचने का उदाहरण भी दिया।

इन ऐतिहासिक उदाहरणों के जरिए पुतिन ने यह दिखाने की कोशिश की कि अमेरिका पहले भी रणनीतिक क्षेत्रों को खरीदने में सक्रिय रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रंप की ग्रीनलैंड नीति को समझने का एक संदर्भ भी है।

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